महाराष्ट्र के ठाणे में भाईंदर के नवघर रोड पर स्थित नवयुवक चौक इस वर्ष एक अनूठे और खास गणेश उत्सव का गवाह बना है। यहाँ पर आयोजित 25वें गणेशोत्सव ने नई परंपरा की शुरुआत की है, जहां श्रद्धालु भक्तों ने भगवान गणेश की एक नई, पर्यावरण के अनुकूल प्रतिमा का दर्शन किया। इस खास आयोजन में पारंपरिक मराठी सजावट के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी प्रमुख रहा।
कागज से बनी 25 फुट ऊंची गणेश प्रतिमा का अनूठा आकर्षण
इस वर्ष की खासियत यह है कि मंडल ने पारंपरिक तरीके से बनी हुई 25 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा का निर्माण किया है, जो पूरी तरह से इको-फ्रेंडली, कागज और प्राकृतिक सामग्री का उपयोग कर बनाई गई है। यह प्रतिमा न केवल श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी प्रतीक है। मूर्तिकार राजेश मयेकर द्वारा बनाई गई इस प्रतिमा को टिश्यू पेपर और खड़ू (चौक) पाउडर का उपयोग कर तैयार किया गया है, जो विसर्जन के समय पानी में आसानी से घुल जाएगी।
पर्यावरण संरक्षण और श्रद्धा का संगम
पिछले छह वर्षों से भाईंदर के नवयुवक मित्र मंडल पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर अपनी गणेश प्रतिमा का निर्माण कर रहा है। मंडल के अध्यक्ष हर्षल सावंत का मानना है कि भगवान गणेश केवल विघ्नहर्ता ही नहीं, बल्कि प्रकृति और जीव-जगत के भी संरक्षक हैं। इसीलिए, इस वर्ष की प्रतिमा को प्राकृतिक सामग्री से बनाकर इस संदेश को फैलाने का प्रयास किया गया है कि भगवान की पूजा तभी सार्थक है जब हम उनके विसर्जन के बाद भी प्रकृति का संरक्षण करें।
विसर्जन में आसान और पर्यावरण के अनुकूल
मंडल का मकसद है कि गणेश उत्सव के दौरान जल प्रदूषण को रोका जाए। इस प्रतिमा का वज़न लगभग 250 किलो है और इसे विसर्जन के दौरान पानी में लगभग 30 मिनट में घुल जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इससे जल प्रदूषण की समस्या से निपटा जा सकता है और प्रदूषण मुक्त गणेश उत्सव मनाया जा सकता है। हेमंत सावंत का कहना है कि भगवान गणेश की पूजा का सही अर्थ है समाज की सेवा और पर्यावरण का संरक्षण, और यह आदर्श इस गणेशोत्सव में देखने को मिला है।
सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन
गणेशोत्सव के दौरान नवयुवक मित्र मंडल ने अनेक सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए हैं। इनमें स्वास्थ्य एवं रक्तदान शिविर, महिलाओं और बच्चों के लिए प्रतियोगिताएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम, श्री गणेश महाभंडारा और स्कूल- कॉलेज के विद्यार्थियों का सम्मान शामिल हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि समाज में सेवा, सद्भाव और सहयोग की भावना को मजबूत करना है।

महिला खेल प्रतियोगिता और पुरस्कार
इस वर्ष का विशेष आयोजन महिलाओं के लिए खेल मांडिएला प्रतियोगिता है, जिसमें आकर्षक पुरस्कार स्वरूप सोने की नथ और पैठणी दी जा रही है। यह कार्यक्रम महिलाओं के सशक्तिकरण और उत्साहवर्धन के लिए आयोजित किया गया है। मंडल के सचिव सुनील जंगले, कोषाध्यक्ष पवन शर्मा और उपाध्यक्ष सतीश सिंह जैसे कार्यकर्ता इस आयोजन में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
गणेशोत्सव में पर्यावरण जागरूकता का संदेश
हेमंत सावंत का मानना है कि लोकमान्य तिलक द्वारा शुरू किया गया गणेश उत्सव समाज में एकता और जागरूकता का प्रतीक है। आज भी, जब हम पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का हिस्सा बनाते हैं, तो यह उत्सव सामाजिक समरसता और सद्भाव का माध्यम बन सकता है। उन्होंने नागरिकों और गणेश मंडलों से आग्रह किया है कि वे भी पर्यावरण के प्रति जागरूक होकर, इको-फ्रेंडली तरीके से गणेश उत्सव मनाएं।
























