भाईंदर में बच्चों-युवाओं ने सजाया जैन धर्म का भव्य ज्ञान मेला

Mumbai News: जैन धर्म में पर्युषण पर्व को आत्म-चिंतन, क्षमा, तप और आध्यात्मिक उत्थान का काल माना जाता है। इसी पवित्र अवधि में भाईंदर पश्चिम के जैन समाज द्वारा आयोजित यह ज्ञान मेला साधारण धार्मिक समारोह से कहीं आगे जाकर एक जीवंत शिक्षा-केंद्र जैसा अनुभव देता है।

पर्युषण पर भाईंदर में सजा ऐसा मेला, लोग रह गए दंग!

HIGHLIGHTS

  • झांकियों में जी उठा जीवन से मोक्ष तक का सफर!
  • मोक्ष का रहस्य समझाने उतरे बच्चे, झांकियों ने जीते दिल!
  • धर्म और विज्ञान का अनोखा संगम! भाईंदर बना चर्चा का विषय
  • बच्चों के हाथों जी उठा जैन धर्म, देखते ही खिंचे लोग!

Mumbai News: पर्युषण पर्व की पावन परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से भाईंदर पश्चिम स्थित जैन समाज ने एक अनोखी पहल की है। यहां आयोजित धार्मिक ज्ञान मेले ने श्रद्धालुओं और जिज्ञासु आगंतुकों के बीच गहरी छाप छोड़ी है।

गुरु माता विस्मिताश्री माताजी के आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन में आयोजित इस मेले में धर्म, अध्यात्म, संस्कार और विज्ञान को मिलाकर प्रस्तुत करने का सफल प्रयोग देखने को मिला। झांकियों, प्रदर्शनियों और दृश्य-श्रव्य माध्यमों से सजे इस आयोजन ने प्रवास के दौरान आगंतुकों का मन और मस्तिष्क, दोनों को आकर्षित किया।

पर्युषण की पावनता में अनूठा आयोजन

जैन धर्म में पर्युषण पर्व को आत्म-चिंतन, क्षमा, तप और आध्यात्मिक उत्थान का काल माना जाता है। इसी पवित्र अवधि में भाईंदर पश्चिम के जैन समाज द्वारा आयोजित यह ज्ञान मेला साधारण धार्मिक समारोह से कहीं आगे जाकर एक जीवंत शिक्षा-केंद्र जैसा अनुभव देता है।

आयोजन का केंद्रीय भाव रहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रहे, बल्कि बच्चों और युवाओं की सोच व भाषा में उन तक पहुंचे। इसी सोच को धरातल पर उतारते हुए मेले में हर स्टॉल और हर झांकी को ज्ञानवर्धक बनाया गया।

झांकियों में जीवंत हुए जैन दर्शन के मूल सूत्र

मेले की सबसे बड़ी विशेषता रही वह झांकियां, जिनके माध्यम से मानव जीवन की उत्पत्ति से लेकर मोक्ष प्राप्ति तक की पूरी आध्यात्मिक यात्रा को चरण-दर-चरण दर्शाया गया। कर्म बंधन से मुक्ति, पाप-पुण्य का फल, अहिंसा का महत्व, संयम की शक्ति और आत्मशुद्धि की ओर बढ़ते कदम — इन सभी गहन अवधारणाओं को सरल दृश्यों और प्रतीकों में पिरोया गया।

अहिंसा परमो धर्मः के सिद्धांत को आज के पर्यावरण संरक्षण और शांति के विषयों से जोड़कर प्रस्तुत करने का प्रयास विशेष रूप से सराहा गया। संस्कार, आत्मसंयम और मोक्ष जैसे विषयों को परंपरागत ढंग से ही नहीं, बल्कि आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ रखकर भी समझाया गया, जिससे आम दर्शक के लिए जैन दर्शन को समझना सहज हो गया।

बच्चों और युवाओं ने निभाई अहम भूमिका

इस आयोजन को सबसे अलग पहचान दिलाने वाली बात रही बच्चों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी। मेले में सजी अधिकांश झांकियों का निर्माण स्वयं युवा प्रतिभाओं ने मिलकर किया। डिजाइनिंग से लेकर सजावट, रोशनी और प्रस्तुति तक — हर चरण में नई पीढ़ी ने अपनी रचनात्मकता का जौहर दिखाया।

इस अनुभव ने उन्हें टीमवर्क, अनुशासन, जिम्मेदारी और धार्मिक ज्ञान का समानांतर शिक्षा दी। आयोजनकर्ताओं का मानना है कि जब युवा स्वयं धर्म को समझकर उसे प्रस्तुत करते हैं, तो उनके जीवन मूल्यों के प्रति आस्था और गहरी हो जाती है।

पांचवें आयोजन से भी भव्य निकली यह प्रस्तुति

ज्ञान मेले से जुड़े नितिन शाह ने बताया कि यह मेला इससे पूर्व पांच बार आयोजित किया जा चुका है और यह परंपरा हर वर्ष नई ऊंचाइयों को छू रही है। उनके अनुसार इस वर्ष का आयोजन अपने स्वरूप, भव्यता और ज्ञान की गहराई के मामले में अब तक का सबसे शानदार रहा। प्रत्येक वर्ष नए विषय, नई तकनीक और बेहतर प्रस्तुति के साथ यह मेला क्षेत्र में एक प्रतीक्षित धार्मिक आयोजन बन चुका है।

आधुनिक माध्यमों से बच्चों तक पहुंचा धर्म का संदेश

आज के डिजिटल दौर में जहां बच्चे और युवा स्क्रीन से जुड़े हैं, वहीं आयोजकों ने धर्म को उनकी भाषा में समझाने की कोशिश की। मेले में पारंपरिक वाणी और प्रवचन के साथ-साथ आधुनिक दृश्य माध्यमों, मॉडल्स और इंटरैक्टिव प्रदर्शनों का उपयोग किया गया।

इससे जिज्ञासु बच्चों को जैन दर्शन की बारीकियां बिना ऊब के समझने का अवसर मिला। आयोजकों का कहना है कि युवाओं की जिज्ञासा और तार्किक सोच के अनुरूप धर्म को प्रस्तुत करने से वे अपनी संस्कृति, परंपरा और जीवन मूल्यों को अधिक गहराई से अपनाते हैं।

श्रद्धालुओं में दिखा अपार उत्साह

मेले की भव्य सजावट, आकर्षक रोशनी और ज्ञानवर्धक प्रदर्शनी देखने आए श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा गया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर वर्ग के लिए यहां कुछ न कुछ था — बच्चों के लिए रोचक दृश्य, युवाओं के लिए विचारोत्तेजक प्रस्तुतियां और वरिष्ठजनों के लिए आध्यात्मिक सुख। स्थानीय समाज का कहना है कि इस तरह के आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि समुदाय की सामूहिक भागीदारी और एकता को भी बढ़ाते हैं।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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