अमेरिका ने फिलिस्तीनी अथॉरिटी प्रमुख महमूद अब्बास के वीजा आवेदन को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है। इस फैसले के चलते वे अगले सप्ताह न्यूयॉर्क में आयोजित होने जा रही संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के सत्र में सीधे तौर पर हिस्सा नहीं ले सकेंगे। अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से यह जानकारी फिलिस्तीनी प्रतिनिधिमंडल को औपचारिक रूप से दी गई।
लगातार दूसरे साल महासभा से रहेंगे गैरमौजूद
वीजा न मिलने के कारण अब्बास महासभा को व्यक्तिगत रूप से संबोधित नहीं कर पाएंगे। यह लगातार दूसरा साल है जब वे न्यूयॉर्क में आयोजित होने वाले इस बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच तक नहीं पहुंच पाएंगे। सूत्रों के अनुसार, फिलिस्तीनी प्रशासन अब्बास के भाषण को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या पूर्व-रिकॉर्डेड संदेश के माध्यम से प्रस्तुत करने की तैयारी में जुटा है।
मेजबान देश होने के नाते अमेरिका की जिम्मेदारी पर उठे सवाल
यह विवाद संयुक्त राष्ट्र के मेजबान देश के रूप में अमेरिका की भूमिका को लेकर भी बहस छेड़ दिया है। साल 1947 में हुए UN मुख्यालय समझौते के प्रावधानों के मुताबिक, वॉशिंगटन को संयुक्त राष्ट्र से जुड़े आधिकारिक कार्यों के लिए आने वाले विदेशी प्रतिनिधियों को प्रवेश में सहूलियत देनी होती है।
मगर अमेरिका का अपना रुख है। वॉशिंगटन का तर्क है कि उसके आंतरिक कानून तथा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे वीजा से संबंधित निर्णयों को प्रभावित कर सकते हैं। ज़िक्रयोग्य है कि ऐसे विवाद पहले भी अमेरिका और उन देशों के बीच रिश्तों में खटास पैदा कर चुके हैं, जिनके प्रतिनिधियों को UN बैठकों में शिरकत करनी होती है।
ऐसे वक्त में हुआ फैसला जब UN में गूंजेगा फिलिस्तीन का मुद्दा
अब्बास की गैरमौजूदगी उस दौर में हो रही है, जब संयुक्त राष्ट्र इजराइल-फिलिस्तीन टकराव, गाजा पट्टी में बिगड़ती मानवीय हालात, क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और फिलिस्तीन को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के प्रयासों पर गहन चर्चा की तैयारी कर रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम बैठक शुरू होने से ठीक पहले अमेरिका और फिलिस्तीनी नेतृत्व के बीच मौजूद खाई को और गहरा करेगा। फिलिस्तीनी अधिकारियों समेत कई आलोचकों का कहना है कि अब्बास को प्रवेश से रोकने से मान्यता-प्राप्त फिलिस्तीनी प्रतिनिधिमंडल की UN की कार्यवाही में बेहतर ढंग से भागीदारी करने की क्षमता पर असर पड़ेगा।
दूर से करेंगे संबोधन
न्यूयॉर्क न जा सकने के बावजूद अब्बास के जनरल असेंबली को रिमोट तरीके से संबोधित करने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, मौके पर मौजूद न होने का असर यह होगा कि वे बैठकों के दौरान सीधी बातचीत, द्विपक्षीय मुलाकातों और कूटनीतिक गतिविधियों से दूर रहेंगे।

























