बिहार की राजनीति में इन दिनों एक नए सियासी समीकरण की चर्चा जोर पकड़ रही है। एनडीए गठबंधन के भीतर सत्ता के शीर्ष पदों के बंटवारे को लेकर अंदरूनी बातचीत तेज हो गई है। हालिया मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो जनता दल यूनाइटेड (JDU) बिहार विधान परिषद के सभापति पद पर अपना दावा पेश कर रही है।
इस वक्त यह पद भाजपा के वरिष्ठ नेता अवधेश नारायण सिंह के पास है। हालांकि पद परिवर्तन को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि गठबंधन के अंदर इस मुद्दे पर सहमति बनने की कवायद चल रही है।
एनडीए में पदों के बंटवारे की पुरानी परंपरा
बिहार में भाजपा और जेडीयू के बीच दोनों सदनों के शीर्ष पदों को आपस में बांटने की लंबी परंपरा रही है। यह फॉर्मूला गठबंधन में संतुलन बनाए रखने और दोनों दलों के कार्यकर्ताओं की मनोबल को बरकरार रखने का हिस्सा माना जाता है।
मौजूदा दौर में विधानसभा अध्यक्ष का पद भाजपा के प्रेम कुमार के पास है, वहीं विधान परिषद सभापति की कुर्सी भी अवधेश नारायण सिंह के जरिए भाजपा के पास है। दूसरी ओर जेडीयू के नरेंद्र नारायण यादव विधानसभा के उपाध्यक्ष और रामवचन राय परिषद के उपसभापति बने हुए हैं। इस हिसाब से देखा जाए तो बड़े दोनों पद भाजपा के पास हैं, जिसके चलते जेडीयू की ओर से परिषद सभापति का दावा उठना स्वाभाविक माना जा रहा है।
रामवचन राय का नाम शीर्ष दौड़ में
अगर विधान परिषद सभापति के पद पर कोई बदलाव होता है, तो जेडीयू के वरिष्ठ नेता रामवचन राय की भूमिका सबसे अहम हो सकती है। फिलहाल वे परिषद के उपसभापति की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और सदन की कार्यवाही चलाने का अनुभव भी उनके पास है।
सूत्रों के मुताबिक, सभापति पद के लिए उनका नाम सबसे आगे माना जा रहा है। विधान परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उन्हें इस वक्त उपसभापति के तौर पर दर्ज किया गया है।
साहित्य और शिक्षा की दुनिया से जुड़ा रहा है सफर
रामवचन राय को सियासत के साथ-साथ साहित्य और शिक्षा की दुनिया में भी खूब सम्मान मिला है। वे पटना विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग से लंबे समय तक जुड़े रहे और प्रोफेसर के रूप में पढ़ाने के साथ-साथ विभाग के प्रमुख (HOD) की जिम्मेदारी भी निभाई।
बिहार विधान परिषद की आधिकारिक प्रोफाइल के अनुसार उनका जन्म 11 अक्टूबर 1943 को हुआ था और वे डॉक्टरेट धारक हैं। अपने लेखन और प्रभावी भाषण की वजह से वे सदन में एक अलग ही पहचान रखते हैं।
राजद से शुरुआत, फिर JDU में आए
रामवचन राय का राजनीतिक सफर सीधा-सपाट नहीं रहा है। वे सबसे पहले आरजेडी के जरिए बिहार विधान परिषद पहुंचे थे और वहां उन्होंने अपनी संसदीय कार्यशैली का लोहा मनवाया। बाद के दौर में वे जनता दल यूनाइटेड में शामिल हुए और गठबंधन की सरकार में उपसभापति बनने का मौका मिला। दोनों बड़े दलों में रह चुके होने के कारण अनुभव और सदन की बारीकियों के मामले में वे तजुर्बेकार चेहरे माने जाते हैं।


























