मोदी के जन्मदिन पर दीया विवाद, बिहार में सियासत गरमाई

राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने मीडियां से बातचीत के दौरान सवाल उठाते हुए कहा कि जिस देश में लोग महंगाई के बोझ तले दम तोड़ रहे हैं, बाढ़ से हजारों परिवार बेघर हो चुके हैं, ऐसे समय में करोड़ों रुपये का खर्च करके दीये जलाने की जरूरत क्या है? उन्होंने कड़े लहजे में पूछा, "प्रधानमंत्री कोई महापुरुष हैं, जिनके जन्मदिन पर दीये जलाए जाएं?"

मोदी कोई महापुरुष नहीं... दीया कार्यक्रम पर राजद विधायक भड़के

HIGHLIGHTS

  • दीये जलाने क्यों? पीएम मोदी पर भाई वीरेंद्र का तंज
  • करोड़ों का दीया, डूबता बिहार- वीरेंद्र के सवाल से हलचल
  • दीये का खर्च बाढ़ पीड़ितों की मदद में होता: वीरेंद्र
  • दीया नहीं देश की चिंता करें: राजद विधायक का प्रहार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर भाजपा की ओर से चलाए जा रहे ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम को लेकर बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक भाई वीरेंद्र ने इस कार्यक्रम पर तीखा प्रहार करते हुए सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल पर कड़े सवाल खड़े किए हैं।

उनका कहना है कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर दीये जलाने की औपचारिकता में जो राशि खर्च हो रही है, वही पैसा अगर बाढ़ से तबाह हुए परिवारों की मदद में लगाया जाता, तो ज्यादा सार्थक होता।

क्या है ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम?

दरअसल, भाजपा आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर देशभर में ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम आयोजित कर रही है। पार्टी ने कार्यकर्ताओं और लोगों से शाम 6 से 7 बजे के बीच अपने घरों में दीया जलाकर प्रधानमंत्री के स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए आशीर्वाद देने की अपील की है।

यह आयोजन पार्टी के ‘सेवा संकल्प अभियान’ का हिस्सा है, जो 17 अक्टूबर तक चलेगा। इस अभियान के तहत समाज सेवा से जुड़े कई कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है, लेकिन दीया जलाने की पहल को लेकर विपक्षी दलों ने पहले ही हंगामा खड़ा कर दिया है।

भाई वीरेंद्र का सीधा हमला

राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने मीडियां से बातचीत के दौरान सवाल उठाते हुए कहा कि जिस देश में लोग महंगाई के बोझ तले दम तोड़ रहे हैं, बाढ़ से हजारों परिवार बेघर हो चुके हैं, ऐसे समय में करोड़ों रुपये का खर्च करके दीये जलाने की जरूरत क्या है? उन्होंने कड़े लहजे में पूछा, “प्रधानमंत्री कोई महापुरुष हैं, जिनके जन्मदिन पर दीये जलाए जाएं?”

उन्होंने सरसों तेल समेत रोजमर्रा की जरूरी चीजों के बढ़ते दामों का हवाला देते हुए कहा कि जब आम परिवारों की थाली प्रभावित हो रही है, तब ऐसे प्रदर्शन त्योहारों जैसे आयोजन जनता की संवेदनशीलता के साथ खिलवाड़ जैसे हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है और कई जिलों के लोग राहत शिविरों में दिन गुजार रहे हैं।

‘पीएम को देश की नहीं, अपनी चिंता है’

भाई वीरेंद्र ने इस मौके पर केंद्र सरकार पर जोरदार वार साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जी को देश की समस्याओं से कोई मतलब नहीं है, उनकी चिंता सिर्फ अपनी छवि और अपने कार्यक्रमों को लेकर है। उन्होंने प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर भी तंज कसते हुए कहा कि विदेश दौरा करना तो उनका “धर्म” बन चुका है।

उन्होंने कहा कि लगता है पहले तो वे पूरी दुनिया का चक्कर लगाना चाहते हैं, ताकि उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हो जाए। उन्होंने कहा, “देश भले जहन्नुम में चला जाए, पहले हम पूरा विश्व भ्रमण कर लें”- यह सरकार की सोच दर्शाता है।

राजद विधायक ने आरोप लगाया कि महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी और बढ़ते अपराध जैसे गंभीर मुद्दों पर केंद्र सरकार मौन है। उनके मुताबिक, सत्ताधारी दल जनता की असली समस्याओं की बजाय ऐसे प्रतीकात्मक आयोजनों में ज्यादा दिलचस्पी रखती है।

स्कूलों में दीया जलाने की अपील पर भी उठाए सवाल

भाई वीरेंद्र ने कार्यक्रम के आयोजन की तरीके पर भी उंगली उठाई। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर स्कूलों में शिक्षकों और बच्चों से दीया जलाने को कहा जा रहा है, जबकि ब्लॉक स्तर पर भी सरकारी तंत्र का इस्तेमाल करके कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकारी संसाधन और अधिकारियों-कर्मचारियों का समय किसी राजनीतिक दल के कार्यक्रम के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है?

उनका कहना है कि इन आयोजनों पर खर्च हो रहे संसाधनों को जरूरतमंद लोगों, खासकर बाढ़ पीड़ितों की सहायता में लगाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब राज्य के लोग बाढ़ की विभीषिका झेल रहे हैं, उस वक्त ऐसे उत्सवों पर खर्च जनता के जुर्माने जैसा है।

जन्मदिन की बधाई देंगे, पर सवाल पूछते रहेंगे- भाई वीरेंद्र

इस दौरान भाई वीरेंद्र ने साफ किया कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं देने में कोई संकोच नहीं रखते, लेकिन सरकारी स्तर पर होने वाले आयोजनों की जमकर आलोचना करते रहेंगे।

उन्होंने देश के युवाओं से अपील की कि वे सिर्फ भाषणों और आयोजनों से मोहित होने की बजाय देश की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर गंभीरता से विचार करें।

उन्होंने कहा कि युवा वर्ग को बेरोजगारी, महंगाई और बाढ़ जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए और सरकार से इन पर जवाबदेही मांगनी चाहिए।

राजनीतिक गलियारों में गूंजी बहस

प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर भाजपा की ओर से निकाले गए इस कार्यक्रम को लेकर विपक्ष का यह रुख़ बिहार की सियासत में नई बहस की शुरुआत माना जा रहा है। जहां भाजपा इसे सेवा और संकल्प का पर्व बता रही है, वहीं राजद जैसे विपक्षी दल इसे सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और व्यक्तिपूजा का नमूना बता कर प्रहार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में ‘आशीर्वाद का दीया’ को लेकर दोनों पक्षों की तरफ से और तेज बयानबाजी होने की संभावना है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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