दिल्ली में आयोजित हुए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान सुरक्षा के मामले में ऐसी लापरवाही सामने आई है, जिसने पुलिस प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। दिल्ली पुलिस में तैनात एक कॉन्स्टेबल ने ड्यूटी के दौरान अत्याधुनिक हथियारों के साथ सोशल मीडिया के लिए रील बनाई, जो वायरल होने के बाद प्रशासन की नजर में आ गई। मामले की गंभीरता देखते हुए मुख्यालय ने आरोपी सिपाही को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है और उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
जाने पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस के नॉर्थ-वेस्ट डिस्ट्रिक्ट में तैनात कॉन्स्टेबल दीपक को ब्रिक्स समिट के मद्देनजर सुरक्षा ड्यूटी में लगाया गया था। इसी दौरान उसने अपने पास रखे हाई-टेक हथियारों को दिखाते हुए कई वीडियो शूट किए और उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर दिया।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इन वीडियोज में युवक न केवल सेंसिटिव हथियारों का प्रदर्शन कर रहा था, बल्कि लुटियन्स दिल्ली की हाईराइज बिल्डिंग्स से बैकग्राउंड दिखाते हुए सेल्फी और रील्स भी बनाई थीं। सवाल यह है कि जिस इलाके में दुनिया के बड़े नेता रुके हों और सुरक्षा चक्रव्यूह तना हो, वहां से वीडियो बनाना आसान कैसे हो गया?
वायरल वीडियो से उठने लगे गंभीर सवाल
बता दें कि जैसे ही ये वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हुए, लोगों के साथ-साथ सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ गए। इन वीडियोज से न केवल संवेदनशील लोकेशन का खुलासा हो रहा था, बल्कि यह भी जाहिर हो रहा था कि वीआईपी सुरक्षा में तैनात जवानों के हाथ में किस तरह के हथियार हैं।
खुफिया नजरिए से देखें तो ऐसे वीडियो किसी भी दुष्प्रेरित तत्व के लिए आसानी से इस्तेमाल किए जा सकते हैं। दुश्मन देशों की एजेंसियां या आतंकी संगठन इनसे वीआईपी सुरक्षा घेराबंदी, हथियारों की क्षमता और तैनाती के पैटर्न को समझ सकते हैं। इसी वजह से इस मामले को बेहद गंभीर नजरिए से देखा गया।
तत्काल कार्रवाई: सस्पेंड के साथ जांच शुरू
वीडियोज के वायरल होने के बाद दिल्ली पुलिस की शीर्ष कमान हरकत में आ गई। तत्काल कार्रवाई करते हुए कॉन्स्टेबल दीपक को सस्पेंड कर दिया गया और उनके खिलाफ विभागीय जांच बैठा दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जो जवान विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की सुरक्षा में तैनात होते हैं, उन्हें डिसिप्लिन के मामले में सबसे आगे रहना चाहिए। ऐसे में जिम्मेदारी के साथ खिलवाड़ को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
ब्रिक्स समिट के लिए खड़ा की गई थी सुरक्षा की दीवार
इस घटना पर सवाल इसलिए भी उठते हैं, क्योंकि ब्रिक्स समिट के लिए राजधानी में बेहद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था गढ़ी गई थी। जानकारी के मुताबिक, शिखर सम्मेलन को सकुशल संपन्न कराने के लिए दिल्ली में करीब 15,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था।
गृह मंत्रालय (MHA) ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की लगभग 200 कंपनियां दिल्ली पुलिस को सौंपी थीं। इन बलों को कानून-व्यवस्था कायम रखने और अन्य ऑपरेशनल जिम्मेदारियों के निर्वहन में लगाया गया था। साथ ही इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) समेत अन्य जुड़ी हुई एजेंसियों के साथ दिल्ली पुलिस ने बड़े पैमाने पर तालमेल बनाकर सभी बैठकों और कार्यक्रमों की सुरक्षा सुनिश्चित की थी।
सोशल मीडिया बना पुलिस डिसिप्लिन के लिए सिरदर्द
बता दें कि हाल के वर्षों में सोशल मीडिया पर यूनिफॉर्म पहनकर रील्स और वीडियो बनाने के ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं। कई राज्यों की पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने इसके खिलाफ सख्त निर्देश भी जारी किए हैं। यूनिफॉर्म, सरकारी हथियार और ड्यूटी लोकेशन का ऑनलाइन इस्तेमाल न सिर्फ विभाग की छवि पर असर डालता है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा भी पैदा करता है। दिल्ली पुलिस में भी समय-समय पर जवानों को इस संबंध में सतर्क रहने की सलाह दी जाती रही है।

























