दाऊद इब्राहिम की पुश्तैनी जमीन 35 साल बाद नीलाम

अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम (फाइल फोटो)

ऋषी तिवारी


Mumbai News: कुख्यात अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की रत्नागिरि स्थित पुश्तैनी जमीनों को लेकर लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हुआ है। केंद्र सरकार ने 5 मार्च को कराई गई नीलामी में इन चार बेशकीमती कृषि भूमियों के लिए सफल बोलीदाता मिल गए हैं। ये नीलामी ‘स्मगलर्स एंड फॉरेन एक्सचेंज मैनिपुलेटर्स (प्रॉपर्टी जब्ती) कानून’ (SAFEMA) के तहत की गई, जिससे 35 साल से अटकी इन संपत्तियों को बेचने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है।

कहां हैं ये जमीनें?

बता दें कि नीलाम हुई ये चारों जमीनें रत्नागिरी जिले के खेड तालुका के मुंबाके गांव में स्थित हैं, जिसे दाऊद इब्राहिम का पैतृक गांव माना जाता है। अधिकारियों के अनुसार, इनमें से कई जमीनें पहले दाऊद की मां अमीना बी के नाम दर्ज थीं। ये जमीनें कासकर परिवार की पुश्तैनी संपत्ति का हिस्सा रही हैं।

कौन है खरीदार और कितनी लगी बोली?

बता दें कि नीलामी में सबसे ऊंची बोली लगाने वाला व्यक्ति मुंबई का निवासी बताया जा रहा है, हालांकि अभी उसकी पहचान को सार्वजनिक नहीं किया गया है। नीलामी में सबसे ज्यादा चर्चा सर्वे नंबर 442 (हिस्सा 13-B) की रही, जिसकी रिजर्व कीमत करीब 9.41 लाख रुपये थी। इस प्लॉट के लिए मुंबई और रत्नागिरि के दो लोगों ने बोली लगाई और आखिरकार यह 10 लाख रुपये से अधिक में बिकी। वहीं, अन्य तीन जमीनें (सर्वे नंबर 533, 453 और 61) के लिए केवल एक ही बोलीदाता सामने आया।

अगली प्रक्रिया क्या है?

नियमों के मुताबिक, सफल बोलीदाता को अप्रैल 2026 की शुरुआत तक पूरी रकम जमा करानी होगी। इसके बाद संबंधित प्राधिकरण की अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही संपत्तियों के ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी होगी।

पहले क्यों नहीं बिक रही थीं?

जानकारी के मुताबिक, इन जमीनों को बेचने के पिछले कई प्रयास विफल रहे थे। नवंबर 2025 में रिजर्व प्राइस में 30% की कटौती के बावजूद कोई खरीदार नहीं आया था। सूत्रों का कहना है कि दाऊद और ‘डी-कंपनी’ से जुड़ा नाम होने के कारण लोग इनसे दूरी बनाए रहते थे। इसके अलावा, गांव में होना, केवल खेती के लिए उपयोग की शर्त और तत्काल कोई बड़ा आर्थिक लाभ न दिखना भी इसके पीछे के कारण थे।

कानूनी इतिहास और पिछली कोशिशें

ये जमीनें 1990 के दशक में 1993 के मुंबई ब्लास्ट और संगठित अपराध से जुड़े मामलों के बाद जब्त की गई थीं। इससे पहले 2017, 2020, 2024 और 2025 में भी नीलामी की कोशिशें की गई थीं, लेकिन हर बार कोई बोलीदाता नहीं आया था या प्रक्रिया अधूरी रह गई थी।

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इस मामले में दिल्ली के वकील अजय श्रीवास्तव का नाम भी सामने आता रहा है। उन्होंने 2001 में मुंबई के नागपाड़ा की दो यूनिट खरीदी थीं, लेकिन अभी तक कब्जा नहीं मिल पाया है और मामला हाईकोर्ट में चल रहा है। उन्होंने 2020 में दाऊद का पुश्तैनी बंगला और 2024 में एक प्लॉट (सर्वे नंबर 617) के लिए 2.01 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी, हालांकि भुगतान न होने के कारण वह डील रद्द हो गई थी।

Sandhya Samay News

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