UP News: समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ईद के मौके पर मीडिया से बातचीत करते हुए देशवासियों को बधाई देने के साथ ही कई बड़े सियासी हमले किए। उन्होंने उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति पर सरकार को घेरा और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान पर खुलकर समर्थन दिया।
ममता बनर्जी को लेकर बड़ा बयान
बता दें कि सीएम ममता बनर्जी द्वारा भाजपा के लिए ‘बेईमान’ शब्द का इस्तेमाल किए जाने पर अखिलेश यादव ने कहा कि ममता जी ने तो बहुत हल्का शब्द इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा के लिए इससे भी कड़े शब्द होने चाहिए थे। सपा प्रमुख ने ममता बनर्जी की सियासी ताकत को देखते हुए कहा कि वह अगर अकेले चुनाव मैदान में उतरें, तो भी जीत हासिल करेंगी। उन्होंने कहा, “ममता बनर्जी अकेले भी लड़ेंगी तब भी जीत जाएंगी।” इस तरह उन्होंने विपक्ष की एकजुटता का संदेश देने के साथ ही ममता के दमखम को रेखांकित किया।
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यूपी में कानून व्यवस्था पर तलवारी
बता दें कि अखिलेश यादव ने यूपी की कानून व्यवस्था को लेकर सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोई कानून व्यवस्था नहीं बची है। उन्होंने हाल ही में हुई तीन बड़ी घटनाओं का जिक्र किया, जिसमें वाराणसी में छात्र की गोली मारकर हत्या और गोरखपुर का मामला शामिल है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब शासन प्रशासन ही बेकार हो जाए, तो जनता कैसे सुरक्षित महसूस करेगी?
गंगा और शंकराचार्य के मुद्दे पर भाजपा को घेरा
बता दें कि पूर्व सीएम ने गंगा सफाई अभियान पर भी नुक्ता चीनी की। उन्होंने सवाल किया कि गंगा मैया के नाम पर राजनीति करने वालों ने आखिर नदी की सफाई के लिए क्या किया? अरबों-खरबों रुपये खर्च होने के बावजूद स्थिति वही है।
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इसके अलावा, शंकराचार्य के लखनऊ दौरे को लेकर भी उन्होंने भाजपा नेताओं पर कटाक्ष किया। अखिलेश ने कहा कि शंकराचार्य के आगमन से पहले बड़े-बड़े दावे करने वाले नेता उनके पहुंचने के बाद नजर ही नहीं आए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शायद कुछ लोग बाटी-चोखा खाने की सोच रहे थे, लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा।
क्या है 2027 का सियासी संदेश?
अखिलेश यादव के इन बयानों को 2027 के विधानसभा चुनाव के संदर्भ में बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ईद के मौके पर दिए गए इन बयानों से साफ है कि सपा प्रमुख ने अपनी स्ट्राइकिंग लाइन तय कर ली है। वह आने वाले समय में गंगा सफाई, कानून व्यवस्था और धार्मिक नेताओं के प्रति सरकार के रवैये को मुख्य मुद्दा बनाकर भाजपा का विरोध करेंगे।





















