उत्तर प्रदेश की राजनीति में शिक्षा और विकास के मुद्दे हमेशा से सबसे अहम रहे हैं। हाल ही में, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर एक ऐसा हमला किया, जिसने राज्य की सियासत में गर्माहट पैदा कर दी। मुख्यमंत्री योगी ने सपा के ‘डिजिटल युद्ध’ और ‘पुरानी नीतियों’ को एक करारा जवाब देते हुए साफ तौर पर कहा—”जिन लोगों के इशारे पर ये वीडियो बनाए जा रहे हैं, वह जर्जर और ढहते स्कूलों के भवन उन्हीं के कार्यकाल के स्मारक हैं।”
आइए समझते हैं कि आखिर स्कूलों की तस्वीरें और वीडियो साझा करने के मुद्दे पर सीएम योगी ने सपा पर इतनी तीखी प्रतिक्रिया क्यों दी और इसके पीछे की राजनीतिक रणनीति क्या है।
योगी का करारा जवाब
आज के दौर में सोशल मीडिया किसी भी सरकार की छवि बनाने या बिगाड़ने का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। पिछले कुछ समय से यूपी के कई जिलों से स्कूलों की जर्जर इमारतों, टूटी दीवारों और गंदगी के वीडियो वायरल हो रहे थे। विपक्ष का इरादा इन वीडियोज के जरिए राज्य सरकार की शिक्षा व्यवस्था को बदनाम करना था।
हालांकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस चक्रव्यूह को आसानी से तोड़ दिया। उन्होंने सीधे तौर पर विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर प्रमोट कर रहे हैं, उन्हें ये भी बताना चाहिए कि ये भवन किस कालखंड में बने थे। योगी का संदेश साफ था—2017 से पहले की सरकारों ने शिक्षा के बजट को परिवारवाद की भेंट चढ़ा दिया, जिसका परिणाम ये जर्जर स्कूल हैं।
ढहते स्कूलों से आधुनिक भवनों तक: यूपी की बदली तस्वीर
अपने संबोधन में सीएम योगी ने अपनी सरकार के कामकाज का लेखा-जोखा पेश किया। उन्होंने बताया कि कैसे भाजपा सरकार ने सत्ता संभालते ही ‘ओपरेशन कायाकल्प’ के तहत पूरे प्रदेश में स्कूलों का नक्शा ही बदल दिया। बुनियादी ढांचे का कायाकल्प पुराने, जर्जर और खतरनाक मकानों को गिराकर उनकी जगह पक्की, सुंदर और आधुनिक इमारतों का निर्माण किया गया।
नकल मुक्त परीक्षा प्रणाली सिर्फ भवन नहीं, शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर भी काम किया गया। पहले जहां नकल एक पहचान थी, वहीं अब नकल मुक्त और तकनीक आधारित परीक्षा व्यवस्था लागू की गई है। स्किल डेवलपमेंट पर जोर योगी ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत अब सिर्फ डिग्री देने पर जोर नहीं, बल्कि बच्चों के ‘स्केल और स्किल डेवलपमेंट’ पर ध्यान दिया जा रहा है, ताकि युवा रोजगार के लिए सक्षम बन सकें।
‘बबुआ’ की दिनचर्या पर तंज
इस मुद्दे पर सपा पर प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने अखिलेश यादव की दिनचर्या को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार में अधिकारी और मंत्री दिन में 18 घंटे तक काम करते हैं। हर पल योजनाओं की समीक्षा होती है और जमीन पर उसे उतारा जाता है।
उन्होंने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली सरकार में नेता दोपहर 12 बजे तक सोते थे, फिर 2 बजे तक तैयार होकर शाम को जिम जाने का समय निकालते थे। योगी ने पूछा—”ऐसे में प्रदेश और गरीबों के विकास के लिए उन्हें समय कहां से मिलता?” यह टिप्पणी सीधे सपा सरकार की ‘कार्य संस्कृति’ पर सवाल उठाती है।
गरीबों और बेटियों के मुद्दे पर सपा को घेरा
शिक्षा के मुद्दे को गरीबी और बेटियों की सुरक्षा से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री योगी ने सपा पर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सपा के एजेंडे में कभी गरीबी मुद्दा नहीं थी। मुख्यमंत्री योगी ने आरोप लगाया कि सपा के शासनकाल में गरीबों की जमीनों पर बेहिसाब कब्जे हुए।
उन्होंने कहा कि 2017 से पहले राज्य में बेटियां सुरक्षित नहीं थीं, लेकिन आज यूपी में अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो रही है। योगी ने बताया कि पहले गरीब बच्चे स्कूल जाने में सक्षम नहीं थे, लेकिन अब सरकार की ओर से उन्हें मुफ्त यूनिफॉर्म, जूते, मोजे, स्वेटर और बैग उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे गरीब बच्चों में शिक्षा के प्रति आत्मविश्वास आया है।


























