उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का बिगुल बजते ही प्रदेश की राजनीति में दल-बदल की हलचल तेज हो गई है। इसी बीच कानपुर से एक बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है। प्रदेश के जाने-माने ओबीसी चेहरे और उत्तर प्रदेश सरकार में छह बार मंत्री पद संभाल चुके प्रो. राम आसरे कुशवाहा ने भाजपा की सदस्यता छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए है। गुरुवार को उन्होंने सपा का सदस्यता पत्र लेकर अपनी राजनीतिक वापसी को आधिकारिक रूप दे दिया।
लगभग आठ साल बाद लौटे सपा में
यह वापसी इसलिए भी खास है कि करीब आठ साल पहले सपा ने ही उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया था। 2013 में तत्कालीन सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के इशारे पर तत्कालीन राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव ने प्रो. राम आसरे कुशवाहा को उनके पद से बर्खास्त किया था।
बताया जाता है कि कार्रवाई का मुख्य कारण उनके कुछ विवादित बयान थे। इतना ही नहीं, उन्हें सुदूर संवेदन उपयोग केंद्र, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष के पद से भी हटा दिया गया था, जिसे उस दौर में कैबिनेट मंत्री के दर्जे के बराबर माना जाता था।
पार्टी से निकाले जाने के बाद कुशवाहा ने भाजपा में जाकर नया राजनीतिक पनाह ढूंढा था। लेकिन चुनावी साल में उनका रुख फिर से बदल गया और अब वे अखिलेश यादव के नेतृत्व वाले गढ़ में वापस आ गए हैं।
बसपा से हुई थी राजनीतिक शुरुआत
प्रो. राम आसरे कुशवाहा का राजनीतिक सफर एक नहीं, कई पार्टियों से गुजरता हुआ चला है। इनकी पहचान प्रदेश के सबसे बड़े कुशवाहा नेताओं में होती है। साल 1996 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर कानपुर के सरसौल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और सपा प्रत्याशी जगराम सिंह को हराकर विधायक निर्वाचित हुए। इसी जीत ने उन्हें प्रदेश की मुख्य राजनीति में स्थापित किया।
कुशवाहा समाज में उनकी पकड़ लंबे समय से मानी जाती रही है। 1986 में वे कुशवाहा कल्याण परिषद के अध्यक्ष बने और तब से पिछड़ा वर्ग के अधिकारों और समाज के संगठन को लेकर सक्रिय रहे। सामाजिक क्षेत्र में उनकी पहचान बनाने में उत्तर प्रदेश कला मंच की अध्यक्षता भी अहम रही।
अखिलेश के नेतृत्व में दोहराया वादा
सपा में शामिल होने के बाद प्रो. कुशवाहा ने स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव को याद किया और कहा कि अब वे अखिलेश यादव के नेतृत्व में पार्टी को और मजबूत बनाने का संकल्प लिए हुए हैं। उनका कहना है कि समाजवादी विचारधारा से उनका नाता पुराना है और इसी विचार को आगे बढ़ाने के लिए वे फिर से संगठन में जमकर काम करेंगे।

























