Indian Stock Market: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने भारतीय शेयर बाजार में सोमवार (11 मई) को हाहाकार मचा दिया। ट्रंप द्वारा ईरान के शांति प्रस्ताव को ठुकराए जाने के बाद ग्लोबल मार्केट में जो हड़कंप मचा है, उसका सीधा असर दलाल स्ट्रीट पर भी दिख रहा है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आए तेज उबाल ने बाजार का सेंटिमेंट पूरी तरह बिगाड़ दिया है।
बाजार खुलते ही चारों तरफ बिकवाली दिखी और प्रमुख सूचकांक तेजी से नीचे की ओर फिसलते चले गए। सुबह के कारोबार की शुरुआत में ही निवेशकों के हजारों करोड़ रुपये पानी में बह गए।
सेंसेक्स में 800 अंकों की भारी गिरावट
सुबह जैसे ही बाजार खुला, BSE सेंसेक्स में भारी बिकवाली देखने को मिली। 30 शेयरों का सूचकांक सेंसेक्स करीब 0.89 फीसदी या 830.25 अंक की गिरावट के साथ 76,638.09 के स्तर पर आ गया। बता दें कि प्री-ओपनिंग में सुबह 9:10 बजे सेंसेक्स 690 अंकों की गिरावट पर था, लेकिन बाजार खुलने के बाद देखते ही देखते बिकवाली और बढ़ गई और सूचकांक और गहराई में धंस गया।
निफ्टी फिसला 24,000 के स्तर से नीचे
सेंसेक्स के साथ-साथ NSE निफ्टी 50 में भी भारी सेलिंग प्रेशर देखा गया। निफ्टी 1.02 फीसदी यानी 245.50 अंकों की करारी गिरावट के साथ 23,930.65 के स्तर पर पहुंच गया। मनोवैज्ञानिक स्तर 24,000 के नीचे आने से बाजार में घबराहत और बढ़ गई है।
बाजार में हाहाकार के क्या हैं कारण?
बाजार में आई इस भारी गिरावट के पीछे मुख्य रूप से दो ग्लोबल कारण हैं:
- ट्रंप का इनकार और मिडिल ईस्ट तनाव: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के शांति प्रस्ताव को खारिज कर देने से मिडिल ईस्ट में युद्ध की आशंका और तेज हो गई है। इससे ग्लोबल इन्वेस्टर्स में दहशत फैल गई है।
- कच्चे तेल में उबाल: मिडिल ईस्ट के बढ़ते तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की आपूर्ति पर खतरा बढ़ने से हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी आई है, जो भारी तेल आयातक देश भारत के लिए निराशाजनक संकेत है। तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई की आशंका बढ़ने से बाजार का सेंटिमेंट डूब गया।
अभी बाजार में चारों तरफ सेलिंग प्रेशर हावी है और निवेशक ग्लोबल संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट के तनाव और कच्चे तेल की चाल के बीच बाजार में उतार-चाव का दौर जारी रह सकता है।























