CII Annual Business Summit 2026: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) के बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अर्थव्यवस्था में आ रहे उथल-पुथल के बीच अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने एक बड़ा और सटीक संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि अब दुनिया ‘फ्लैट’ (समान और खुली) नहीं रह गई है, बल्कि ‘फ्रैक्चर्ड’ (बंटी हुई) हो चुकी है। ऐसे में किसी भी देश की असली ताकत अब केवल सैन्य बल नहीं, बल्कि उसकी ‘एनर्जी सिक्योरिटी’ और ‘डिजिटल सिक्योरिटी’ है।
गौतम अदाणी ये बातें नई दिल्ली में आयोजित हो रहे CII Annual Business Summit 2026 के स्पेशल प्लेनरी सेशन को संबोधित कर रहे थे। उद्योग जगत और बाजार की नजरें इस सेशन पर टिकी थीं, जहां अदाणी ने ग्लोबल इकोनॉमी, भारत@100 विजन और भविष्य की ग्रोथ स्ट्रैटेजी पर अपने विचार साझा किए।
‘फ्लैट वर्ल्ड’ का भ्रम टूटा
समिट में अपने शक्तिशाली भाषण के दौरान गौतम अदाणी ने कहा कि पिछले तीन दशकों तक दुनिया को यह बताया गया कि वह पूरी तरह ‘फ्लैट’ हो चुकी है। यह मान लिया गया था कि सप्लाई चेन हमेशा खुली रहेंगी, एनर्जी सप्लाई बिना किसी रुकावट के मिलता रहेगा, टेक्नोलॉजी की कोई सीमा नहीं होगी, पूंजी बिना रोक-टोक के दुनिया में घूमेगी और क्लाउड की कोई राष्ट्रीयता नहीं होगी।
हालांकि, अदाणी ने स्पष्ट कहा कि अब यह साफ हो गया है कि ये धारणाएं पूरी तरह सही नहीं थीं। वर्तमान समय में जो दुनिया उभर रही है, वह फ्लैट नहीं, बल्कि ‘फ्रैक्चर्ड’ यानी टूटी-बंटी हुई है।
बदल गए ताकत के पैमाने
अदाणी ने समझाया कि अब दुनिया का नजरिया बदल गया है। अब सप्लाई चेन केवल कमर्श के लिए नहीं, बल्कि ‘नेशनल सिक्योरिटी’ (राष्ट्रीय सुरक्षा) को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही हैं। एनर्जी फिर से ग्लोबल सुरक्षा चर्चाओं के सबसे केंद्र में आ गई है।
उन्होंने कहा, “सेमीकंडक्टर अब केवल टेक्नोलॉजी का हिस्सा नहीं रह गए हैं, बल्कि वे एक ‘स्ट्रैटजिक पावर’ (सामरिक शक्ति) बन चुके हैं। डेटा को अब नेशनल रिसोर्स (राष्ट्रीय संसाधन) की तरह देखा जा रहा है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) खुले में नहीं, बल्कि सुरक्षित डेटा सेंटर्स की दीवारों के पीछे विकसित की जा रही है।”
मिडिल ईस्ट संकट ने दिलाई बड़ी सीख
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और वहां इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए टार्गेटेड हमलों का हवाला देते हुए गौतम अदाणी ने कहा कि ये घटनाएं एक बात बिल्कुल साफ कर देती हैं कि एनर्जी सिक्योरिटी और डिजिटल सिक्योरिटी अब अलग-अलग विषय नहीं रहे।
उन्होंने निष्कर्ष दिया, कि आज एनर्जी सिक्योरिटी और डिजिटल सिक्योरिटी मिलकर किसी भी देश की ताकत की दो सबसे अहम नींव बन चुके हैं।
अदाणी का यह बयान उस समय आया है जब पूरी दुनिया भू-राजनीतिक तनावों से जूझ रही है और देश अपनी आत्मनिर्भरता और सुरक्षा पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं। यह संदेश भारत के भविष्य की रणनीति के लिए भी एक बड़ी दिशा तय करता है, जहां एनर्जी ट्रांजिशन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को अभूतपूर्व प्राथमिकता दी जा रही है।
























