एनसीपी के वरिष्ठ नेता शरद पवार की मैदान में वापसी से समीकरण बदले

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता शरद पवार (फाइल फोटो)

संध्या समय न्यूज


महाराष्ट्र में 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक समीकरणों में एक बड़ा बदलाव नजर आ रहा है। राज्य की सात सीटों को लेकर जहां पहले तगड़ा मुकाबला होने की उम्मीद थी, वहीं अब चर्चा तेज हो गई है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के वरिष्ठ नेता शरद पवार के चुनाव मैदान में उतरने के कारण सभी सीटें निर्विरोध हो सकती हैं। इस बीच, भाजपा ने भी अपने चार उम्मीदवारों के नामों का ऐलान करते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है।

क्या है निर्विरोध चुनाव की संभावना?

महाराष्ट्र की सात राज्यसभा सीटों के लिए मतदान 16 मार्च को होना है। मौजूदा संख्याबल के हिसाब से, महायुति (शासक गठबंधन) की 6 सीटें जीतना तय माना जा रहा था, जबकि महाविकास आघाड़ी (MVA) को एक सीट पर जीत मिलनी थी। हालांकि, अब खबर है कि अगर महाविकास आघाड़ी की ओर से सातवीं सीट के लिए शरद पवार को उम्मीदवार बनाया गया, तो बीजेपी चुनाव को निर्विरोध कराने के पक्ष में जा सकती है। विपक्ष के किसी अन्य नेता को टिकट मिलने की स्थिति में बीजेपी सातवीं सीट पर अपना उम्मीदवार उतारकर चुनाव करवा सकती है।

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भाजपा ने घोषित किए चार उम्मीदवार

भाजपा ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। पार्टी ने पूर्व मंत्री विनोद तावड़े, केंद्रीय मंत्री और आरपीआई (आठवले गुट) प्रमुख रामदास आठवले, हिंगोली के नेता रामराव वडकुते और नागपुर की माया इवनाते को टिकट दिया है। इसके अलावा, गठबंधन के समीकरण के तहत एक-एक सीट एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी को दी गई है।

सातवीं सीट के लिए शरद पवार का नाम प्रमुख

महाविकास आघाड़ी की ओर से जीतने वाली एकमात्र सीट के लिए शरद पवार का नाम लगभग तय माना जा रहा है। पहले कांग्रेस ने इस सीट की मांग की थी और बालासाहेब थोरात व पृथ्वीराज चव्हाण जैसे नेताओं के नाम पर चर्चा थी, लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि शरद पवार ही चुनाव लड़ेंगे।

वोटों का गणित और दांव-पेंच

राज्यसभा चुनाव में किसी भी उम्मीदवार की जीत के लिए पहली प्राथमिकता के 37 वोटों की आवश्यकता होती है। विधानसभा में महायुति के पास कुल 232 विधायकों का समर्थन है। इसमें शिंदे गुट के पास 20 अतिरिक्त वोट हैं, जबकि अजित पवार गुट के पास 3 वोट अतिरिक्त हैं।
गणित के हिसाब से, भाजपा और उसके सहयोगियों के पास वोटों का भंडार ऐसा है कि वे जरूरत पड़ने पर सातवीं सीट के लिए भी पूरा दबाव बना सकते हैं। लेकिन, शरद पवार जैसे वरिष्ठ नेता के आने से राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं और सभी पार्टियां बिना मतदान के सातों सीटें निर्विरोध दिलवाने पर सहमत हो सकती हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आखिरकार बीजेपी सातवीं सीट के लिए प्रत्याशी उतारती है या शरद पवार के सम्मान में चुनाव को निर्विरोध करने का फैसला लेती है।

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