UP News: उत्तर प्रदेश कैडर के 2022 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही का इस्तीफा प्रशासनिक हलकों में एक बड़े सवाल के रूप में उभरा है। एक ऐसे अफसर, जिसने गरीबी की कठिनाइयों को पार कर IAS की कुर्सी तक का सफर तय किया और अपनी ईमानदारी की दम पर 7 गोलियां भी खाईं, उन्होंने आखिरकार ‘बेकारी’ के शिकार होकर नौकरी छोड़ने का फैसला लिया है।
रिंकू सिंह राही का कहना है कि उन्हें वेतन तो मिल रहा था, लेकिन जनसेवा का अवसर नहीं मिल रहा था। लंबे समय से ना कोई ठोस पद मिल रहा था और ना ही कोई काम।
आटा चक्की से लेकर IAS तक का संघर्षपूर्ण सफर
बता दें कि रिंकू सिंह राही की कहानी किसी बॉलीवुड फिल्म से कम नहीं है। अलीगढ़ के एक साधारण परिवार में जन्मे रिंकू के पिता आटा चक्की चलाते थे। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। सरकारी स्कूल में पढ़ाई करने के बाद छात्रवृत्ति के सहारे उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। साल 2008 में उन्होंने पीसीएस (PCS) परीक्षा पास कर प्रशासनिक सेवा में कदम रखा।
हापुड़ में तैनाती के दौरान उन्हें आईएएस-पीसीएस कोचिंग केंद्र का निदेशक बनाया गया। यहीं से उन्होंने दोबारा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा की तैयारी की और 2021 में 683वीं रैंक हासिल कर आईएएस बनने का सपना पूरा किया।
83 करोड़ के घोटाले का पर्दाफाश, चेहरे पर उतरी 7 गोलियां
रिंकू सिंह राही की बहादुरी की कहानी साल 2009 की है, जब वे मुजफ्फरनगर में समाज कल्याण अधिकारी के रूप में तैनात थे। उन्होंने तब 83 करोड़ रुपये के एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया। इसके बाद भ्रष्ट तत्वों ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया, जिसमें उन्हें 7 गोलियां खाईं।
इस हमले से उनका चेहरा बुरी तरह से बिगड़ गया, लेकिन उनके हौसले नहीं पसरे। अलग-अलग जिलों में तबादलों के बावजूद उन्होंने पूरी निष्ठा से अपनी सेवाएं देते रहे।
वकीलों के सामने की थी ‘उठक-बैठक’, वायरल हुआ था वीडियो
कुछ महीने पहले ही रिंकू सिंह राही एक वजह से चर्चा में आए थे। शाहजहांपुर के पुवायां तहसील में एसडीएम के रूप में तैनाती के दौरान उन्होंने एक व्यक्ति को शौचालय के बाहर गंदगी फैलाते देखा और उसे दंड स्वरूप उठक-बैठक कराई। इस कार्रवाई से नाराज वकीलों ने विरोध शुरू कर दिया।
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स्थिति बिगड़ते देख राही खुद वकीलों के बीच पहुंचे, सार्वजनिक रूप से माफी मांगी और खुद उठक-बैठक की। उनका कहना था कि नियम सबके लिए बराबर हैं। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। लोगों ने उनके इस अंदाज की जमकर तारीफ की थी।
‘वेतन मिल रहा था, लेकिन काम नहीं था’
जिस अधिकारी ने कभी जान की बाजी लगाकर सिस्टम को साफ करने की कोशिश की हो, उसे आज सिस्टम खुद ‘बेकार’ कर रहा है। रिंकू ने अपने इस्तीफे की वजह बताते हुए कहा कि लंबे समय से उन्हें राजस्व परिषद (Board of Revenue) में अटैच रखा गया था। ना उन्हें कोई पोस्टिंग मिल रही थी, ना ही कोई काम। उन्होंने साफ कहा कि सिर्फ वेतन लेकर बैठे रहने का उनका इरादा नहीं था, वे जनसेवा करना चाहते थे, जिसका अवसर उन्हें नहीं मिल रहा था।
सवाल पर सवाल
रिंकू सिंह राही का इस्तीफा सिर्फ एक अफसर के इस्तीफे से ज्यादा है। यह प्रशासनिक व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि आखिर उन ईमानदार और कर्मठ अफसरों के साथ क्या व्यवहार किया जा रहा है, जो अपनी जान की बाजी लगाकर भ्रष्टाचार से लड़ते हैं। क्या सिस्टम में ईमानदारी की कोई कोई कीमत नहीं बची है? रिंकू के इस्तीफे ने तमाम युवा अफसरों और सरकार को एक सोचने पर मजबूर कर दिया है।




















