UP News: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में शिक्षा को सस्ता और सुलभ बनाने की दिशा में एक अनोखा और प्रेरणादायक नजारा देखने को मिला। यहां आयोजित एक विशेष ‘पुस्तक शिविर’ में कम कीमत वाली किताबें खरीदने के लिए छात्रों और अभिभावकों की इतनी भारी भीड़ उमड़ी कि माहौल एक पखवाड़े भर के ‘मिनी मेले’ से कम नहीं रहा। भीड़ को काबू करने के लिए प्रशासन को मैदान में उतारना पड़ा और पुलिस बल को तैनात करना पड़ा।
पीएम राजकीय इंटर कॉलेज में लगा पुस्तकों का ‘मिनी मेला’
बता दें कि शहर के पीएम राजकीय इंटर कॉलेज में माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से ‘पुस्तक जागरूकता एवं सुलभता शिविर’ का आयोजन किया गया। जो कि सुबह 10 बजे शुरू हुआ यह शिविर शाम 4 बजे तक चला। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों को यूपी बोर्ड के नए शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए एनसीईआरटी (NCERT) पाठ्यक्रम आधारित, अधिकृत और गुणवत्तापूर्ण पुस्तकों के प्रति जागरूक करना था।
भारी भीड़ के कारण चुनौती बनी व्यवस्था, पुलिस ने संभाला मोर्चा
जैसे ही शिविर के द्वार खुले, जिलेभर के स्कूलों से छात्रों का सैलाब उमड़ पड़ा। देखते ही देखते कॉलेज परिसर छात्रों और अभिभावकों से भरा चारों ओर लंबी कतारें लग गईं। भीड़ इतनी अधिक हो गई कि व्यवस्था चरमरा गई और अफरा-तफरी मच गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तुरंत पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया। पुलिसकर्मियों ने मोर्चा संभालते हुए लोगों को लाइन में लगवाया और किताबों की खरीदारी की प्रक्रिया को सुचारू बनाया।
सरकार की मंशा— हर छात्र तक पहुंचे सस्ती और बेहतर शिक्षा
इस ऐतिहासिक भीड़ पर प्रसन्नता जताते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) ओपी त्रिपाठी ने बताया कि सरकार की स्पष्ट मंशा है कि कोई भी छात्र महंगी किताबों के कारण पढ़ाई से वंचित न रहे। हर छात्र को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सामग्री उपलब्ध हो, इसी उद्देश्य से यह शिविर लगाया गया है। कॉलेज के प्रिंसिपल ने इस भारी भागीदारी को लोगों के शिक्षा के प्रति बढ़ते जागरूकता का लक्षण बताया। उन्होंने आश्वासन दिया कि आगे भी छात्रों की सुविधा के लिए इस तरह के शिविरों का आयोजन जारी रहेगा।
बाजार भाव से हाफ राहत, अभिभावकों ने जताया आभार
मैदानी स्तर पर इस शिविर ने अभिभावकों को आर्थिक राहत का गहरा एहसास कराया। अभिभावकों का कहना था कि खुले बाजार में निजी प्रकाशकों की किताबें आसमानछूले दामों पर मिलती हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई का बजट बिगड़ जाता है। वहीं, इस शिविर में बेहद कम कीमत पर असली और अच्छी क्वालिटी की किताबें मिलने से उनका बोझ काफी हल्का हुआ है। छात्रों ने भी खुशी जताई कि अब उन्हें महंगी किताबों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और सरकारी तौर पर उन्हें सही सामग्री आसानी से मिल रही है।



















