UP News: भारत के राजपत्र संविधान अनुसूचित जनजाति आदेश संशोधन अधिनियम-2002 के तहत बलिया जिले में निवास करने वाली गोंड जाति को अनुसूचित जनजाति (ST) के रूप में मान्यता मिलने के बावजूद जाति प्रमाण पत्र जारी न होने को लेकर गोंड समुदाय का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।
इसी क्रम में ऑल गोंडवाना स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आगसा) के बैनर तले बांसडीह तहसील परिसर में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना शुक्रवार को 18वें दिन भी जारी रहा। धरना प्रदर्शन संपूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर भी नहीं रुका और आंदोलनकारी समुदाय ने अपनी मांगों को अधिकारियों के समक्ष पुनः रखा।
शासनादेश के अनुपालन की मांग
धरना कर रहे गोंड छात्र-नौजवानों का कहना है कि उत्तर प्रदेश शासन के समाज कल्याण अनुभाग-3, लखनऊ द्वारा 3 नवंबर 2021 को जारी शासनादेश में गोंड जाति को अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र जारी करने हेतु स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं, लेकिन इसका पालन स्थानीय स्तर पर नहीं किया जा रहा है।
आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि तहसील प्रशासन द्वारा ऑनलाइन आवेदन बार-बार निरस्त किए जा रहे हैं, जिससे समुदाय के लोगों को जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
परीक्षा आवेदन की समय सीमा को लेकर चिंता
धरना स्थल पर मौजूद युवाओं ने बताया कि यूपी टेट परीक्षा के आवेदन की अंतिम तिथि 26 अप्रैल 2026 है। यदि समय रहते जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ, तो वे परीक्षा में आवेदन करने से वंचित रह जाएंगे।
प्रदर्शनकारियों ने इसे अपने भविष्य के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम है। गोंड समुदाय के लोगों ने तहसील प्रशासन पर शासनादेश की अवहेलना और समुदाय के उत्पीड़न का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बार-बार आवेदन निरस्त किए जाने से लोगों में भारी आक्रोश है।



















