सेक्टर-33ए स्थित नोएडा हाट में आयोजित सरस आजीविका मेला 2025 लोगों के बीच लगातार लोकप्रिय हो रहा है। मेले में हर दिन खरीदारों की संख्या बढ़ रही है। रविवार को मेले का 10वां दिन रहा और दूसरे रविवार को बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचे। खासकर महिलाओं और युवतियों ने हस्तनिर्मित उत्पादों, साड़ियों और अन्य ग्रामीण उत्पादों की जमकर खरीदारी की।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित और राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (NIRDPR) के सहयोग से आयोजित इस मेले में ग्रामीण भारत की कला, संस्कृति और पारंपरिक हस्तशिल्प को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जा रहा है।
बनारसी साड़ी से तसर सिल्क तक, इन उत्पादों की रही मांग
सरस आजीविका मेला 2025 में देश के अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पाद लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। उत्तर प्रदेश की बनारसी साड़ी, गुजरात का भारत गुंथन और पैचवर्क, झारखंड की तसर सिल्क और कॉटन साड़ी समेत कई उत्पादों की खूब खरीदारी हो रही है।
मेले में विभिन्न राज्यों के हथकरघा, साड़ी और ड्रेस मटेरियल की बड़ी रेंज उपलब्ध है। इनमें आंध्र प्रदेश की कलमकारी, असम का मेखला चादर, बिहार की कॉटन और सिल्क साड़ी, छत्तीसगढ़ की कोसा साड़ी, मध्य प्रदेश के चंदेरी और बाग प्रिंट, मेघालय के इरी उत्पाद, ओडिशा की तसर और बांधा साड़ी, तमिलनाडु की कांचीपुरम साड़ी और तेलंगाना की पोचमपुरी साड़ी प्रमुख हैं।
इसके अलावा उत्तराखंड के पश्मीना, कथा और बाटिक प्रिंट तथा पश्चिम बंगाल के तांत और बालुचरी सहित विभिन्न पारंपरिक उत्पाद भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।

इंडिया फूड कोर्ट में 20 राज्यों के स्वाद का आनंद
मेले का इंडिया फूड कोर्ट भी लोगों के बीच खासा लोकप्रिय है। यहां देशभर के 20 राज्यों की करीब 80 उद्यमी महिलाओं ने अपने-अपने प्रदेश के प्रसिद्ध क्षेत्रीय व्यंजनों के स्टॉल लगाए हैं।
इन स्टॉल पर अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही देशभर से आईं 400 से अधिक लखपति दीदियां भी मेले का प्रमुख आकर्षण हैं।
400 से अधिक महिला शिल्प कलाकार ले रही हैं हिस्सा
नोएडा में पांचवीं बार आयोजित हो रहे सरस आजीविका मेला 2025 का शुभारंभ 21 फरवरी 2025 को हुआ था। यह आयोजन 10 मार्च 2025 तक सेक्टर-33ए स्थित नोएडा हाट में आयोजित किया जा रहा है।
मेले में देशभर से 400 से अधिक महिला शिल्प कलाकार हिस्सा ले रही हैं। ये महिलाएं पारंपरिक हस्तकला, ग्रामीण संस्कृति और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। मेले में 85 से अधिक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।
इस बार मेले की थीम परंपरा, कला एवं संस्कृति के मनोरम माहौल के साथ लखपति स्वयं सहायता समूह (SHG) दीदियों की निर्यात क्षमता का विकास है।
निखिता गांधी के गीतों पर झूमे दर्शक
सरस आजीविका मेले में खरीदारी के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। दूसरे रविवार को इंडियन प्लेबैक सिंगर निखिता गांधी ने अपनी प्रस्तुति से समां बांध दिया।
निखिता गांधी के लोकप्रिय गीत ‘नाच मेरी रानी’, ‘डू यू लव मी’ और ‘बरबादियां’ पर दर्शक झूमते नजर आए। वहीं हमारा शिक्षालय फाउंडेशन के कलाकारों ने ट्रैफिक नियमों पर शानदार प्रस्तुति दी।
इसके अलावा नटराजंजलि डांस एकेडमी के कलाकारों ने सेमी-क्लासिकल डांस की मनमोहक प्रस्तुति देकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
सुरक्षा और सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान
मेले में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। इसके साथ ही आगंतुकों और महिला शिल्पकारों की सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
दीदियों के हस्तनिर्मित उत्पादों की बेहतर बिक्री और मार्केटिंग क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय और NIRDPR की ओर से समय-समय पर सत्र एवं कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है।
इन गतिविधियों में NIRDPR के सहायक निदेशक चिरंजीलाल कटारिया, शोध अधिकारी सुधीर कुमार सिंह और सुरेश प्रसाद समेत पूरी टीम सक्रियता से जुटी हुई है।
सरस आजीविका मेला 2025 ग्रामीण भारत की कला, संस्कृति, खान-पान और महिला उद्यमिता को एक मंच पर लाने वाला प्रमुख आयोजन बनकर उभर रहा है। मेले में बढ़ती भीड़ इस बात का संकेत है कि लोगों के बीच स्थानीय और पारंपरिक उत्पादों के प्रति रुचि लगातार बढ़ रही है।

























