ऋषी तिवारी
सेक्टर 62 स्थित प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान आईएमएस नोएडा (IMS Noida) में कॉर्पोरेट कनेक्ट कार्यक्रम के अंतर्गत बृहस्पतिवार को ‘ब्रांड प्रतिबद्धता’ (Brand Commitment) विषय पर एक महत्वपूर्ण विशेषज्ञ सत्र का आयोजन किया गया। यह सत्र विशेष रूप से एमबीए के विद्यार्थियों के लिए आयोजित किया गया, जिसमें ब्रांड प्रबंधन के व्यावहारिक पहलुओं और व्यावसायिक नैतिकता पर गहन चर्चा की गई।
मुख्य वक्ता ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता जे. के. सीमेंट के पूर्व प्रसिडेंट हरदीप सिंह रहे। अपने दशकों के व्यावसायिक अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने कहा, “किसी भी संगठन के लिए ब्रांड प्रॉमिस केवल एक मार्केटिंग स्लोगन नहीं, बल्कि ग्राहकों से किया गया दीर्घकालिक वचन होता है।” उन्होंने समझाया कि बदलते बाजार परिवेश, प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता अपेक्षाओं के बीच ब्रांड प्रॉमिस को बनाए रखना वास्तव में एक “ट्रिकी अफेयर” (जटिल मामला) है, जिसमें सफलता के लिए रणनीतिक सोच और नैतिक व्यावसायिक मूल्यों को अपनाना अनिवार्य है।
संस्थान के अध्यक्ष ने नैतिक मूल्यों पर दिया जोर
इस अवसर पर आईएमएस नोएडा के प्रेसिडेंट राजीव कुमार गुप्ता ने कहा कि आज के वैश्विक और प्रतिस्पर्धी व्यावसायिक परिवेश में ब्रांड प्रतिबद्धता केवल विपणन की रणनीति नहीं, बल्कि संस्थागत संस्कृति और नैतिक मूल्यों का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने छात्रों को समझाया कि किसी भी ब्रांड की वास्तविक शक्ति उसकी विश्वसनीयता, पारदर्शिता और ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण में निहित होती है।
ब्रांड सिर्फ नाम नहीं, वादों का प्रतिबिंब: डीन
संस्थान की डीन प्रोफेसर (डॉ.) नीलम सक्सेना ने कहा कि तीव्र प्रतिस्पर्धी वातावरण में ब्रांड प्रतिबद्धता जैसे समकालीन विषयों पर चर्चा अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा, “ब्रांड केवल एक नाम या प्रतीक नहीं होता, बल्कि वह संस्था के मूल्यों और ग्राहकों से किए गए वादों का प्रतिबिंब होता है।”
स्पोकन फेस्ट में ‘द मेहता बॉयज़’ को मिला जबरदस्त अपलॉज़
छात्रों ने किया सक्रिय प्रतिभाग
एमबीए के प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर प्रोफेसर राहुल पाण्डेय ने बताया कि सत्र के दौरान विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए ब्रांड पोजिशनिंग, कस्टमर ट्रस्ट, तथा मार्केट डिफरेंशिएशन जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षण को उद्योग जगत के वास्तविक अनुभवों से जोड़ना तथा विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करना था, जिसमें यह सत्र सफल रहा।
























