Kharge lashes out at PM: देशभर में लगातार हो रहे पेपर लीक मामलों और छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शनों के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की घोषणा किए जाने के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। केंद्र सरकार के इस फैसले को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार के इस कदम को युवाओं को भरमाने की एक और कोशिश करार देते हुए साफ तौर पर कहा कि देश के युवाओं को अब खोखले भाषणों या छोटे-मोटे ऐलानों की बजाय ठोस और सटीक फैसलों की जरूरत है।
पीएम मोदी का ऐलान क्या था?
गौरतलब है कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा में धांधली और पेपर लीक के मामलों को लेकर एक बयान जारी किया था। उन्होंने साफ कहा था कि भारत के युवाओं का भविष्य और उनकी रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पेपर लीक करने वालों और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। इसके लिए उन्होंने दोषियों को जल्द से जल्द और कड़ी सजा दिलाने के मकसद से फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के निर्देश दिए थे। हालांकि, विपक्ष ने इस ऐलान को अपना रंग देने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
खरगे का पलटवार
प्रधानमंत्री के इस ऐलान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक लंबा बयान जारी किया। उन्होंने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री से सवाल पूछते हुए लिखा कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में देश की शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर हुई है। खरगे ने कहा कि जब परीक्षाओं की नींव ही खोखली हो जाए, तब ऊपर से फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसे ऐलान करने से कुछ नहीं होगा। उन्होंने सरकार से ऐसी नीतियों की मांग की जो यथार्थ में युवाओं के भविष्य को सुरक्षित कर सकें, न कि सिर्फ चुनावी रणनीति के तहत बयानबाजी हो।
‘एसी कमरों से बाहर निकलें पीएम
मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने बयान में सरकार पर युवाओं को कुचलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “आपने ही सबसे ज्यादा युवाओं पर लाठीचार्ज कराया, पेलेट गन का इस्तेमाल किया और शॉक बैटन से हमला कराया।” कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा कि सरकार का रवैया ऐसा है जैसे ये घायल और प्रदर्शन कर रहे छात्र इस देश के अपने बच्चे ही नहीं हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से अपील करते हुए कहा कि वे वातानुकूलित (AC) कमरों से बाहर निकलें और सड़कों पर उन युवाओं की आंखों में देखें, जो अपने अधिकारों और भविष्य की लड़ाई लड़ रहे हैं।
शिक्षा व्यवस्था पर ‘आरएसएस कब्जा’ और बढ़ती बेरोजगारी का संकट
अपने बयान के अंतिम चरण में मल्लिकार्जुन खरगे ने शिक्षा नीति पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि आज देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था पर आरएसएस (RSS) का गहरा कब्जा हो गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के स्तर को गिराकर सिर्फ एजेंडे को आगे बढ़ाया जा रहा है। साथ ही, उन्होंने बेरोजगारी के आंकड़े पेश करते हुए सरकार को घेरा। खरगे ने कहा, “पीएलएफएस (PLFS) के आंकड़े खुद बयां कर रहे हैं कि देश में युवा बेरोजगारी दर 29 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।”
उन्होंने आगे समझाया कि निजी क्षेत्र में नौकरियां सिमट रही हैं, सरकारी नौकरियां बहुत कम आ रही हैं और पक्की नौकरियों की जगह ‘संविदा’ (कॉन्ट्रैक्ट) पर रखने का चलन तेजी से बढ़ा है। ऐसे में युवाओं के सामने भविष्य को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने बयान का अंत एक बेहद करारा सवाल के साथ किया। उन्होंने पूछा कि जब रोजगार के अवसर सूख रहे हैं, जब परीक्षाएं लीक हो रही हैं और जब शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं, तो युवा आखिर अपना भविष्य मांगने कहां जाए? अगर सड़कों पर उतरेंगे तो लाठियां खाएंगे और चुप रहेंगे तो उनके साथ खिलवाड़ होता रहेगा। खरगे का इस बयान से संदेश साफ है कि विपक्ष पेपर लीक मुद्दे को अब 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद भी संसद और सड़कों पर गर्माए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है और सरकार को इस मामले में जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी।

























