मुंबई की बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) अपने स्वास्थ्य ढांचे को अधुनिक और रोगी-अनुकूल बनाने के एक महत्वाकांक्षी कदम की तैयारी में है। देश के सबसे व्यस्त महानगरों में शुमार मुंबई के सरकारी अस्पतालों में भीड़ को नियंत्रित करना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए अब ‘एक मरीज-एक परिजन’ नीति लागू करने का प्लान तैयार किया गया है। इसके साथ ही, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए नायर अस्पताल में एक अत्याधुनिक ट्रॉमा सेंटर को भी मरीजों की सुविधा के लिए शुरू कर दिया गया है। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
‘एक मरीज-एक परिजन’ नियम: अनावश्यक भीड़ पर लगाम
मुंबई की महापौर रितु तावड़े ने शहर के सरकारी अस्पतालों में बिगड़ती व्यवस्था को देखते हुए एक सकारात्मक पहल की है। उन्होंने बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े को एक आधिकारिक पत्र लिखकर अस्पतालों के वार्ड में सिर्फ एक अटेंडेंट को रहने की इजाजत देने वाले नियम को लागू करने का सुझाव दिया है।
यह नियम क्यों जरूरी था?
मुंबई जैसे मेट्रो शहर में केंद्रीय और उपनगरीय अस्पतालों में हर दिन हजारों मरीज आते हैं। वार्ड में एक मरीज के साथ 3-4 परिजनों का जमा होना आम बात है। इससे न सिर्फ अस्पताल में शोर और अफरातफरी बढ़ती है, बल्कि संक्रमण के खतरे भी कई गुना बढ़ जाते हैं। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को इस भीड़ के बीच काम करने में भारी परेशानी होती है, जो सीधा इलाज पर असर डालता है।
कैसे काम करेगा यह सिस्टम?
इस प्रस्ताव के तहत, प्रायोगिक आधार पर शुरुआत में तीन प्रमुख अस्पतालों—केईएम, सायन और नायर में यह व्यवस्था लागू की जाएगी। हर उस मरीज के लिए जिसकी भर्ती होगी, सिर्फ एक परिजन को वार्ड में बैठने की पास दी जाएगी। इसके लिए अस्पताल के मुख्य द्वार पर एक डिजिटल या टोकन आधारित ‘विजिटर पास मैनेजमेंट सिस्टम’ स्थापित किया जा सकता है। इससे मरीजों को शांत वातावरण मिलेगा और डॉक्टरों को इलाज में आसानी होगी।
अब मिलेगी विश्वस्तरीय ट्रॉमा केयर सुविधा
भीड़ नियंत्रण के साथ-साथ बीएमसी ने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर दिया है। इसका बड़ा उदाहरण मुंबई सेंट्रल स्थित बीएमसी द्वारा संचालित नायर अस्पताल में शुरू किया गया नया ‘आपातकालीन चिकित्सा सेवा (EMS) और ट्रॉमा परिसर’ है।
यह नया ट्रॉमा सेंटर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) की सभी गुणवत्ता मानकों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। हालांकि, इसका औपचारिक उद्घाटन समारोह राष्ट्रीय शोक के चलते स्थगित कर दिया गया था, लेकिन मरीजों की जान और स्वास्थ्य से जुड़ी तात्कालिक जरूरतों को देखते हुए अधिकारियों ने सेवाओं को तुरंत शुरू करने का फैसला लिया।
पहले चरण में क्या-क्या शुरू हुआ?
इस नए ब्लॉक में फिलहाल सबसे जरूरी विभागों को सक्रिय कर दिया गया है। इसमें दुर्घटना विभाग, ट्रायेज वार्ड (जहां मरीजों की गंभीरता जांची जाती है), बाल रोग विभाग, अस्थि रोग (ऑर्थोपेडिक्स), सर्जरी और माइनर ऑपरेशन थिएटर शामिल हैं।
‘गोल्डन ऑवर’ पर विशेष ध्यान
दुर्घटना में घायल लोगों के लिए पहले एक घंटा यानी ‘गोल्डन ऑवर’ बेहद क्रिटिकल होता है। अगर इस एक घंटे के अंदर सही इलाज शुरू हो जाए, तो जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इसी को ध्यान में रखकर नए ट्रॉमा सेंटर में 8 बिस्तरों वाला एक खास EMS वार्ड बनाया गया है। इसके अलावा, तुरंत एक्स-रे करने के लिए अलग से एक्स-रे कक्ष और जहरीले पदार्थों या रसायनों से प्रभावित मरीजों को साफ करने के लिए ‘डीकंटैमिनेशन रूम’ की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

दि. १३ जुलै २०२६
बृहन्मुंबई महानगरपालिका संचालित व मुंबई सेंट्रल स्थित बा. य. ल. नायर धर्मादाय रुग्णालयातील अत्याधुनिक आणि नवनिर्मित अशा ‘अपघात आणि आपत्कालीन वैद्यकीय सेवा विभाग संकुल आजपासून कार्यान्वित करण्यात आले आहे.
विरोधी पक्षनेता श्रीमती किशोरी पेडणेकर, समाजवादी पक्ष… pic.twitter.com/HW3dJ8Q7ab
— Ritu Tawde (@TawdeRitu) July 13, 2026
दूसरे चरण की तैयारी
वर्तमान में जो सुविधाएं शुरू हुई हैं, वह किसी भी इमरजेंसी को संभालने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। जल्द ही इसके दूसरे चरण में आपातकालीन डायग्नोस्टिक सेवाओं (जैसे- तेज ब्लड टेस्ट, एडवांस्ड स्कैनिंग आदि) को भी शामिल किया जाएगा।
महापौर रितु तावड़े और विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने इस नए ट्रॉमा सेंटर का निरीक्षण कर इंफ्रास्ट्रक्चर की तारीफ की है। एक तरफ जहां ‘एक मरीज-एक परिजन’ नियम अस्पतालों के अंदर के माहौल को स्वच्छ, शांत और संक्रमण-रहित बनाएगा, वहीं नायर अस्पताल का यह नया ट्रॉमा सेंटर गंभीर दुर्घटना पीड़ितों को गुणवत्तापूर्ण और तेज इलाज प्रदान करेगा।























