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बांकीपुर उपचुनाव:प्रशांत किशोर के सामने भाजपा ने उतारा सबसे गरीब उम्मीदवार

बांकीपुर उपचुनाव को लेकर भाजपा ने शुरुआत में अभिषेक कुमार उर्फ बंटी को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया था। हालांकि, नामांकन प्रक्रिया के अंतिम चरण में एक अचानक राजनीतिक उलटफेर हुआ। अभिषेक कुमार ने अपना नाम वापस ले लिया।

70 हजार वाले गरीब ने दी 46 करोड़ को टक्कर

HIGHLIGHTS

  • पैसे नहीं, गरीबी दिखाकर बांकीपुर में भाजपा ने लगाई बाजी
  • जानिए बांकीपुर से भाजपा के सबसे गरीब उम्मीदवार की संपत्ति
  • 12 साल में ग्रेजुएट, अब करोड़पति PK से लड़ेंगे चुनाव
  • जेब में सिर्फ 70 हजार, फिर भी PK को टक्कर
  • गरीब नीरज ने बांकीपुर में करोड़पति PK को दी टक्कर

Bihar Bankipur by-election: बिहार की राजधानी पटना स्थित बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव इन दिनों राज्य और देश के राजनीतिक गलियारों में सबसे गर्म चर्चा का विषय बना हुआ है। किसी विधानसभा सीट के खाली होने और उस पर होने वाले उपचुनाव को आमतौर पर एक नियमित प्रक्रिया माना जाता है, लेकिन बांकीपुर का मामला इससे बिल्कुल अलग है। भाजपा के लिए यह सीट केवल विधानसभा में अपने विधायकों की संख्या बढ़ाने का सवाल नहीं है, बल्कि यह पार्टी की राजनीतिक साख और उसके पारंपरिक सियासी गढ़ को बचाए रखने की कड़ी परीक्षा है। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।

टिकट में आया अचानक बदलाव और नीरज की एंट्री

बांकीपुर उपचुनाव को लेकर भाजपा ने शुरुआत में अभिषेक कुमार उर्फ बंटी को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया था। हालांकि, नामांकन प्रक्रिया के अंतिम चरण में एक अचानक राजनीतिक उलटफेर हुआ। अभिषेक कुमार ने अपना नाम वापस ले लिया और महज कुछ ही घंटों के भीतर पार्टी ने नीरज कुमार सिन्हा को नया चेहरा बनाकर मैदान में उतार दिया। इस अचानक बदलाव ने सियासी हलचल तेज कर दी, लेकिन जब नीरज सिन्हा का शपथ पत्र सामने आया, तो हर कोई हैरान रह गया।

70 हजार रुपये की नकदी वाले सबसे ‘गरीब’ उम्मीदवार

चुनावी मैदान में करोड़पति और अरबपति नेताओं का दबदबा होता है, लेकिन नीरज कुमार सिन्हा इस परंपरा को तोड़ते हुए नजर आ रहे हैं। शपथ पत्र के अनुसार, नीरज कुल मिलाकर 12.18 लाख रुपये की चल संपत्ति और 8 लाख रुपये की अचल संपत्ति के मालिक हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस बड़े शहरी सीट से चुनाव लड़ रहे भाजपा प्रत्याशी के पास महज 70,000 रुपये (सत्तर हजार) नकदी हैं। आम नेताओं के विपरीत, नीरज सिन्हा के पास ना कोई अपनी निजी गाड़ी है, ना ही कोई लाइसेंसी हथियार। इतना ही नहीं, उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला भी दर्ज नहीं है, जो उन्हें एक साफ-सुथरी छवि वाले ‘आम आदमी’ के नेता के रूप में स्थापित करता है।

प्रशांत किशोर और नीरज सिन्हा में संपत्ति का अंतर

यदि हम इस सीट पर उतरे दो प्रमुख उम्मीदवारों—प्रशांत किशोर और नीरज सिन्हा के शपथ पत्रों की तुलना करें, तो यह अंतर किसी आसमान और जमीन के बीच का फासला जैसा लगता है। जहां नीरज सिन्हा कुछ लाखों की संपत्ति के साथ मैदान में हैं, वहीं प्रशांत किशोर इस उपचुनाव के सबसे अमीर उम्मीदवार हैं।
प्रशांत किशोर ने अपने शपथ पत्र में 22 करोड़ 19 लाख रुपये की चल संपत्ति और 23 करोड़ 87 लाख रुपये की अचल संपत्ति का ब्यौरा दिया है। यानी कुल मिलाकर प्रशांत किशोर के पास 46 करोड़ से अधिक की संपत्ति है। करोड़ों के मालिक प्रशांत किशोर के सामने भाजपा का यह ‘सादगी का पुतला’ नजर आ रहा है, जिसे पार्टी ने जनता के बीच जमीनी स्तर के नेता के तौर पर प्रोजेक्ट करने की कोशिश की है।

पढ़ाई में भी रहा लंबा पॉज

नीरज सिन्हा के शपथ पत्र में उनकी शैक्षणिक योग्यता भी काफी दिलचस्प है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा के तौर पर मैट्रिक (10वीं) की परीक्षा साल 2012 में पास की थी। इसके बाद उन्होंने ग्रेजुएशन (स्नातक) की डिग्री हासिल की, लेकिन इसमें उन्हें कुल 12 लंबे साल लग गए। नीरज ने वर्ष 2024 में अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है। हालांकि, राजनीति और समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय रहने वाले युवाओं के लिए शिक्षा में इस तरह के अंतराल को आम बात माना जाता है।

बांकीपुर में ‘कायस्थ’ कार्ड और भाजपा की रणनीति

बांकीपुर विधानसभा सीट को भाजपा का सबसे मजबूत किला माना जाता है। यहां की राजनीतिक परिदृश्य में जातीय समीकरण का अहम रोल रहता है। बांकीपुर में कायस्थ जाति की आबादी सबसे अधिक है और यह वोट बैंक पारंपरिक रूप से भाजपा का गढ़ माना जाता है। जब से नितिन नवीन (जो स्वयं कायस्थ समुदाय से आते हैं) का यहां से जाना तय हुआ, भाजपा को लगा कि इस खाली स्थान को भरने के लिए एक ऐसा चेहरा चाहिए, जो इस जातिगत वोट बैंक को एकजुट रख सके।

प्रशांत किशोर भी कायस्थ समुदाय से ही आते हैं और उनके उतरने से भाजपा को इस वोट बैंक में सीधा खतरा महसूस हुआ। इसी वजह से भाजपा ने रणनीतिक रूप से कायस्थ नेता नीरज कुमार सिन्हा पर भरोसा जताया है। पार्टी का मानना है कि नीरज की सादगी भरी जिंदगी और जातीय समीकरण मिलकर प्रशांत किशोर की रणनीतिक और आर्थिक ताकत को चुनौती दे सकते हैं।

Sandhya Samay News

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