बिहार के युवाओं के लिए पलायन हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। रोजगार की तलाश में लाखों युवा अपने घर को छोड़कर दूसरे राज्यों का रुख करते हैं, जहां उनके लिए बेहतर अवसर की उम्मीद जगी होती है। लेकिन इस कहानी में एक नया बदलाव देखने को मिला है, जो न सिर्फ बिहार के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, बल्कि यह साबित करता है कि मेहनत, सही योजना और सरकार की मदद से कोई भी सफलता के शिखर को छू सकता है। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
पलायन की मजबूरी
बिहार का भागलपुर शहर अपने युवा वर्ग के पलायन के लिए जाना जाता है। अधिकतर युवा रोजगार की तलाश में बड़े शहरों का रुख करते हैं, जहां उन्हें कम वेतन में भी काम मिल जाता है। नन्दिकेश भी अपने शुरुआती दिनों में इसी मजबूरी का शिकार थे। मुंबई में वे महीने में सिर्फ 15 हजार रुपये की सैलरी पर सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते थे। यह जीवन बहुत संघर्षपूर्ण था, मगर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
कोरोना महामारी और लॉकडाउन के दौरान उनका जीवन पूरी तरह से बदल गया। जब देशभर में लॉकडाउन लगा, तो वे अपने परिवार के साथ भागलपुर लौट आए। उस समय उनके पास अपने भविष्य को लेकर बहुत ही सीमित आशाएँ थीं। लेकिन उन्होंने ठाना कि अब वे फिर से नौकरी के पीछे नहीं भागेंगे, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होकर आत्मनिर्भर बनने का रास्ता खोजेंगे।
सफलता का सपना और सरकारी मदद
नन्दिकेश की इस नई शुरुआत को मजबूत करने में केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना’ (PMEGP) का बड़ा योगदान रहा। इस योजना के तहत उन्हें 25 लाख रुपये का लोन स्वीकृत हुआ, जिससे उन्होंने अपने उद्योग की शुरुआत की। साथ ही बिहार सरकार ने भी उनके उद्यम को बढ़ावा देने के लिए बियाड़ा औद्योगिक क्षेत्र में जमीन दी।
इस तरह से उन्होंने अपनी बैग निर्माण इकाई स्थापित की और अपने सपने को साकार किया। उनका यह कदम न सिर्फ उनके जीवन में बदलाव लेकर आया, बल्कि उनके जैसे कई युवाओं के लिए भी एक मिसाल बन गया है कि सही दिशा और सरकार की सहायता से कोई भी अपना भाग्य बदल सकता है।
नन्दिकेश की फैक्ट्री में शुरू से ही उत्पाद की गुणवत्ता और विविधता पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्होंने स्कूल बैग, ऑफिस बैग और ट्रैवल बैग जैसे उत्पाद बनाने के साथ ही अपने खास ‘डिजिटल बैग’ को भी लॉन्च किया। यह बैग आधुनिक तकनीक का उपयोग करके तैयार किया गया है, जिसमें इन-बिल्ट मोबाइल चार्जिंग पोर्ट और पावर बैंक कनेक्शन की सुविधा दी गई है।
इस खास बैग के जरिए उपयोगकर्ता अपने स्मार्टफोन को बिना चार्जर निकाले आसानी से चार्ज कर सकते हैं। अभी तक यह प्रोटोटाइप के रूप में ही बाजार में आया है, लेकिन इसकी प्री-बुकिंग और ऑर्डर तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे यह साफ है कि यह उत्पाद बाजार में अपनी जगह बनाने में सक्षम है।
रोजगार सृजन और समाज के प्रति जिम्मेदारी
उनकी सफलता का एक बड़ा हिस्सा उनके समाज के प्रति भी जिम्मेदारी है। नन्दिकेश ने अपने उद्यम के माध्यम से 15 से 20 प्रवासियों को रोजगार दिया है। ये वे लोग हैं, जो पहले दिल्ली, मुंबई और सूरत जैसे शहरों में मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे।
अब वे अपने ही शहर भागलपुर में काम कर खुशहाल जीवन बिता रहे हैं। नन्दिकेश का मानना है कि मेहनत और सही अवसर से कोई भी अपने जीवन में बदलाव ला सकता है। उन्होंने अपने जीवन की कहानी से यह साबित कर दिया है कि अगर युवा सही दिशा में कदम बढ़ाएं, तो सफलता दूर नहीं है।
नन्दिकेश का अगला कदम अपने व्यवसाय का विस्तार करना है। वह बियाड़ा क्षेत्र में अपनी फैक्ट्री को और अधिक विकसित करना चाहते हैं ताकि अधिक युवाओं को रोजगार मिल सके। उनका सपना है कि बिहार के और भी युवा, जो पलायन की मजबूरी में फंसे हैं, उन्हें वापस बुलाकर रोजगार उपलब्ध कराएं। उनके इस प्रयास से न सिर्फ बिहार के युवाओं का आत्मसम्मान बढ़ेगा, बल्कि राज्य की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। उनकी कहानी पूरे बिहार के युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी है।























