टेनिस जगत के सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट यानी विंबलडन 2026 का रोमांच अब समाप्ति की ओर है। ऑल इंग्लैंड क्लब के सेंटर कोर्ट पर रविवार, 12 जुलाई को देखने को मिला एक ऐसा रोमांचक मुकाबला, जिसे टेनिस प्रेमी लंबे समय तक याद रखेंगे। विश्व के नंबर एक खिलाड़ी और मौजूदा चैंपियन जैनिक सिनर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपना ताज सफलतापूर्वक बचा लिया। उन्होंने फाइनल मुकाबले में फ्रेंच ओपन के चैंपियन रहे एलेक्जेंडर ज्वेरेव को कड़े संघर्ष के बाद परास्त किया।
एक दमदार मुकाबले की कहानी
यह फाइनल मुकाबला किसी एकतरफा प्रदर्शन से दूर था। पहले सेट में तो दोनों खिलाड़ियों ने एक-दूसरे को कोई मौका नहीं दिया और यह सेट टाई-ब्रेक तक पहुंचा। इस टाई-ब्रेक में जर्मन खिलाड़ी ने बेहतरीन तंत्र दिखाते हुए 7-7 से अपने नाम किया। इस हार के साथ ही सिनर का ज्वेरेव के खिलाफ लगातार 14 सेट जीतने का शानदार रिकॉर्ड टूट गया।
हालांकि, 24 वर्षीय इतालवी खिलाड़ी के हौसले कुछ ऐसे थे कि वह इस झटके से उबर गए। दूसरे सेट में भी मैच टाई-ब्रेक तक गया, लेकिन इस बार सिनर ने अपने अनुभव और धैर्य का परिचय देते हुए इसे अपनी झोली में डाला। इसके बाद मैच का पूरा रुख ही बदल गया। सिनर ने तीसरे और चौथे सेट में जबरदस्त एग्रेशन दिखाते हुए क्रमशः 6-3 और 6-4 से जीत दर्ज की।
पूरे टूर्नामेंट में 3 घंटे 46 मिनट तक चले इस दमदार मुकाबले में सिनर ने ज्वेरेव को 6-7(7), 7-6, 6-3, 6-4 से मात दी। यह जीत उनके करियर की पांचवीं ग्रैंड स्लैम ट्रॉफी है और वह ज्वेरेव के खिलाफ लगातार 10वीं बार विजयी रहे। 29 वर्षीय ज्वेरेव का लगातार दूसरा बड़ा खिताब जीतने का सपना एक बार फिर अधूरा रह गया।
‘हर ग्रैंड स्लैम की अपनी अलग कहानी होती है’
मैच के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिनर ने अपनी इस जीत को बेहद खास बताया। उन्होंने कहा, “मेरे ख्याल से हर ग्रैंड स्लैम की अपनी एक अलग ही कहानी होती है। माहौल बदलता है, टूर्नामेंट शुरू होने से पहले की भावनाएं अलग होती हैं। पेरिस (फ्रेंच ओपन) के बाद से यहां तक पहुंचना मेरे लिए काफी कठिन चुनौती थी, बिल्कुल वैसे ही जैसे पिछला साल मुश्किल था।”
उन्होंने आगे कहा, “मैंने यहां आकर सिर्फ इसी पर ध्यान दिया कि खुद को बेहतरीन स्थिति में कैसे लाया जाए ताकि मैच का पूरा मुकाबला किया जा सके। इस मुकाबले तक पहुंचने के लिए मैंने अपना बहुत सारा समय, दिन-रात एक कर दिए और सब कुछ दांव पर लगा दिया। यह उपलब्धि मेरे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और आज का दिन बेहद शानदार रहा।”
लिंडा नोस्कोवा ने चेक गणराज्य को दिलाई बड़ी सफलता
विंबलडन 2026 का खिताब सिर्फ पुरुष वर्ग तक सीमित नहीं रहा। महिला एकल फाइनल में चेक गणराज्य की 21 वर्षीय युवा टेनिस सनसनी लिंडा नोस्कोवा ने शानदार खेल दिखाया। उन्होंने अपनी ही देश की बड़ी खिलाड़ी कैरोलिना मुचोवा को 6-2, 5-7, 6-3 से हराकर अपने करियर का पहला ग्रैंड स्लैम खिताब अपने नाम किया।
नोस्कोवा की इस जीत ने इतिहास के पन्ने भी पलट दिए हैं। वह वर्ष 2011 में पेट्रा क्वितोवा (जो भी 21 साल की उम्र में चैंपियन बनी थीं) के बाद विंबलडन की सबसे कम उम्र की विजेता बनी हैं। इसके अलावा, साल 2003 के बाद यह पहला मौका है जब एक ही कैलेंडर वर्ष में 21 साल या उससे कम उम्र के दो अलग-अलग खिलाड़ियों ने रोलैंड गैरोस और विंबलडन दोनों का खिताब अपने नाम किया है। इससे पहले इस साल 19 साल की मीरा एंड्रीवा ने फ्रेंच ओपन का खिताब जीता था।
























