ठाणे जिले के कल्याण पश्चिम स्थित घोलपनगर इलाके में एक दर्दनाक हादसा होते-होते टल गया। यहां एक चार मंजिला जर्जर इमारत को गिराने के दौरान तैयारी और सुरक्षा व्यवस्था में भारी चूक सामने आई। इमारत का एक विशाल हिस्सा अनियंत्रित तरीके से सड़क की तरफ धराशायी हो गया। हालांकि, इस भयानक घटना में किसी भी तरह की जनहानि नहीं हुई, लेकिन घटना ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल बना दिया है। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
कैसे तैयारी के बीच ढह गई ‘विनायक दर्शन’ इमारत?
पूरा मामला कल्याण पश्चिम के घोलपनगर इलाके में स्थित ‘विनायक दर्शन’ नामक इमारत का है। यह इमारत काफी समय से जर्जर हालत में थी और इसे री-डेवलपमेंट (पुनर्विकास) परियोजना के तहत नष्ट किया जा रहा था। रविवार को दोपहर करीब 2:05 बजे जब विध्वंसकर्मी (Demolition team) इमारत को चरणबद्ध तरीके से गिराने में जुटे हुए थे, तभी अचानक एक तेज आवाज के साथ इमारत का बड़ा हिस्सा नीचे की ओर आ गिरा।
कुछ ही पलों में चार मंजिला संरचना मलबे का एक विशाल पहाड़ बनकर बदल गई। सबसे डरावनी बात यह थी कि यह मलबा सीधा मुख्य सड़क पर गिरा। इस दौरान इमारत के मलबे और सीमेंट के कणों से इतना विशाल गुबार उठा कि आसपास की कई इमारतें और सड़कें धूल की एक मोटी चादर से ढक गईं। कुछ मिनटों तक इलाके में कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था।
दहशत और अफरा-तफरी का माहौल
इमारत गिरने की तेज आवाज को सुनकर आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने शुरू में इसे भूकंप या किसी बम धमाके से जोड़कर देखा। डर के मारे आस-पास के मकानों में रहने वाले लोग बाहर की ओर भागने लगे। कई परिवारों ने एहतियातन अपने बच्चों और बुजुर्गों को लेकर तुरंत खुले और सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन किया। घटना का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा सकता है कि किस तरह धूल के बादल के बीच लोग अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे हैं।
जैसे-जैसे धूल उतरी, लोगों का गुस्सा सामने आने लगा। स्थानीय निवासियों ने ठेकेदार और बिल्डर पर गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इमारत गिराने से पहले मुख्य सड़क को पूरी तरह सील नहीं किया गया था। न तो कोई सुरक्षा बैरिकेडिंग लगाई गई थी और न ही धूल को कंट्रोल करने के लिए पानी का छिड़काव किया जा रहा था।

सबसे बड़ी बात यह है कि यदि उस समय सड़क पर दोपहर के समय की तरह वाहनों की आवाजाही होती या कोई राहगीर निकल रहा होता, तो यह हादसा निश्चित रूप से एक बड़ी जनहानि का कारण बनता। लोगों का मानना है कि यह कोई ढहने वाली इमारत नहीं थी, बल्कि यह ठेकेदार की लापरवाही और तकनीकी अधूलता का नतीजा है।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और राहत की बात
हादसे की सूचना मिलते ही मौके पर कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) की टीम और स्थानीय पुलिस बल तत्काल पहुंच गई। पुलिस ने तुरंत आसपास का इलाका खाली करवाया और राहगीरों को वैकल्पिक मार्गों से निकलने की सलाह दी।
अधिकारियों ने बताया कि इस हादसे में जनहानि इसलिए नहीं हुई क्योंकि ‘विनायक दर्शन’ इमारत को गिराने से काफी पहले ही सभी निवासियों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट कर दिया गया था। इमारत पूरी तरह से खाली थी, जिसके चलते कोई भी व्यक्ति मलबे में नहीं फंसा। वहीं, सड़क पर भी उस वक्त ट्रैफिक कम होने के कारण बड़ा हादसा टल गया।
इस घटना ने कल्याण सहित पूरे मुंबई महानगरीय क्षेत्र में चल रहे री-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों और विपक्षी नेताओं ने प्रशासन से सख्त मांग उठाई है कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।























