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15 जुलाई को दिल्ली एमसीडी चुनाव: आखिर किसका पलड़ा होगा भारी?

कुल 12 जोन में से 10 जोन में मतदान होना निश्चित है, लेकिन दो जोन में बिना मतदान के ही परिणाम साफ हो गया है। दरअसल, जोन अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करने के लिए किसी एक दल के पास कम से कम तीन पार्षदों का समर्थन होना अनिवार्य है।

रोहिणी और सिटी SP जोन: भाजपा या आप पार्टी किसकी जीत?

HIGHLIGHTS

  • 8 जोन में भाजपा भारी, बाकी में आप पार्टी का जोर?
  • क्रॉस वोटिंग से पलटेगा दिल्ली एमसीडी का खेल?
  • बिना वोट पड़े तय हुआ 2 जोन का राजनीतिक खेल
  • आप पार्टी के बागियों से भाजपा को मिलेगा ये बड़ा फायदा?
  • कांग्रेस के ये वोट दिल्ली एमसीडी में किसके पक्ष में पड़ेंगे?

Delhi News: दिल्ली में नगर निकायी राजनीति एक बार फिर से गर्मा गई है। दिल्ली नगर निगम (MCD) की 12 वार्ड कमेटियों के चुनाव की तिथि 15 जुलाई तय की गई है। चुनाव नजदीक होने के कारण निगम में सत्ता संभाल रही भाजपा और मुख्य विपक्षी दल आप पार्टी के बीच जमीनी स्तर पर कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। वार्ड कमेटियों का चुनाव स्थानीय स्तर पर विकास और संसाधनों के बंटवारे को तय करता है, जिस कारण दोनों दल इसमें कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

दो जोन में पहले ही तय हो गया खेल

कुल 12 जोन में से 10 जोन में मतदान होना निश्चित है, लेकिन दो जोन में बिना मतदान के ही परिणाम साफ हो गया है। दरअसल, जोन अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करने के लिए किसी एक दल के पास कम से कम तीन पार्षदों का समर्थन होना अनिवार्य है।

  • करोल बाग जोन: यहां भाजपा के पास मात्र दो पार्षद ही बचे हैं, जिस कारण वे अपना उम्मीदवार खड़ा नहीं कर सकी। नतीजतन, आप पार्टी ने बिना किसी विरोध के अपने प्रत्याशी को जीत दर्ज करा लिया।
  • केशव पुरम जोन: यहां बिल्कुल उलटी स्थिति है। इस जोन में आप पार्टी के पास सिर्फ दो ही पार्षद मौजूद हैं, जबकि भाजपा ने आसानी से अपने उम्मीदवारों का नामांकन करा दिया है।

चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, यदि मतदान शुरू होने से एक मिनट पहले भी कोई उम्मीदवार अपना नाम वापस ले लेता है, तो वहां वोटिंग रद्द हो सकती है। हालांकि, वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए ऐसा होने की संभावना बेहद कम है। इसके अलावा, 6 जोन में जोन अध्यक्षों के साथ-साथ स्थायी समिति के सदस्यों के चुनाव भी 15 जुलाई को ही होंगे।

आठ जोन में भाजपा का पुख्ता दबदबा

यदि बाकी बचे 10 जोनों के राजनीतिक समीकरणों पर नजर डालें, तो 8 जोनों में भाजपा की स्थिति बेहद मजबूत नजर आ रही है। पिछले चुनावों के आंकड़ों को देखें तो भाजपा ने 8 जोनों पर अपनी पकड़ बनाई हुई थी, जबकि आप पार्टी को सिर्फ 4 जोनों में सफलता मिली थी।

लेकिन इस बार इस गणित में बड़ा बदलाव आया है। हाल ही में इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी (IVP) के 16 पार्षदों का भाजपा में विलय होने से भाजपा की नाव काफी भारी हो गई है। इस विलय का सीधा फायदा भाजपा को रोहिणी और पश्चिमी जोन में मिलता दिख रहा है, जहां पहले दोनों दलों के पार्षदों की संख्या लगभग बराबर थी।

भाजपा के मजबूत क्षेत्र (8 जोन)

  • दक्षिणी जोन
  • सिविल लाइन जोन
  • केशव पुरम जोन
  • नरेला जोन
  • मध्य जोन
  • नजफगढ़ जोन
  • शाहदरा उत्तरी जोन
  • शाहदरा दक्षिणी जोन

जाने रोहिणी और दक्षिणी जोन में क्या

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही दक्षिणी जोन में भाजपा और आप पार्टी के पार्षदों की तादाद बराबर है, लेकिन यहां कांग्रेस के दो पार्षदों की ‘क्रॉस-वोटिंग’ अहम भूमिका निभाएगी। यदि कांग्रेस के पार्षद किसी एक पक्ष को समर्थन दे दें, तो तस्वीर बदल सकती है। हालांकि, दिल्ली और केंद्र दोनों जगह भाजपा की सरकार होने के कारण भाजपा पार्षदों के बगावत करने या क्रॉस-वोटिंग करने की गुंजाइश लगभग न के बराबर है। इसलिए अगर कोई भी बागी वोट पड़ा, तो वह ज्यादातर भाजपा के पक्ष में ही जाने की संभावना है।

‘बागी’ नेताओं ने बिगाड़ा आप पार्टी का खेल

इन सबके बीच सबसे रोचक मुकाबला सिटी एसपी (City SP) जोन में देखने को मिल सकता है। यहां आप पार्टी के अंदरूनी कलह सामने आई है। आप के बागी विधायक और पूर्व डिप्टी मेयर आले मुहम्मद इकबाल ने चांदनी महल वार्ड के उपचुनाव में पार्टी विरोधी रुख अपनाया था और अपने प्रत्याशी इमरान को खड़ा किया था।

आले इकबाल और उनके पिता शोएब इकबाल का इस इलाके में गहरा प्रभाव है। आप की जोन अध्यक्ष पद की उम्मीदवार किरण वाला के साथ आले इकबाल की पुरानी राजनीतिक अदावत रही है। ऐसे में आले खेमे के प्रभाव में आकर आम आदमी पार्टी के एक या दो पार्षदों के क्रॉस-वोटिंग करने की चर्चा है, जिससे भाजपा को अप्रत्याशित फायदा हो सकता है। इमरान चौधरी (आले के समर्थित पार्षद) के भाजपा को समर्थन देने की स्थितियों को लेकर आप पार्टी नेतृत्व भी सचेत है।

आप पार्टी के मजबूत क्षेत्र:

  • करोल बाग जोन (निर्विरोध जीत)
  • पश्चिमी जोन (West Zone)

फ्लॉप जोन (किसी भी ओर जा सकते हैं परिणाम):

  •  रोहिणी जोन
  • सिटी एसपी जोन

दोनों दलों के दावे

इस चुनावी महायुद्ध से पहले दोनों पक्ष अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं।

भाजपा का रुख: दिल्ली के मेयर प्रवेश वाही ने बेहद आत्मविश्वास से कहा कि भाजपा ने 11 वार्डों में अपने उम्मीदवार उतारे हैं और सभी जगह जीत की पूरी उम्मीद है। उन्होंने स्पष्ट किया कि IVP के 16 पार्षदों के विलय से न केवल निगम में बहुमत मजबूत हुआ है, बल्कि वार्ड कमेटी के चुनावों में भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।

आप पार्टी का रुख: निगम में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने भाजपा के दावों को खारिज करते हुए कहा कि करोलबाग में तो उनकी जीत निर्विरोध है। उन्होंने दावा किया कि सिटी एसपी, रोहिणी और दक्षिणी जोन पहले से उनके पक्ष में हैं और बाकी बचे सात जोनों में भी पार्टी प्रबल स्थिति में है। अंकुश नारंग ने शोएब इकबाल और आले इकबाल पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे चांदनी महल के पार्षद इमरान चौधरी के जरिए भाजपा को अपना वोट दिला सकते हैं।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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