Delhi News: डिजिटल वर्ल्ड के आगमन के साथ ही जीवन के हर पहलू में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिले हैं। अब समय की मांग है कि हम पारंपरिक पुस्तकों और ज्ञान के स्रोतों के साथ-साथ डिजिटल नेटवर्क का भी सदुपयोग करें। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में नई पीढ़ी के लिए एक अत्याधुनिक डिजिटल और हाई-टेक पुस्तकालय का उद्घाटन किया है। यह लाइब्रेरी न केवल ज्ञान का भंडार है, बल्कि युवाओं के भविष्य का निर्माण करने वाला एक महत्वपूर्ण केंद्र भी है। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
दिल्ली में डिजिटल लाइब्रेरी का उद्घाटन और इसकी विशेषताएँ
अमित शाह ने इस अवसर पर अपने भाषण में कहा कि देश का भविष्य सिर्फ कृषि, उद्योग या बाजार पर निर्भर नहीं है, बल्कि यह उस भीड़ पर निर्भर करता है जो पुस्तकों और ज्ञान के मंदिरों में जुटती है। उन्होंने जोर दिया कि पुस्तकालय युवाओं का मस्तिष्क का केंद्र होते हैं, जहां से राष्ट्र की ऊर्जा और नवाचार का संचार होता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे पुस्तकालय से जुड़ें, पढ़ें और अपने विवेक का विकास करें। उनके अनुसार, पढ़ने की आदत से ही अच्छा निर्णय लेने और संस्कृति, स्वाभिमान को समझने का मार्ग प्रशस्त होता है।
अमित शाह ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस तरह उनके जीवन में पुस्तकालय का योगदान रहा है। उनके बचपन का कस्बाई जीवन याद कर उन्होंने कहा कि वहां एक समृद्ध पुस्तकालय था, जिसने उनके जीवन को दिशा दी। उन्होंने बताया कि ‘अलादिन और जादुई चिराग’, ‘अलीबाबा और चालीस चोर’, ‘सिंदबाद की यात्रा’ जैसी कहानियों ने उनकी कल्पना और सोच को समृद्ध किया। यह पुस्तकों का प्रभाव था कि वे वेदों और उपनिषदों तक पहुंच गए।
शिक्षा और युवा जागरूकता का केंद्र
यह पुस्तकालय युवाओं के ज्ञान और चिंतन का नया केंद्र बनने के साथ ही देश की आत्मा और संस्कृति का वाहक भी है। अमित शाह ने दिल्ली सरकार से आग्रह किया कि सभी पुस्तकालयों को आपस में लिंक किया जाए और स्कूलों से इन संसाधनों को जोड़ा जाए ताकि छात्रों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि जब युवा पढ़ने की आदत बना लेंगे, तो वे अपने और देश के भविष्य को संवार सकेंगे।
अमित शाह ने अपने भाषण में स्वतंत्रता संग्राम के महानायक और समाज सुधारक जयप्रकाश नारायण (जेपी) को याद किया। उन्होंने कहा कि जेपी एक विचारक और क्रांतिकारी थे, जिन्होंने जीवन में अनेक विचारधाराएँ अपनाई और राष्ट्र-निर्माण में अपना योगदान दिया। जेपी का आंदोलन न सिर्फ भारत के स्वतंत्रता संग्राम में बल्कि समाज में बदलाव लाने के लिए भी प्रेरणा स्रोत रहा है।
जेपी ने भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की और बाद में समाजवाद को अपनाते हुए समाजवादी कांग्रेस की स्थापना की। उन्होंने गांव-गांव में भूदान आंदोलन फैलाया और सर्वोदय विचारधारा का प्रचार किया। उनके योगदान में चंबल क्षेत्र में डाकुओं का सरेंडर कराना और प्रदेशों में सामाजिक शांति स्थापित करना भी शामिल है।
अमित शाह ने कहा कि जेपी का नारा—”देश प्रधानमंत्री से नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों से बनता है”—आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे जयप्रकाश नारायण के विचारों और आदर्शों को अपनाएं और देश को 2047 तक आत्मनिर्भर बनाने में अपना योगदान दें।
लाइब्रेरी की तकनीकी विशेषताएँ और संसाधन
जयप्रकाश नारायण पुस्तकालय में 30,000 से अधिक पुस्तकों का संग्रह है। इसमें शोध कार्य, अध्ययन, और सामान्य ज्ञान के लिए संसाधनों की भरमार है। यहाँ रिसर्च के लिए अलग व्यवस्था, बहुउद्देश्यीय सभागार, रीडिंग एरिया, और बच्चों के लिए विशेष ‘किड्स जोन’ भी है।
इसके अलावा, आधुनिक ई-लाइब्रेरी अनुभाग में ऑनलाइन सदस्यता के माध्यम से अनेक डिजिटल संसाधनों का लाभ लिया जा सकता है। डिजिटल लाइब्रेरी में विभिन्न ऑनलाइन पुस्तकालयों के साथ जुड़ाव की व्यवस्था है, जिससे पाठक अपने अध्ययन के लिए एक करोड़ से अधिक ई-पुस्तकों का उपयोग कर सकते हैं।
यह लाइब्रेरी 1 करोड़ ई-बुक्स और 32,000 भौतिक पुस्तकों का संयोजन है। यहाँ फ्री वाई-फाई, मॉनिटर, नोट्स बनाने और डाउनलोड करने की सुविधा उपलब्ध है। इससे अध्ययन करने वाले युवाओं को अपना ज्ञान बढ़ाने का उत्तम अवसर प्राप्त होता है।






















