दिल्ली में लगातार हो रही बारिश के बावजूद जंतर-मंतर पर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन गुरुवार को 20वें दिन भी जारी रहा। मौसम की मुश्किलों के बीच प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर धरना स्थल पर डटे हुए हैं। कई प्रदर्शनकारी तिरपाल और रेनकोट के सहारे बारिश से बचते हुए आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।
इस आंदोलन को समर्थन दे रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन अनशन भी लगातार जारी है। उनका अनशन गुरुवार को 12वें दिन में पहुंच गया। वहीं, भूख हड़ताल पर बैठे छात्र हरिकेश की तबीयत खराब होने के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में छात्रों से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग शामिल है।
बारिश के बीच प्रदर्शनकारियों का हौसला कायम
दिल्ली और आसपास के इलाकों में लगातार बारिश के कारण कई जगहों पर जलभराव और ट्रैफिक की समस्या देखने को मिली। इसके बावजूद जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन पर इसका खास असर नहीं पड़ा। सुबह से ही आंदोलनकारी धरना स्थल पर मौजूद रहे और अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाते रहे।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह आंदोलन केवल मौसम या परिस्थितियों पर निर्भर नहीं है। उनका उद्देश्य छात्रों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को सरकार तक मजबूती से पहुंचाना है। आंदोलन में शामिल लोगों ने कहा कि बारिश जैसी चुनौती भी उनके संकल्प को कमजोर नहीं कर सकती।
सोनम वांगचुक बोले- अनशन खत्म करने से समस्या का समाधान नहीं होगा
अनशन के दौरान सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्हें देशभर से लगातार संदेश मिल रहे हैं, जिनमें लोग उनसे स्वास्थ्य को देखते हुए अनशन समाप्त करने की अपील कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह फिलहाल खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत महसूस कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अगर वह आज अनशन समाप्त भी कर देते हैं, तो इससे उन छात्रों को न्याय नहीं मिलेगा जिनके मुद्दों को लेकर यह आंदोलन शुरू किया गया है। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भी ठोस कदम उठाने जरूरी हैं।
वांगचुक ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति या समूह तक सीमित नहीं है। यह देश के छात्रों, युवाओं और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों की समस्याओं का समाधान राष्ट्रीय प्राथमिकता होनी चाहिए।
शिक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा भी उठाया
सोनम वांगचुक ने आंदोलन के दौरान केवल शिक्षा व्यवस्था ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि देश को विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है।
उन्होंने लद्दाख, हिमालय और देश की नदियों के संरक्षण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यदि समय रहते नीतिगत फैसले नहीं लिए गए तो आने वाले समय में गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
वांगचुक के अनुसार शिक्षा और पर्यावरण दोनों ही ऐसे क्षेत्र हैं, जिनका सीधा संबंध देश के भविष्य से है। इसलिए इन मुद्दों को राजनीतिक बहस तक सीमित रखने के बजाय राष्ट्रीय हित के नजरिए से देखने की जरूरत है।
20 जुलाई को संसद तक शांतिपूर्ण मार्च का आह्वान
सोनम वांगचुक ने अपने समर्थकों से 20 जुलाई को दिल्ली पहुंचने की अपील की है। उन्होंने बताया कि संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के मौके पर जंतर-मंतर से संसद तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने की योजना बनाई गई है।
उन्होंने कहा कि संसद देश में महत्वपूर्ण फैसले लेने का प्रमुख स्थान है। ऐसे में लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे केवल सोशल मीडिया पर समर्थन देने तक सीमित न रहें, बल्कि जरूरत पड़ने पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े बदलाव के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी होता है। अगर लोग शिक्षा और पर्यावरण जैसे मुद्दों को लेकर गंभीर हैं, तो उन्हें इस अभियान में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
स्वास्थ्य को लेकर भी दी जानकारी
सोनम वांगचुक ने अपने स्वास्थ्य को लेकर कहा कि शुरुआती दिनों में चिकित्सकीय निगरानी के बीच स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन लंबे समय तक अनशन जारी रहने से स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि यदि लोग चाहते हैं कि आंदोलन मजबूत रहे और उनका स्वास्थ्य भी सुरक्षित रहे, तो उन्हें मैदान में आकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी भागीदारी दिखानी चाहिए। उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाएं और इस अभियान को मजबूती दें।






















