बिहार की राजधानी पटना में अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि वे रात के अंधेरे में सीसीटीवी कैमरों की परवाह किए बिना बेखौफ वारदात को अंजाम दे रहे हैं। ताजा मामला कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत करबिगहिया मोहल्ले का है, जहां एक युवक का जबरन अपहरण कर लिया गया। इस घटना के बाद इलाके में आक्रोश का ऐसा माहौल बना कि लोगों ने सड़कों पर उतरकर जमकर बवाल किया। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
रात के अंधेरे में हुई वारदात
प्राप्त जानकारी के अनुसार, न्यू करबिगहिया स्थित कब्रिस्तान गली निवासी बंटी कुमार सोमवार की देर रात पटना जंक्शन के समीप स्थित एक किराना स्टोर पर दही खरीदने के लिए निकले थे। तभी अचानक कुछ हथियारबंद युवक वहां पहुंच गए। शुरुआत में इन बदमाशों ने बंटी के साथ धक्का-मुक्की की और गालियां दीं। जैसे ही बंटी ने विरोध किया, बदमाशों ने उन पर जमकर लाठी-डंडे और मुक्के बरसाए। इसके बाद उन्हें वहां खड़ी एक काले रंग की स्कॉर्पियो कार में जबरदस्ती धकेल दिया गया और अज्ञात दिशा में फरार हो गए।
सबसे बड़ी बात यह है कि इस पूरी वारदात का एक सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। फुटेज में साफ दिख रहा है कि किस तरह से बदमाशों ने युवक को पीटा और कार में बैठाया। हालांकि, पुलिस अभी इस फुटेज को पूरी तरह से वेरिफाई कर रही है।
सेक्स रैकेट का विरोध करना पड़ा भारी?
अपहृत युवक के परिजनों ने जो गंभीर आरोप लगाए हैं, वे पुलिस प्रशासन के लिए चिंताजनक बताए जा रहे हैं। परिजनों का कहना है कि बंटी कुमार उस इलाके में चल रहे एक संगठित सेक्स रैकेट का पुरजोर विरोध कर रहे थे। वह लगातार इस अवैध धंधे के खिलाफ आवाज उठा रहे थे, जिससे रैकेट चलाने वाले लोगों की नींद उड़ी हुई थी। आशंका जताई जा रही है कि इसी विरोध का बदला लेने के लिए उसका अपहरण किया गया है। फिलहाल, पुलिस इस आरोप की तफ्तीश में जुटी हुई है और इस बात की पुष्टि करने की कोशिश कर रही है कि क्या वास्तव में ऐसा कोई रैकेट संचालित हो रहा था।
सड़कों पर उतरे लोग
जैसे ही अपहरण की खबर आग की तरह फैली, तो नाराज स्थानीय लोगों और बंटी के परिवार वालों ने मुख्य सड़क पर धरना दे दिया। लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर टायर जला दिए और आग की लपटों के बीच पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों का कहना था कि पुलिस इस इलाके में अवैध गतिविधियों पर लगाम नहीं लगा रही है।

लगभग दो घंटे तक चले इस उग्र प्रदर्शन की वजह से करबिगहिया और आसपास के इलाकों में वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। आम नागरिकों को भारी परेशानी हुई। इस दौरान पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा, लेकिन भीड़ के गुस्से को शांत कराने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
थाने में भी मचा हंगामा
वहीं, मंगलवार को जब परिजनों ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई और काफी देर तक बंटी का कोई सुराग नहीं मिला, तो लोगों का धैर्य जवाब दे गया। देर शाम परिजनों ने थाने के अंदर ही हंगामा खड़ा कर दिया। उन्होंने पुलिस अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर समय रहते कार्रवाई होती, तो शायद अब तक बंटी को बदमाशों के चंगुल से छुड़ाया जा चुका होता।
दिलचस्प बात यह है कि बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव को लेकर आदर्श आचार संहिता (मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट) लागू है। चुनाव आयोग के कड़े नियमों के बावजूद लोगों ने इस तरह का धरना-प्रदर्शन किया, जो पुलिस प्रशासन के लिए एक चुनौती बन गया।
प्रशांत किशोर ने दी 48 घंटे की अल्टीमेटम
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ तब आया, जब जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर खुद मौके पर पहुंचे। उन्होंने भीड़ को संबोधित किया और प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी। प्रशांत किशोर ने साफ शब्दों में कहा कि यदि अगले 48 घंटे (दो दिनों) के भीतर अपहृत युवक बंटी कुमार को सकुशल बरामद नहीं किया गया, तो वह स्वयं इस आंदोलन का हिस्सा बनेंगे। उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर पुलिस मुख्यालय तक जुलूस निकालने की धमकी दी है। प्रशांत किशोर के आने से मामले को राजनीतिक रंग मिल गया है और पुलिस पर दबाव कई गुना बढ़ गया है।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की रणनीति
मामले के बिगड़ते हालात को देखते हुए पटना पुलिस ने भी कमर कस ली है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बजरंगी और रोहित नाम के दो संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया है। इन दोनों से कड़ाई से पूछताछ की जा रही है, ताकि अपहरणकर्ताओं के नेटवर्क और उनके ठिकानों का पता लगाया जा सके।
वहीं, एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) समेत कई पुलिस टीमें अलग-अलग लोकेशन पर छापेमारी कर रही हैं। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर स्कॉर्पियो गाड़ी की ट्रैकिंग की जा रही है और मोबाइल लोकेशन की मदद से भी तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
अब सबकी नजरें अगले 24 से 48 घंटों पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पुलिस प्रशांत किशोर द्वारा दी गई डेडलाइन से पहले बंटी कुमार को बदमाशों के चंगुल से छुड़ा पाती है, या फिर इस मामले को लेकर एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन शुरू हो जाएगा। वहीं, सेक्स रैकेट के आरोपों ने इस किडनैपिंग केस को और भी ज्यादा रहस्यमयी बना दिया है।






















