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फर्जी IAS ब्राइड ने लूटे लाखों, कम चढ़ावे पर बवाल

बरेली का मामला साबित करता है कि कैसे शादी के पवित्र प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल लूटपाट और अपराध को अंजाम देने के लिए किया जा रहा है, वहीं कानपुर देहात की घटना शादियों में बढ़ते भौतिकवाद और अहंकार की पोल खोलती है। जहां एक परिवार की जान बच गई और दूसरे परिवार को सामाजिक अपमान झेलना पड़ा

लाखों के जेवर लूटकर भागी फर्जी IAS दुल्हन, अब गिरफ्तार

HIGHLIGHTS

  • गला दबाकर पति को मारने की कोशिश
  • कम चढ़ावा देख भड़की दुल्हन
  • झांसे में आई फर्जी IAS दुल्हन
  • कानपुर में चढ़ावे को लेकर हुआ बवाल
  • दुल्हन ने दबाया अपने पति का गला

UP News:विवाह को साक्षात् ईश्वर का बंधन माना जाता है, लेकिन जब इस पवित्र रिश्ते को लोभ, ठगी और झूठ का आधार बना लिया जाता है, तो परिणाम कितने भयावह हो सकते हैं, इसका जीता-जागता उदाहरण उत्तर प्रदेश से सामने आया है। प्रदेश के दो अलग-अलग जिलों—बरेली और कानपुर देहात से जुड़े दो मामलों ने शादी की परंपराओं और भरोसे पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। पहले मामले में एक महिला ने खुद को आईएएस अधिकारी बताकर शादी रचाई और फिर लाखों के जेवर हड़पकर पति की जान लेने की कोशिश की, जबकि दूसरे मामले में महज चढ़ावे (उपहार) में कम सामान आने को लेकर दुल्हन पक्ष ने इतना बवाल मचाया कि बारात को बैरंग लौटना पड़ा।

बरेली: फर्जी आईएएस अधिकारी बनकर दूल्हन ने रची साजिश

बरेली जिले के फरीदपुर थाना क्षेत्र स्थित गांव पचौमी निवासी एक युवक अभिषेक का जीवन इस वक्त तबाह हो चुका है। अभिषेक की शादी इसी साल 7 फरवरी 2025 को बदायूं के बिल्सी थाना क्षेत्र के संतौत पट्टी गांव निवासी नरेंद्र पाल सिंह की बेटी साधना के साथ हुई थी। शादी से पहले साधना और उसके परिवार ने एक ऐसा जाल बुना, जिसमें अभिषेक और उसके परिवार वाले फंसते चले गए।

साधना ने खुद को आईएएस अधिकारी बताकर अभिषेक को प्रभावित किया। ना केवल साधना, बल्कि उसके पिता नरेंद्रपाल सिंह, भाई सूर्यप्रताप और एक अन्य रिश्तेदार राजेंद्र सिंह ने भी यह दावा किया कि जैसे ही कोर्ट का कोई पेंडिंग मामला खत्म होगा, साधना की तैनाती हो जाएगी। साथ ही, यह भी भरोसा दिलाया गया कि साधना अभिषेक को भी किसी अच्छी सरकारी नौकरी दिला देगी। इस झूठे सपने के साये में अभिषेक का परिवार इस शादी के लिए राजी हो गया।

लाखों की ठगी और हत्या का खतरनाक प्रयास

शादी के बाद साधना के असली रंग उभरने शुरू हो गए। उसने अपनी नौकरी की फाइलें तैयार कराने और कोर्ट केस सेटल करने के बहाने अभिषेक से उसकी चेन, अंगूठी और उसकी मां के जेवरों समेत करीब 15 तोला सोना, डेढ़ किलो चांदी और शादी में मिले अन्य कीमती उपहारों को अपने कब्जे में ले लिया।

जब जेवर हड़प लिए तो साधना की हवाइयां और बदल गईं। उसने अभिषेक पर 20 बीघा जमीन बेचकर अस्पताल बनवाने का दबाव डालना शुरू कर दिया। जब अभिषेक ने इसका विरोध किया, तो साधना अपने फर्जी आईएएस अधिकारी वाले रौब का इस्तेमाल करने लगी। उसने पति को झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल भिजवाने और जान से मारने की खुली धमकी दी।

मामले का सबसे डरावना पहलू तब सामने आया जब 12-13 मार्च 2026 की देर रात साधना ने सो रहे अभिषेक का गला दबाकर उसकी हत्या का प्रयास किया। किसी तरह जान बचाकर अभिषेक ने तत्काल डायल-112 पर सूचना दी। इसके बाद गांव की पंचायत में जब मामला उठाया गया, तो साधना द्वारा जेवर हड़पने की बात स्वीकार कर ली गई। बाद में पता चला कि साधना पहले भी कई लोगों के साथ इसी तरह की ठगी कर चुकी है। अभिषेक ने 28 जून को फरीदपुर थाने में पत्नी और उसके परिवारजनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। इंस्पेक्टर राधेश्याम की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी दुल्हन साधना को गिरफ्तार कर लिया है।

कानपुर देहात: चढ़ावे में कम सामान देख भड़की दुल्हन

दूसरा और भी शर्मनाक मामला कानपुर देहात के मंगलपुर थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां शादी की रस्में पूरी होने के बाद भी विवाह नहीं हो सका और इसका कारण बस ‘चढ़ावे’ में आए सामान की कमी थी।

बीसलपुर गांव निवासी अवधेश सिंह के बेटे कुबेदान सिंह की बारात शनिवार को खिरवा गांव पहुंची थी। शादी से ठीक पहले एक तरफा तनाव पहले से मौजूद था, क्योंकि 7 जुलाई को दुल्हन के भाई को गोली लगी थी। इस घटना के कारण वरमाला का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया था। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी कि बाकी की रस्में निपटाई जाएंगी। रात के समय ‘टीका’ सहित अन्य सभी कार्यक्रम बड़े ही शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो गए।

लेकिन रविवार सुबह जब विवाह की मुख्य रस्मों के लिए चढ़ावे का सामान सामने रखा गया, तो माहौल एकदम से बिगड़ गया। दुल्हन पक्ष को चढ़ावे में दिए गए उपहारों और सामान की मात्रा पसंद नहीं आई। इस बात को लेकर उन्होंने तीखी नाराजगी जताई, जो बातचीत में जल्द ही कहासुनी का रूप ले लिया। दुल्हन पक्ष ने साफ इनकार कर दिया कि वे आगे की कोई भी वैवाहिक रस्म नहीं कराएंगे।

घंटों चली पंचायत भी बेअसर

इसके बाद शुरू हुआ लंबा नाटक। रविवार सुबह से लेकर दोपहर लगभग तीन बजे तक लगातार दोनों पक्षों के रिश्तेदारों, गांव के बुजुर्गों और गणमान्य लोगों की एक पंचायत चलती रही। वर पक्ष के लोग बार-बार समझौते की कोशिश करते रहे ताकि शादी संपन्न हो सके, लेकिन दुल्हन पक्ष अपने रुख पर अड़ा रहा। जब सारे प्रयास व्यर्थ हो गए, तो अंततः वर पक्ष को अपनी बारात लेकर बिना दुल्हन के ही वापस लौटना पड़ा।

रिश्तों का व्यापारीकरण चिंताजनक

ये दोनों मामले समाज के लिए एक कड़वा सच हैं। एक तरफ जहां बरेली का मामला साबित करता है कि कैसे शादी के पवित्र प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल लूटपाट और अपराध को अंजाम देने के लिए किया जा रहा है, वहीं कानपुर देहात की घटना शादियों में बढ़ते भौतिकवाद और अहंकार की पोल खोलती है। जहां एक परिवार की जान बच गई और दूसरे परिवार को सामाजिक अपमान झेलना पड़ा, दोनों ही स्थितियां यह दर्शाती हैं कि आज रिश्तों को लेकर लोगों की सोच कितनी बदल चुकी है। ऐसे में शादी से पहले दूसरे पक्ष की अच्छी तरह से जांच-पड़ताल करना और भौतिकता से ऊपर उठकर सोचना हर परिवार के लिए सबसे जरूरी हो गया है।

Sandhya Samay News

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