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हाई-टेक चाबी से कार चोरी का पर्दाफाश, पुलिस ने पकड़ा

Delhi News: पुलिस ने इस गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिनमें प्रमुख नाम कुलदीप सिंह उर्फ लक्की है, जो थाना अलीपुर का हिस्ट्रीशीटर है। उसका पहले से 25 आपराधिक मामले दर्ज हैं। गिरोह का मास्टरमाइंड इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और कंप्यूटर सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर महंगी कारों की डुप्लीकेट स्मार्ट-की बनाता था।

दिल्ली में हाई-टेक वाहन चोरी का बड़ा मामला उजागर

HIGHLIGHTS

  • दिल्ली पुलिस का बड़ा खुलासा: स्मार्ट चाबी से गाड़ियां चोरी
  • इलेक्ट्रॉनिक गैंग का पर्दाफाश, 11 महंगी कारें बरामद
  • चोरी की कारें ट्रैकिंग सिस्टम हटाकर कैसे चुराई जाती थीं?
  • स्मार्ट चाबी से चोरी करने वाला गैंग दिल्ली पुलिस के हत्थे
  • कार चोर गिरोह का राज खोलने वाली पुलिस की बड़ी कार्रवाई

Delhi News: दिल्ली पुलिस ने हाई-टेक वाहन चोर गैंग का पर्दाफाश किया है, जिसने स्मार्ट चाबियों की नकल कर महंगी कारें चोरी करने का अनूठा तरीका अपनाया था। इस गिरोह ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल कर कुछ ही सेकंड में डुप्लीकेट स्मार्ट-की तैयार कर, बिना लॉक तोड़े, वाहन चोरी कर लेते थे। पुलिस की कार्रवाई में 11 चोरी की कारें, एक ऑटो और हाई-टेक उपकरण बरामद किए गए हैं। इस सफलता ने राजधानी में वाहन चोरी की घटनाओं को नियंत्रित करने में मदद की है और गिरोह के अन्य सदस्यों की खोज जारी है। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।

हाई-टेक गैंग का तरीका और वारदात का सुनियोजित प्लान

रोहिणी जिले की स्पेशल स्टाफ टीम ने इस शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मदद से अत्याधुनिक तरीके से वाहन चोरी किया करता था। यह गिरोह डुप्लीकेट स्मार्ट-की बनाने के लिए कंप्यूटराइज्ड की-कटिंग मशीन, विशेष सॉफ्टवेयर, टैबलेट और इलेक्ट्रॉनिक प्रोग्रामिंग डिवाइसेस का प्रयोग करता था। इन उपकरणों की मदद से, कुछ ही सेकंड में किसी भी लग्जरी कार की नकली चाबी बनाना संभव था। इस प्रक्रिया के दौरान, वाहनों में लगे GPS ट्रैकिंग सिस्टम का भी पता लगाकर उसे निष्क्रिय कर दिया जाता था, ताकि पुलिस को वाहन का पता लगाना मुश्किल हो जाए।

गिरोह का संचालन और सदस्य

पुलिस ने इस गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिनमें प्रमुख नाम कुलदीप सिंह उर्फ लक्की है, जो थाना अलीपुर का हिस्ट्रीशीटर है। उसका पहले से 25 आपराधिक मामले दर्ज हैं। गिरोह का मास्टरमाइंड इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और कंप्यूटर सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर महंगी कारों की डुप्लीकेट स्मार्ट-की बनाता था। गिरोह के अन्य सदस्यों में बलविंदर उर्फ बिंदा, दीपक उर्फ देव और बख्शीश सिंह उर्फ मन्नी शामिल हैं। दीपक चोरी की गाड़ियों को खरीदने का काम करता था, जबकि बख्शीश सिंह वाहन के स्पेयर पार्ट्स को खोल कर बेच देता था।

चोरी का तरीका और वाहन की ट्रेसिंग

गिरोह नई और महंगी गाड़ियों की रेकी करता था, जिसमें बलविंदर उर्फ बिंदा दिनभर विभिन्न कॉलोनियों में घूमकर वाहन की पहचान करता था। रात के समय, वह वाहन का पूरा डेटा गिरोह के सरगना को पहुंचाता था। बाद में, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मदद से, वाहन की ट्रैकिंग सिस्टम का पता लगाकर, GPS डिटेक्टर का उपयोग कर, वाहन की लोकेशन को जान-बूझकर बेअसर कर दिया जाता था। इस तरह, पुलिस के लिए वाहन तक पहुंचना कठिन हो जाता था। बिना लॉक तोड़े और शीशा तोड़ने के बिना, ये गिरोह महंगी गाड़ियों को आसानी से चुरा लेता था।

वाहन चोरी के बाद का कारोबार और पार्ट्स का ग्रे मार्केट

चोरी के बाद, गिरोह महंगी SUVs और लग्जरी कारों को दूसरे राज्यों में सक्रिय रिसीवरों के जरिए बेच देता था। जिन वाहनों को बेचना संभव नहीं होता, उन्हें गुप्त ठिकानों पर ले जाकर खोल दिया जाता था। वाहन के इंजन, गियरबॉक्स, ECU, अलॉय व्हील, हेडलाइट और अन्य महंगे स्पेयर पार्ट्स को निकाल कर गुप्त मार्केट में बेच दिया जाता था। इससे न केवल वाहन चोरी का कारोबार चलता था, बल्कि फर्राटेदार स्पेयर पार्ट्स भी बाजार में पहुंचते थे। गिरोह के लिए, चोरी के वाहन और स्पेयर पार्ट्स की ढुलाई का काम ऑटो का इस्तेमाल किया जाता था, ताकि शक न हो।

पुलिस की गिरफ्तारी और बरामदगी

पुलिस ने इस मामले में कुलदीप सिंह, बलविंदर, दीपक और बख्शीश को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से 11 चोरी की कारें, एक चोरी का ऑटो, 50 इलेक्ट्रॉनिक डुप्लीकेट चाबियां, कंप्यूटरीकृत की-कटिंग मशीन, टैबलेट, GPS डिटेक्टर, फर्जी नंबर प्लेट और अन्य उपकरण बरामद किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि गिरोह के अन्य सदस्यों और वाहनों को खरीदने वाले नेटवर्क की भी तलाश जारी है, ताकि इस पूरे गिरोह का नेटवर्क पूरी तरह से ध्वस्त किया जा सके।

रोहिणी पुलिस का मानना है कि इस मामले की आगे जांच में कई और वाहन चोरी के मामलों का खुलासा हो सकता है। पुलिस की टीम अन्य संदिग्धों की तलाश कर रही है और उनके नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। इस कार्रवाई से राजधानी दिल्ली में वाहन चोरी के मामलों में कमी आएगी और अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस की इस सफलता ने साबित किया है कि हाई-टेक तरीके अपनाने वाले अपराधियों का पर्दाफाश करना संभव है, बशर्ते पुलिस के पास सही उपकरण और रणनीति हो।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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