देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने (E-20 पेट्रोल) के बड़े-बड़े दावों के बीच, उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जो इस राष्ट्रीय महत्वाकांक्षी परियोजना की जमीनी हकीकत को उजागर कर रही है। बस्ती जिले के दसिया गांव में एथेनॉल फैक्ट्री लगाए जाने को लेकर स्थानीय किसानों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। मंगलवार को इस फैक्ट्री के खिलाफ एक बड़ा विरोध प्रदर्शन प्लान किया गया था, जिसे देखते हुए प्रशासन ने पूरे इलाके को एक पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
सड़कों पर उतरे किसान और भारी पुलिस बल
आज मंगलवार सुबह 10 बजे फैक्ट्री को बंद कराने और निर्माण कार्य को रुकवाने के लिए ग्रामीणों ने जुलूस निकालने की प्लानिंग की थी। इसमें कई किसान संगठनों और राजनीतिक दलों के लोग शामिल होने वाले थे। किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए। फैक्ट्री गेट से लेकर आसपास के गांवों तक पुलिस का घेरा सजा दिया गया। बताया जा रहा है कि व्यवस्था बनाए रखने के लिए तीन एसडीएम, कई क्षेत्राधिकारी (CO), जिले के सभी थाना प्रभारी और बड़ी संख्या में अतिरिक्त पुलिस बल को तैनात किया गया था।
इस विरोध प्रदर्शन को तीव्रता देने के लिए समाजवादी पार्टी (SP) के स्थानीय सांसद रामप्रसाद चौधरी और विधायक राजेंद्र प्रसाद चौधरी भी फैक्ट्री स्थल की ओर पैदल ही निकले थे। लेकिन, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्क प्रशासन ने उन्हें दसिया मोड़ पर ही बैरिकेड्स लगाकर रोक लिया। वहां दोनों नेताओं के समर्थन में बड़ी संख्या में भीड़ भी इकट्ठा हो गई, जिससे तनाव की स्थिति बनी रही।
किसानों को गुमराह करने का लगा आरोप
भारी पुलिस बल के बीच सपा विधायक राजेंद्र प्रसाद चौधरी ने मीडिया से बातचीत करते हुए इस मामले को किसानों के हित से जोड़कर देखा। उन्होंने स्पष्ट आरोप लगाया कि स्थानीय किसानों को भ्रमित करके उनकी उपजाऊ जमीनें धोखे से ले ली गई हैं और उन्हीं जमीनों पर अब यह फैक्ट्री स्थापित की जा रही है।
विधायक ने फैक्ट्री की तकनीकी बातों पर भी प्रश्न चिह्न लगाया। उन्होंने बताया कि इस एथेनॉल यूनिट से हर रोज लगभग साढ़े चार लाख लीटर पानी की रिसाइक्लिंग की जाएगी। इतनी बड़ी मात्रा में पानी के इस्तेमाल और उससे निकलने वाले जहरीले अपशिष्ट का इलाके में कहां निष्कासन होगा?
उन्होंने चेतावनी दी कि यह अपशिष्ट किसानों की फसलों और आम जनता के स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो सकता है। उनका मानना है कि इस फैक्ट्री से क्षेत्र के युवाओं और व्यापारियों को कोई खास लाभ नहीं होगा, बल्कि पर्यावरणीय प्रदूषण और जलस्तर गिरने जैसी भारी समस्याएं खड़ी होंगी। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की और ‘फैक्ट्री नहीं चलेगी’ के स्लोगन लगाए।
सांसद ने उठाई औद्योगिक क्षेत्र की मांग
वहीं, सपा सांसद रामप्रसाद चौधरी ने सरकार की नीतियों पर निशाना साधा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी भारी औद्योगिक इकाई आबादी वाले इलाके या गांवों में नहीं लगाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह ऐसी फैक्ट्रियों को पहले से मौजूद औद्योगिक क्षेत्रों (Industrial Areas) में शिफ्ट करे, ताकि आम नागरिकों और किसानों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित न हो। सांसद ने भीड़ को संबोधित करते हुए आश्वासन दिया कि स्थानीय लोगों के साथ कोई भी अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और इस पूरे मुद्दे को लोकसभा (संसद) में जोर-शोर से उठाया जाएगा। विधायक ने भी यह वादा किया कि इसे विधानसभा में भी बहस का विषय बनाया जाएगा।























