मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज रविवार को अपने गृह नगर गोरखपुर से एक बड़ी पर्यावरण पहल का शुभारंभ किया और इस दौरान उन्होंने 35 करोड़ पौधरोपण महायज्ञ का आगाज किया, जो देशव्यापी पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति जनजागरूकता का प्रतीक है। इस महत्वपूर्ण आयोजन का उद्देश्य न केवल हरित क्रांति को प्रोत्साहित करना है बल्कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने का भी संदेश देना है। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
पर्यावरण का महत्व और धरती माता का सम्मान
मुख्यमंत्री योगी ने अपने संबोधन में कहा कि हम अपने जीवन में अनेक उपचार कराते हैं, स्वास्थ्य का ध्यान रखते हैं, लेकिन धरती मां के स्वास्थ्य के प्रति हम अक्सर उदासीन रहते हैं। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन मानवता के लिए खतरा बन चुका है। आज का मानवता इन खतरों का सामना कर रही है और इसका कारण प्राकृतिक संसाधनों का अनियंत्रित उपयोग है।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि यह पौधरोपण महायज्ञ धरती मां के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का एक प्रयास है। धरती माता ने हमें जीवन देने के साथ-साथ हमें जीवन के विविध अवसर भी प्रदान किए हैं — जैसे साफ हवा, स्वच्छ जल, उपजाऊ भूमि और फल-फूल। भारतीय ऋषियों ने सदियों से इस बात का संकल्प लिया है कि हम धरती को अपनी माता मानें और इसकी रक्षा करें।
पिछले वर्षों में यूपी में पर्यावरण संरक्षण
योगी सरकार ने पिछले नौ वर्षों में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में पौधरोपण के मामले में देश में एक उदाहरण स्थापित किया है। इस दौरान प्रदेश में 242 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं। साथ ही, राज्य ने अपनी इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के साथ-साथ वनाच्छादन में भी सुधार किया है। इन प्रयासों का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए सतत विकास को बढ़ावा देना है।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आज पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग, मौसम के चक्र में बदलाव और पर्यावरण असंतुलन जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही है। गर्मी और सर्दी दोनों चरम पर पहुंच चुके हैं। समुद्र के स्तर में वृद्धि के चलते कई शहर डूबने की स्थिति में हैं। जल संकट भी विकराल रूप ले चुका है। उन्होंने बताया कि इन समस्याओं का कारण प्रकृति के साथ खिलवाड़ है, जिसमें अंधाधुंध पेड़ काटना और संसाधनों का अत्यधिक दोहन शामिल है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने इन चुनौतियों का सामना करने के लिए निरंतर प्रयास किया है। उदाहरण के तौर पर, जब 2027 में सरकार सत्ता में आई, तो उसने हैलोजन लाइट को हटाकर ऊर्जा संरक्षण के लिए एलईडी स्ट्रीट लाइट का प्रयोग शुरू किया। इससे न केवल ऊर्जा की बचत हुई, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आई। अब सौर ऊर्जा का प्रयोग भी व्यापक रूप से हो रहा है, जिससे बिजली के बिल कम हो रहे हैं और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा मिल रहा है।
प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और सामाजिक पहल
योगी सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि गरीब और वंचित वर्ग को सुविधाएं मिलें। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में गैस सिलेंडर ब्लैक मार्केट में बिकता था, लेकिन वर्तमान में 10 करोड़ से अधिक परिवारों को मुफ्त एलपीजी गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। इससे न केवल ऊर्जा का सुलभ उपयोग हुआ है, बल्कि स्वच्छता और जीवन शैली में भी सुधार हुआ है।
मुख्यमंत्री योगी ने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के पास पौधरोपण किया। उन्होंने नीम, पीपल और बरगद जैसे पवित्र पेड़ों का रोपण किया और पौधरोपण अभियान का शुभारंभ गुब्बारे उड़ाकर किया। इस अवसर पर उन्होंने केंद्रीय मंत्री संजय निषाद, वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, सांसद रवि किशन शुक्ला और अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ इस आयोजन का अवलोकन किया। साथ ही, उत्तर प्रदेश में नौ वर्षों की हरित क्रांति की उपलब्धियों का फिल्म और वानिकी कैलेंडर का विमोचन किया। इस कार्यक्रम में, प्रधानमंत्री आवास योजना से लाभान्वित महिलाओं को सहजन का पौधा भी उपहार स्वरूप प्रदान किया गया। साथ ही, कार्बन क्रेडिट के तहत चार किसानों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।























