उत्तर प्रदेश में आगामी छह महीनों के भीतर विधानसभा चुनाव के शंखनाद होने वाले हैं। राजनीतिक पारा चढ़ने से पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। सोमवार को सीएम योगी के सरकारी आवास पर हुई उच्च-स्तरीय बैठकों का सिलसिला इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इन बैठकों में कैबिनेट मंत्रियों के साथ-साथ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल की मौजूदगी प्रशासनिक और संगठनात्मक तालमेल की तस्वीर साफ तौर पर साफ करती है। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं और जानिए इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं को।
मंत्रियों को जमीनी स्तर पर उतरने के सख्त निर्देश
योगी सरकार अब केवल योजनाओं का शुभारंभ करने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उसका पूरा फोकस इन योजनाओं के लाभ को ‘अंतिम पायदान’ पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने पर है। सीएम योगी ने साफ शब्दों में कहा कि प्रदेश की 25 करोड़ की जनसंख्या उनके परिवार के समान है और किसी भी जरूरतमंद को सुविधाओं से वंचित नहीं रखा जाएगा।
चुनावी माहौल को देखते हुए मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों को एक्शन मोड में रहने के निर्देश दिए हैं। अब मंत्रियों को अपने-अपने क्षेत्रों का दौरा करके विकास कार्यों का ऑन-स्पॉट जायजा लेना होगा। इसके तहत कई विशेष कार्ययोजनाएं तय की गई हैं:
बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में सरकार द्वारा दी जा रही निःशुल्क सुविधाओं (यूनीफॉर्म, बैग, किताबें और जूते-मोजे) की जांच करने के लिए मंत्रियों को स्कूलों में जाकर अभिभावकों से सीधा संवाद स्थापित करना होगा। बच्चों के रिपोर्ट कार्ड की समीक्षा करके शिक्षा की गुणवत्ता का आकलन किया जाएगा। अस्पतालों में मिल रही जनसुविधाओं की पड़ताल के साथ-साथ जल जीवन मिशन के तहत आ रही सड़क कटिंग (Road Cutting) की समस्याओं को समय-सीमा में निपटाने का टास्क दिया गया है। प्रत्येक जिले में मौजूद महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के साथ बातचीत करके उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने की जिम्मेदारी मंत्रियों पर सौंपी गई है।
शिक्षकों के लिए ऐतिहासिक स्वास्थ्य बीमा योजना
प्रदेश सरकार शिक्षा कर्मियों के कल्याण के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि 8 जुलाई को वाराणसी से ‘मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना’ का शुभारंभ होगा। इस योजना के तहत बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग से जुड़े शिक्षक, शिक्षा मित्र और अनुदेशकों के साथ ही उनके परिवार के सदस्यों को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान किया जाएगा। इस योजना को जनपद स्तर पर मंत्रियों और विधायकों की अगुवाई में भव्य कार्यक्रमों के माध्यम से लॉन्च किया जाएगा, ताकि इसका सीधा संदेश शिक्षा समुदाय तक पहुंचे।
‘पौधरोपण महाभियान-2026’
विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी सरकार गंभीर है। सीएम योगी ने 12 जुलाई को प्रदेशभर में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत वृक्षारोपण महाअभियान शुरू करने का ऐलान किया है। इस अभियान के माध्यम से उत्तर प्रदेश 275 करोड़ पौधे लगाने का एक अनूठा विश्व रिकॉर्ड अपने नाम करने की ओर अग्रसर है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि सीएम ने केवल पौधे लगाने पर जोर नहीं दिया, बल्कि उनकी सुरक्षा (Survival Rate) पर भी समान रूप से जोर दिया है। इसके लिए उन्होंने सोमवार को ही विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ एक वर्चुअल बैठक की।
48 घंटे का अल्टीमेटम
वर्चुअल संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने सभी जनप्रतिनिधियों को एक सख्त समय-सीमा का आदेश दिया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अगले 48 घंटे (दो दिन) के भीतर हर विधायक और जनप्रतिनिधि को अपने-अपने इलाके में स्थानीय अधिकारियों, भाजपा कार्यकर्ताओं और गैर-सरकारी संस्थाओं के साथ बैठक करनी होगी। इस बैठक में तय किया जाएगा कि पौधे कहां-कहां लगाए जाएंगे और किस तरह के पौधों की जरूरत है। इसका प्रस्ताव तय समय में जिला प्रशासन और वन विभाग को भेजना होगा, ताकि 12 जुलाई तक कोई भी तार्किक या भौतिक कमी न रहे।
महिला उद्यमिता और आशा वर्कर्स
बैठक के दौरान सीएम योगी ने प्रदेश की महिलाओं की सकारात्मक भूमिका को भी सराहा। उन्होंने सिद्धार्थनगर जिले की एक महिला उद्यमी का उदाहरण देते हुए बताया कि किस तरह ‘मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना’ ने उसकी जिंदगी बदल दी और मात्र दो वर्षों में उसने 6 लाख रुपये की आय अर्जित की। वह अब अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी हुई है। इसके अलावा, कोविड-19 महामारी के दौरान अग्रिम पंक्ति पर काम करने वाली आशा वर्करों के योगदान को सराहते हुए सीएम ने संकेत दिए कि उनके मानदेय में वृद्धि की जल्द ही घोषणा की जा सकती है।























