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मीरा—भयंदर के जंगलों में अवैध गतिविधियों का कहर, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

मीरा—भायंदर के जंगलों में अवैध गतिविधियों का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है

Mira-Bhayandar News: मीराभयंदर के जंगलों में अवैध गतिविधियों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है, जिससे क्षेत्र की वन्यजीव सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान से सटे यऊर और घोड़बंदर के वन क्षेत्र में अतिक्रमण, अवैध निर्माण, पेड़ कटाई और वन्यजीवों के शिकार की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। इन घटनाओं ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

अवैध गतिविधियों का ग्राफ तेज़

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) की बार-बार शिकायतों के बावजूद वन विभाग की उदासीनता से स्थानीय जनता में नाराजगी व्याप्त है। जंगल में बाहरी लोगों की आवाजाही में बढ़ोतरी हो रही है, जिनके कारण अतिक्रमण और अवैध व्यापार जैसे अपराधों को बढ़ावा मिल रहा है। तेंदुओं के शिकार और उनके अवैध व्यापार की आशंकाएं भी जताई जा रही हैं, जो वन्यजीवों के लिए बड़ा खतरा हैं।

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पेड़ों की कटाई और ‘चॉल माफिया’ का दबदबा

सूत्रों के अनुसार, कुछ इलाकों में चॉल माफिया द्वारा बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की जा रही है। जंगल की जमीन पर कब्जा कर अवैध बस्तियां बसाने की कोशिशें भी तेज हैं। ये गतिविधियां पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा रही हैं और भविष्य में बड़े पारिस्थितिक संकट का संकेत दे रही हैं।

मगरमच्छ मिलने से मचा हड़कंप

मीरा रोड के मंडोवी पाड़ा में एक निजी खदान में मगरमच्छ पाया जाना क्षेत्र में सनसनी फैलाने वाला मामला है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस इलाके में मगरमच्छ का पाया जाना असामान्य और संदिग्ध है। मनसे पदाधिकारी सचिन जांभाले ने इस घटना पर अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन जिम्मेदारी डालने के अलावा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इस घटना ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

वन चौकियों का अस्तित्व संकट में

संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान से सटे माशाचा पाड़ा जैसे संवेदनशील इलाकों में वन चौकियों का अधिकतर समय बंद रहना चिंता का विषय है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पेट्रोलिंग की व्यवस्था निष्क्रिय है, जिससे जंगल में असामाजिक तत्वों का प्रवेश आसान हो गया है। रात के समय संदिग्ध गतिविधियों की खबरें भी सामने आ रही हैं।

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सुरक्षा व्यवस्था की खामियां

कुछ महीनों पहले, इसी क्षेत्र में एक व्यक्ति द्वारा जंगल में आत्महत्या करने का मामला सामने आया था। उस समय भी वन चौकी पर कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि जंगल की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से फेल हो चुकी है।

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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