संध्या समय न्यूज
महाराष्ट्र विधानसभा का बजट सत्र आज से शुरू हो रहा है। राज्य के संवैधानिक इतिहास में यह पहला अवसर होगा, जब विधानसभा और विधान परिषद दोनों सदनों में औपचारिक रूप से ‘नेता प्रतिपक्ष’ (Leader of Opposition) का पद खाली रहेगा। मौजूदा राजनीतिक गणित और विपक्ष के घटे हुए संख्याबल के कारण यह अभूतपूर्व स्थिति बनी है।
विपक्ष को नहीं मिल पाया आवश्यक संख्या
विधानसभा और 78 सदस्यीय विधान परिषद में विपक्ष के पास नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए आवश्यक 10 प्रतिशत संख्या नहीं है। पिछले साल दिसंबर में कांग्रेस के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) प्रज्ञा सातव के इस्तीफे के बाद विपक्ष की स्थिति परिषद में और कमजोर हो गई थी, जिसके चलते उन्हें इस पद के लिए दावा पेश करने में कठिनाई हो रही है।

विपक्ष ने दिखाई चिंता, सरकार पर लगाए आरोप
महाराष्ट्र के प्रमुख विपक्षी गठबंधन ‘महा विकास अघाडी’ (MVA) ने इस स्थिति को लोकतांत्रिक मानदंडों के लिए खतरा बताया है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने इसे लोकतंत्र पर ‘कलंक’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जवाबदेही से बचने के लिए विपक्ष की संवैधानिक भूमिका को कमजोर करना चाहती है। वहीं, शिवसेना (यूबीटी) के विधायक भास्कर जाधव ने सत्तारूढ़ गठबंधन ‘महायुति’ पर अहंकार का आरोप लगाते हुए कहा कि सदनों में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति न करना लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को जानबूझकर कमजोर करने की कवायद है। विपक्ष का तर्क है कि भारी बहुमत वाली सरकार के सामने संस्थागत नियंत्रण और संतुलन बनाए रखने के लिए नेता प्रतिपक्ष का होना अनिवार्य है।
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सीएम फडणवीस का रुख
इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति विधानसभा अध्यक्ष और विधान परिषद के सभापति का विशेषाधिकार है। उन्होंने इस विषय पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए इसे सदन की प्रक्रिया से जुड़ा निर्णय बताया।
सत्र का अन्य एजेंडा: अजित पवार को दी जाएगी श्रद्धांजलि
बजट सत्र की कार्यवाही के दौरान दिग्गज नेता अजित पवार के निधन पर शोक प्रस्ताव पेश किया जाएगा और उन्हें श्रद्धांजलि दी जाएगी। वहीं, रोहित पवार सहित कुछ विधायकों ने अजित पवार की विमान दुर्घटना को लेकर संशय जताया है और वे इस मुद्दे को लेकर सदन में आवाज उठाने की तैयारी कर रहे हैं।



















