ऋषी तिवारी
PM Modi : ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी तेज़ी से बढ़ते संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंतित कर दिया है। 18 दिनों से जारी इस जंग को रोकने के लिए अब वैश्विक कूटनीति की निगाहें भारत और पीएम नरेंद्र मोदी पर टिकी हैं जो कि इस जंग रोकने के संगटमोचन बन सकते है। फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब से लेकर अमेरिकी विशेषज्ञ और यूएई के पूर्व राजदूत तक, सभी का मानना है कि इस गंभीर संकट का एकमात्र कूटनीतिक समाधान पीएम मोदी के माध्यम से ही संभव है।
फिनलैंड के राष्ट्रपति की अपील
बता दें कि हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग 2026 में शिरकत करने वाले फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने भारत की कूटनीति की खूब सराहना की और उन्होंने पीएम मोदी से आग्रह किया कि वे बढ़ते इस संघर्ष को रोकने के लिए पहल करें। स्टब ने कहा कि हमें युद्धविराम की जरूरत है। मैं सोच रहा हूं कि क्या भारत सच में इसमें शामिल हो सकता है। नई दिल्ली पर दोनों पक्षों का भरोसा है। उन्होंने विदेश मंत्री जयशंकर द्वारा की गई युद्धविराम की अपील का भी जिक्र किया।
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अमेरिका और यूएई में भी उठी भारत के समर्थन में आवाज़
बता दें कि सीजफायर के लिए भारत की भूमिका को लेकर आवाज़ सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं है। अमेरिकी सेना के रिटायर्ड कर्नल और वरिष्ठ रणनीतिकार डगलस मैकग्रेगर ने खुलेआम कहा है कि यदि युद्ध को रोकना है तो अमेरिका को भारत की ओर देखना होगा। मैकग्रेगर ने चेतावनी दी कि अमेरिका के मिसाइल भंडार खत्म हो रहे हैं और तेल की कीमतें 300 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए घातक साबित होगी।
उन्होंने सलाह दी कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पीएम मोदी को फोन करना चाहिए, क्योंकि भारत के इजरायल, ईरान और चीन के साथ संतुलित संबंध हैं। वहीं, यूएई के भारत में पूर्व दूत हुसैन हसन मिर्जा ने भी पीएम मोदी को इजरायल और ईरान के बीच ‘सबसे उपयुक्त मध्यस्थ’ बताया। उनका मानना था कि पीएम मोदी का नेतन्याहू और ईरानी नेताओं को किया गया एक फोन कॉल ही युद्ध को रोक सकता है।
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चीन के मुकाबले भारत क्यों है बेहतर विकल्प?
मध्यस्थता के लिए चीन ने भी दिलचस्पी दिखाई है, लेकिन दुनियाभर के विशेषज्ञ बीजिंग पर ईरान के प्रति पक्षपाती होने का आरोप लगा रहे हैं। इसके विपरीत, भारत ने आजादी के बाद से गुटनिरपेक्ष रहते हुए कभी भी किसी एक पक्ष का खुलकर समर्थन नहीं किया है। भारत का इजरायल के साथ रक्षा साझेदारी और ईरान के साथ तेल व्यापार व सांस्कृतिक संबंधों का संतुलित रुख उसे दोनों देशों का भरोसेमंद बनाता है।
पीएम मोदी की सक्रिय कूटनीति
बता दें कि मध्य पूर्व में बदलती स्थिति के बीच पीएम मोदी पहले ही सक्रिय हो चुके हैं। 28 फरवरी को शुरू हुए इस संघर्ष के बाद उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू और ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेशकियन से बातचीत की है। दोनों नेताओं को उन्होंने शांति और कूटनीति का संदेश दिया है।
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत संघर्ष को जल्द समाप्त करने के पक्ष में है और बातचीत ही एकमात्र रास्ता है। जबकि ईरान ने तेल की कीमतों को 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचाने की धमकी दी है, वहीं दुनिया को उम्मीद है कि भारत का संतुलित और निष्पक्ष रुख इस जंग को खत्म करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।



















