ऋषी तिवारी
देश की राजधानी दिल्ली के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर लागू किए गए ‘एंट्री और ड्रॉप-ऑफ चार्ज’ ने आम जनता के लिए एक बड़ा सिरदर्द बनकर उभरा है। यात्रियों और उनके परिजनों को स्टेशन परिसर में सिर्फ 5 मिनट के लिए किसी को छोड़ने पर भी शुल्क अदा करना पड़ रहा है, जिसे लेकर सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक नाराजगी तेजी से फैल रही है। लोगों का कहना है कि यह सिर्फ पैसा वसूलने का तरीका है, जो कि एक तरह से ‘दोहरा कराधान’ है।
वाहन स्टेशन पर महज 2-5 मिनट के लिए रुकने का शुल्क
बता दें कि मामला दिल्ली के नई दिल्ली, आनंद विहार और हजरत निजामुद्दीन जैसे बड़े रेलवे स्टेशनों का है, जहाँ ट्रैफिक को नियंत्रित करने के नाम पर एंट्री गेट्स पर शुल्क लगाया जा रहा है। जमीनी हकीकत यह है कि इन स्टेशनों पर ‘फ्री ड्रॉप-ऑफ जोन’ या तो बेहद सीमित हैं या फिर उन्हें इतनी बेतरतीब तरीके से लागू किया गया है कि आम वाहन चालकों को गेट पार करते ही शुल्क देना पड़ता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब कोई वाहन स्टेशन पर महज 2-5 मिनट के लिए रुकता है, तो क्या उससे पार्किंग शुल्क या एंट्री चार्ज लेना उचित है?
‘दोहरा कराधान’ का आरोप
बता दें कि आम जनता इस व्यवस्था से काफी नाराज है। स्थानीय निवासियों का तर्क है कि वे अपने वाहनों पर पहले से ही रोड टैक्स और अन्य शुल्क चुका रहे हैं। स्टेशन परिसर में प्रवेश के लिए अलग से शुल्क लेना न केवल अनुचित है, बल्कि यह ‘दोहरा कराधान’ (Double Taxation) भी है। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर काफी चर्चा हो रही है और लोगों ने प्रशासन से इस ‘जबरन वसूली’ को रोकने की मांग की है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।
यह भी पढ़ें : पिता बनने के बाद रणदीप हुड्डा का दमदार कमबैक! फिल्म में हरियाणवी जाट में दिखेंगे

जनता की मांग- हवाई अड्डों की तर्ज पर मिले राहत
बता दें कि इस मुद्दे पर आम जनता की एक स्पष्ट मांग सामने आ रही है। लोगों का कहना है कि अगर एयरपोर्ट्स पर कुछ निश्चित समय (जैसे 10-15 मिनट) के लिए मुफ्त ड्रॉप-ऑफ की सुविधा दी जाती है, तो रेलवे स्टेशनों पर भी इसे लागू किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि ट्रेन से यात्रा करने वाले आम यात्री हवाई जहाज से यात्रा करने वालों से ज्यादा होते हैं और उन्हें छोड़ने-लाने के लिए थोड़े समय की मुफ्त सुविधा उनका अधिकार होनी चाहिए।
प्रशासन का बचाव और विशेषज्ञों की राय
बता दें कि इस बढ़ते आक्रोश के बीच केंद्र या स्थानीय प्रशासन की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है। हालांकि, रेलवे अधिकारियों ने इस व्यवस्था का बचाव करते हुए कहा है कि यह कदम स्टेशनों पर भीड़ नियंत्रण और ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए जरूरी है, ताकि वाहन घंटों तक वहां पार्क न रहें।
वहीं, शहरी परिवहन विशेषज्ञों ने इस मसले पर संतुलित राय दी है। उनका मानना है कि ट्रैफिक कंट्रोल जरूरी है, लेकिन इसके लिए ड्रॉप-ऑफ ज़ोन को बेहतर तरीके से डिज़ाइन करने की जरूरत है। यदि यात्रियों को सीमित समय के लिए मुफ्त एंट्री दी जाए, तो इससे जनता को राहत मिलेगी और ट्रैफिक का प्रबंधन भी बेहतर होगा।





















