BJP Womens Wing: देश में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर राजनीतिक तपिश बढ़ती दिख रही है। अजा (शनिवार) भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) महिला मोर्चा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आवास के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और इस दौरान हजारों की संख्या में मौजूद भाजपा की महिला कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और कांग्रेस की नीतियों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
बड़े नेताओं ने किया प्रदर्शन का नेतृत्व
बता दें कि इस धरना-प्रदर्शन में भाजपा की तमाम आला नेतृत्व शामिल हुई। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, भाजपा सांसद और दिग्गज अभिनेत्री हेमा मालिनी, सांसद कमलजीट सेहरावत, सांसद बांसुरी स्वराज और दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे। प्रदर्शनकारी महिलाओं के हाथों में तख्तियां देखी गईं, जिन पर विपक्ष के खिलाफ नारे लिखे थे।
हेमा मालिनी ने कहा- ‘महिलाएं हैंं नाराज’
बता दें कि भाजपा सांसद हेमा मालिनी ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि आज यहां दिल्ली की समस्त नारी शक्ति एकत्रित हुई है। हमारा यह विरोध उस घटनाक्रम के खिलाफ है, जहां कल लोकसभा में विपक्ष के लोगों ने महिला आरक्षण विधेयक को पारित नहीं होने दिया। देश की सभी महिलाएं इस बात से बेहद नाराज हैं, इसलिए हम यहां विरोध प्रदर्शन कर रही हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा ‘शर्मनाक’
वहीं, केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने विपक्षी गठबंधन (INDIA) पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष की मंशा ही इस विधेयक को पास नहीं होने देने की थी। उन्होंने पूरे घटनाक्रम को ‘शर्मनाक और दुखद’ करार दिया और कहा कि ऐसा करके विपक्ष ने देश की महिलाओं का मनोबल तोड़ने का काम किया है।
सचदेवा का हमला- ‘कांग्रेस में महिला सशक्तिकरण प्राथमिकता नहीं’
भाजपा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने एक बार फिर अपना ‘विकास विरोधी चरित्र’ प्रदर्शित किया है। उन्होंने कहा, “यह बिल महज एक कागजी प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देकर उन्हें निर्णय लेने की मुख्यधारा में लाने का ऐतिहासिक कदम था। कांग्रेस की प्राथमिकता में कभी महिला सशक्तिकरण नहीं रहा।”
आंकड़े क्या कहते हैं?
बता दें कि यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब भारतीय संसद में महिलाओं के लिए अभी कोई आरक्षित सीट नहीं है। वर्तमान में लोकसभा में केवल लगभग 14 प्रतिशत और राज्यसभा में करीब 17 प्रतिशत सदस्य महिलाएं हैं। अगर राज्य विधानसभाओं की बात की जाए तो यह आंकड़ा और भी गिरकर करीब 10 प्रतिशत के आसपास है।
महिला आरक्षण को लेकर इस तरह का जोरदार प्रदर्शन एक बार फिर महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे को देश के मध्य में ले आया है। ऐसा माना जा रहा है कि आने वाले समय में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।



















