संध्या समय न्यूज
Gaurav Gogoi On Om Birla: लोकसभा में कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करके बड़ा राजनीतिक कदम उठाया है। इस मुद्दे पर सदन में बोलते हुए कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत नफरत या राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संसद की गरिमा को बचाने के लिए लाया गया है।
संविधान की रक्षा हर सांसद की जिम्मेदारी: गोगोई
सदन में अपने बयान के दौरान गौरव गोगोई ने कहा, “ओम बिरला जी के साथ मेरे व्यक्तिगत संबंध बहुत अच्छे हैं, लेकिन संसद के नियमों और संविधान की रक्षा करना हर सांसद की प्राथमिक जिम्मेदारी है।” उन्होंने आरोप लगाया कि सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता बनाए रखने में स्पीकर विफल रहे, जिसके चलते विपक्ष को यह कठिन फैसला लेना पड़ा। गोगोई ने पुनः जोर देकर कहा कि विपक्ष स्पीकर पर कोई व्यक्तिगत हमला नहीं कर रहा है, बल्कि लोकतंत्र में जनता के प्रतिनिधियों का विश्वास और संसदीय मर्यादा उनके लिए सर्वोपरि है।
118 विपक्षी सांसदों ने किए हस्ताक्षर
इस अविश्वास प्रस्ताव को औपचारिक रूप से कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने सदन में पेश किया। विपक्ष के 118 सांसदों ने इस प्रस्ताव पर अपने हस्ताक्षर करके समर्थन दिया है। विपक्ष दलों का आरोप है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता (लीडर ऑफ ओपोजिशन) राहुल गांधी को सदन में अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया, जिससे विपक्ष में गहरा असंतोष फैल गया और उन्हें इस कदम के लिए बाध्य होना पड़ा।
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स्पीकर की अध्यक्षता को लेकर उठा बवाल
प्रस्ताव पेश होने के बाद सदन में संवैधानिक बाध्यताओं को लेकर भी बहस छिड़ गई। जब स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव विचाराधीन हो, तो अध्यक्षता कौन करेगा, यह सवाल उठ खड़ा हुआ। उस समय सदन की कार्यवाही पैनल स्पीकर जगदंबिका पाल की अध्यक्षता में चल रही थी। इस दौरान असदुद्दीन ओवैसी और सौगत रॉय ने ‘पॉइंट ऑफ ऑर्डर’ उठाते हुए आपत्ति जताई कि जब स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव विचाराधीन है, तो स्पीकर या उनके द्वारा नामित कोई भी व्यक्ति सदन की कार्यवाही नहीं चलानी चाहिए।
इस पर जगदंबिका पाल ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्पष्ट किया कि स्पीकर का पद खाली नहीं हुआ है, इसलिए चेयर को कार्यवाही चलाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि स्पीकर ओम बिरला ने स्वयं ही इस बहस के दौरान सदन की अध्यक्षता न करने का फैसला लिया है।

























