Mumbai News: मीरा-भाईंदर नगर निगम (मनपा) में सामने आए एक चौंकाने वाले मामले ने प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। सूचना के अधिकार (RTI) के जरिए हुए खुलासे में यह सामने आया है कि फर्जी संरचनात्मक लेखापरीक्षा (स्ट्रक्चरल ऑडिट) रिपोर्ट देने वाले इंजीनियर के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उसे सेवा विस्तार दे दिया गया।
क्या है पूरा मामला?
मनपा के पैनल में शामिल संरचनात्मक लेखा परीक्षक मधु मिश्रा ने मीरा रोड स्थित एक बार और होटल के निर्माण को लेकर गलत रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। रिपोर्ट में इमारत को भूतल सहित दो मंजिला बताया गया, जबकि वास्तविकता में ऐसी मंजिलें मौजूद ही नहीं थीं। इसी आधार पर मरम्मत की अनुमति भी जारी कर दी गई।
गलती मानी, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
प्रशासनिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि रिपोर्ट गलत थी और संबंधित इंजीनियर ने अपनी गलती भी स्वीकार की। इसके बावजूद न तो उनके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई और न ही उन्हें निलंबित किया गया। उल्टा, उन्हें 9 जुलाई 2025 से 8 जुलाई 2028 तक सेवा विस्तार प्रदान कर दिया गया।
अधिकारियों की लापरवाही भी उजागर
मामले में केवल इंजीनियर ही नहीं, बल्कि संबंधित प्रभाग अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। नियमों के अनुसार, ऐसी रिपोर्ट मिलने के बाद स्थल निरीक्षण अनिवार्य होता है, लेकिन अधिकारियों ने बिना जांच किए ही रिपोर्ट के आधार पर अनुमति दे दी।
यह भी पढ़ें : यूपी एसआईआर अपडेट: यूपी की वोटर लिस्ट से करोड़ों नाम गायब
अवैध निर्माण को मिला बढ़ावा
RTI के खुलासे में यह भी सामने आया कि मरम्मत की अनुमति मिलने के बाद उक्त बार और होटल में अतिरिक्त मंजिलों का अवैध निर्माण कर लिया गया। इससे साफ है कि एक गलत रिपोर्ट और प्रशासनिक लापरवाही ने मिलकर अवैध निर्माण को बढ़ावा दिया।
कार्रवाई की मांग तेज
RTI कार्यकर्ता नितिन नाइक ने इस मामले को उजागर करते हुए मनपा प्रशासन को पत्र लिखकर दोषी इंजीनियरों की सेवाएं समाप्त करने और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि पद का दुरुपयोग है।

























