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100+ डेसिबल का असर: कैसे डीजे बन जाता है ‘मूक हत्यारा’

Noise Pollution: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और आम सेहत मानकों के अनुसार, 70 डेसिबल तक की आवाज इंसानों के लिए पूरी तरह सुरक्षित मानी जाती है। (70 डेसिबल का स्तर आमतौर पर एक व्यस्त सड़क या वैक्यूम क्लीनर चलाने के बराबर होता है)। इस सीमा के अंदर रहने पर कानों या दिमाग को कोई नुकसान नहीं पहुंचता।

शोर प्रदूषण से जानवरों की संवेदनशीलता उजागर

HIGHLIGHTS

  • शादी में डीजे बना ‘साइलेंट किलर’,
  • डीजे की आवाज ने ली 140 मुर्गियों की जान
  • तेज डीजे साउंड से पक्षियों की मौत ने चौंकाया
  • शोर प्रदूषण का खतरनाक चेहरा
  • डीजे से मुर्गियों की सामूहिक मौत

Noise Pollution: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने शोर प्रदूषण (Noise Pollution) की गंभीरता को एक बार फिर से चेतावनी दी है। यहां एक शादी समारोह में बज रहे डीजे (DJ) की बेहद तेज आवाज से 140 मुर्गियों की मौत हो गई। यह घटना साबित करती है कि मनोरंजन के नाम पर बजने वाला अति-शोर सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि जानवरों और पक्षियों के लिए भी ‘साइलेंट किलर’ बन सकता है।

आइए विज्ञान और स्वास्थ्य मानकों के आधार पर समझते हैं कि डीजे की कितनी तेज आवाज इंसान और पक्षी सहन कर सकते हैं, और कितने डेसिबल (DB) पर यह आवाज जानलेवा साबित हो सकती है:

70 डेसिबल: इंसान के लिए ‘सुरक्षित सीमा’

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और आम सेहत मानकों के अनुसार, 70 डेसिबल तक की आवाज इंसानों के लिए पूरी तरह सुरक्षित मानी जाती है। (70 डेसिबल का स्तर आमतौर पर एक व्यस्त सड़क या वैक्यूम क्लीनर चलाने के बराबर होता है)। इस सीमा के अंदर रहने पर कानों या दिमाग को कोई नुकसान नहीं पहुंचता।

85 डेसिबल: कानों की सुनने की शक्ति का दुश्मन

जैसे ही आवाज का स्तर 85 डेसिबल से ऊपर चला जाता है, यह खतरनाक हो जाता है। लगातार या बार-बार इस स्तर की आवाज के संपर्क में आने से कानों के अंदरूनी हिस्से (कॉक्लिया) को नुकसान पहुंचता है। इसका सबसे आम लक्षण है कानों में बजने वाली ‘सीटी’ (Tinnitus) और धीरे-धीरे सुनने की क्षमता का कमजोर होना।

100 डेसिबल से ज्यादा: डीजे का असली खतरा

आजकल के ज्यादातर डीजे सिस्टम और इवेंट स्पीकर 100 डेसिबल से भी ज्यादा की आवाज पर बजते हैं। यह स्तर इंसान के शरीर पर तनाव बनाने लगता है। इसमें रहने वाले लोगों को अचानक से घबराहट, सिर दर्द, ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) में भारी उछाल और गंभीर मानसिक थकान महसूस होने लगती है।

150 डेसिबल: ‘मौत’ का स्तर

यह वह जोन है जहां आवाज सीधे जान ले सकती है। 150 डेसिबल (जो आमतौर पर रॉकेट लॉन्च होने या करीब से आतिशबाजी के धमाके के बराबर होता है) की आवाज इंसान के दिल की धड़कन को अचानक से बेहद तेज कर सकती है। जिन लोगों को पहले से दिल की बीमारी है, उनके लिए यह सीधे दिल का दौरा पड़ने का कारण बन सकता है। सुल्तानपुर में मुर्गियों की मौत का कारण भी इसी ‘शॉक वेव’ को माना जा रहा है।

पक्षी और जानवर इंसानों से क्यों ज्यादा संवेदनशील होते हैं?

सुल्तानपुर में मुर्गियों की मौत ने यह सवाल उठाया कि आखिर इंसान बच गए तो जानवर क्यों मर गए? इसका जवाब उनके शारीरिक ढांचे में छिपा है।

  • संवेदनशील कान: पक्षियों और जानवरों के सुनने के सिस्टम का तंत्र इंसानों की तुलना में कहीं अधिक संवेदनशील और तेज होता है।
  • शॉक से बिगड़ा संतुलन: अचानक 100+ डेसिबल की आवाज आने पर पक्षियों को ऐसा लगता है जैसे कोई बम फट गया हो। इस तेज आवाज के ‘प्रेशर वेव’ (Sound Pressure) से उनका शारीरिक और तंत्रिका संतुलन बुरी तरह बिगड़ जाता है।
  • कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा): छोटे पक्षियों और जानवरों (जैसे मुर्गियां) का दिल इस अचानक आने वाले भयानक शॉक को बर्दाश्त नहीं कर पाता। ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ने से उनके दिल पर जोर पड़ता है और हार्ट अटैक (Cardiac Arrest) से मौत हो जाती है। इसके अलावा डर के मारे इनमें भीड़ में एक-दूसरे पर गिरकर कुचले जाने (Stampede) की भी संभावना बढ़ जाती है।

इंसानों को भी नहीं मिलती छूट

सिर्फ पक्षियों को ही नहीं, लगातार तेज आवाज के संपर्क में रहने वाले इंसानों में भी यह शोर धीरे-धीरे जहर का काम करता है।

  • नींद की क्वालिटी पूरी तरह खराब हो जाती है।
  • ध्यान लगाने की क्षमता (Concentration) खत्म होने लगती है।
  • भावनात्मक स्थिरता समाप्त होने लगती है, यानी व्यक्ति बेवजह चिड़चिड़ा हो जाता है और अक्सर गुस्से का शिकार होता है।

Rishi Tiwari

ऋषी तिवारी (Rishi Tiwari) वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली एनसीआर में एपीएनएस न्यूज ऐजेंसी लंबे समय तक सेवाएं देने के पश्चात सेवानिवृत्त हुए। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ अपनी नई पत्रकारिता पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षो से जुड़े रहकर निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं।

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