“चीन से यूरोप और फिर भारत तक, आइसक्रीम का दिलचस्प इतिहास”

Ice Cream History: साल 1843 में इसके इतिहास का सबसे बड़ा मोड़ आया, जब नैन्सी जॉनसन ने हाथ से चलने वाली आइसक्रीम मशीन का आविष्कार किया और उसे पेटेंट करवाया। इसके बाद आइसक्रीम बनाने का तरीका पूरी तरह बदल गया।

"आइसक्रीम: एक मीठी डेजर्ट की 3000 साल पुरानी यात्रा"

HIGHLIGHTS

  • कैसे एक प्राचीन चीनी डेजर्ट बनी दुनिया की पसंदीदा मिठाई"
  • कैसे एक फ्रोजन डेजर्ट ने पूरी दुनिया को जीता"
  • "यूरोप में आइसक्रीम का आगमन: मार्को पोलो का योगदान"
  • "आइसक्रीम और कुल्फी: एक इतिहास, दो संस्कृतियां"
  • "आधुनिक आइसक्रीम का भारत में प्रवेश: कब और कैसे?"

Ice Cream History: गर्मी हो या सर्दी, मीठे के शौकीनों के लिए आइसक्रीम से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। भले ही आज के दौर की फैंसी डेजर्ट लगती हो, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इसका आविष्कार कैसे हुआ? आइसक्रीम की कहानी किसी एक व्यक्ति की नहीं है, बल्कि यह हजारों साल पुरानी और दुनिया की अलग-अलग संस्कृतियों से जुड़ी एक बेहद दिलचस्प कहानी है।

प्राचीन चीन और ईरान में शुरू हुआ था ‘फ्रोजन’ सफर

आइसक्रीम के सबसे पुराने रूप के सबूत इतिहासकारों ने प्राचीन चीन में लगभग 3000 ईसा पूर्व के मिले हैं। उस दौर में चीन के लोग दूध और चावल को मिलाकर प्राकृतिक बर्फ में जमाया करते थे। हालांकि, यह आज की मलाईदार आइसक्रीम जैसी नहीं थी, लेकिन इसने फ्रोजन डेजर्ट की नींव जरूर रखी।

इसके करीब 2500 साल बाद, लगभग 500 ईसा पूर्व में ईरान (पर्शिया) ने इसे एक नया रूप दिया। ईरान में लोग बर्फ को ‘याखचाल’ नाम की खास जगहों में जमा करके रखते थे। इस बर्फ को अंगूर के रस, केसर और गुलाब जल के साथ मिलाकर एक डेजर्ट तैयार किया जाता था, जो आज के मशहूर ‘फालूदे’ से काफी मिलता-जुलता था।

यूरोप तक कैसे पहुंची रेसिपी?

यूरोप में आइसक्रीम की शुरुआत का श्रेय मशहूर यात्री मार्को पोलो को जाता है। माना जाता है कि 13वीं सदी में उन्होंने चीन से इटली तक आइसक्रीम बनाने की शुरुआती विधि को पहुंचाया। इटली से यह विचार पूरे यूरोप में फैल गया।

साल 1843 में इसके इतिहास का सबसे बड़ा मोड़ आया, जब नैन्सी जॉनसन ने हाथ से चलने वाली आइसक्रीम मशीन का आविष्कार किया और उसे पेटेंट करवाया। इसके बाद आइसक्रीम बनाने का तरीका पूरी तरह बदल गया।

भारत में आइसक्रीम से पहले थी ‘कुल्फी’

जब यूरोप में आइसक्रीम का विकास हो रहा था, तब भारत के पास अपना एक अलग और खास फ्रोजन डेजर्ट मौजूद था – ‘कुल्फी’। 16वीं सदी में मुगलकाल के दौरान कुल्फी काफी लोकप्रिय हुई। सम्राट अकबर के शासनकाल में हिंदू कुश पहाड़ों से बर्फ मंगवाई जाती थी। इस बर्फ का इस्तेमाल सूखे मेवों और मसालों से बने गाढ़े दूध (रबड़ी) को जमाने के लिए किया जाता था।

भारत में ‘आधुनिक आइसक्रीम’ का दौर

आधुनिक और व्यावसायिक आइसक्रीम भारत में काफी बाद में, 1940 के दशक में दस्तक दी। सतीश सोना ने ‘क्वालिटी’ ब्रांड की शुरुआत की, जो देश में व्यावसायिक तौर पर बनाई जाने वाली आइसक्रीम की पहली कड़ी मानी जाती है। क्वालिटी ब्रांड ने वनीला और स्ट्रॉबेरी जैसे पश्चिमी फ्लेवर्स को भारतीयों को दिए, जो जल्द ही काफी मशहूर हो गए।

इसके बाद रघुनाथन कामथ ने इस उद्योग में एक क्रांति ला दी। उन्होंने आर्टिफिशियल फ्लेवर्स को अलविदा कहा और असली फलों के फ्लेवर्स पर ध्यान केंद्रित किया। उनका ब्रांड ‘नेचुरल आइसक्रीम’ ताजी सामग्री का इस्तेमाल करने के लिए आज भी देशभर में मशहूर है।

तो अगली बार जब आप आइसक्रीम खाएं, तो याद रखिए कि आपके हाथ में मौजूद यह मीठी डेजर्ट हजारों सालों के इतिहास और दुनिया भर की कई संस्कृतियों का एक खूबसूरत नतीजा है!

Rishi Tiwari

ऋषि तिवारी (Rishi Tiwari) ने वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली और एनसीआर में एपीएनएस न्यूज एजेंसी में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद यहां से रुख कर लिया। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ नई पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षों से निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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