बिहार में खनन माफिया पर गाज, 78 बालू कंपनियों का टेंडर पर लगा बैन

बिहार में नीतीश सरकार ने खनन माफिया सख्त रुख (फाइल फोटो)

संख्या समय न्यूज


Bihar News: बिहार में नीतीश सरकार ने खनन माफिया और बालू घाटों की नीलामी में हो रही गड़बड़ियों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई का ऐलान किया है। राज्य सरकार ने उन 78 बालू कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है, जिन्होंने पिछले वर्ष की तुलना में तीन से चार गुना अधिक बोली लगाकर घाटों को तो हथिया लिया, लेकिन बाद में ‘मुनाफा नहीं होने’ का बहाना बनाकर उन्हें बीच में ही सरेंडर कर दिया था।

क्या है सरकार की कार्रवाई?

खान एवं भूतत्व विभाग के मंत्री एवं उप-मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने गुरुवार (12 मार्च, 2026) को विकास भवन सचिवालय में आयोजित प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाली इन करीब 78 कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अब इन कंपनियों के निदेशकों या मालिकों को किसी भी नई टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

क्यों भाग रहे थे ठेकेदार?

विजय कुमार सिन्हा ने इस पीछे कारण का खुलासा करते हुए कहा कि पिछले साल के मुकाबले इस साल बोली आकाश छू रही थीं। इन लोगों ने शुरू में यह अंदाजा लगाया था कि वे अवैध खनन करके बालू घाटों से भरपूर मुनाफा कमा लेंगे। हालांकि, विभाग द्वारा अवैध खनन पर लगाम लगाने और सख्ती बरतने के चलते उनके ये मंसूबे पूरे नहीं हो सके। जब अवैध रास्तों से मुनाफा नहीं हो पाया, तो कुछ स्थानों पर बालू माफिया की मिलीभगत से इन्होंने घाटों को बीच में ही छोड़ दिया। अब सरकार ने ऐसे घाटों को जिलों में डीएम की अध्यक्षता वाली जिला टास्क फोर्स की समीक्षा के बाद दोबारा टेंडर कराने का निर्देश दिया है।

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71 ‘बिहारी योद्धा’ को मिला सम्मान

इस मौके पर उप-मुख्यमंत्री ने उन 71 ‘बिहारी योद्धाओं’ को भी पुरस्कृत किया, जिन्होंने अवैध खनन और खनिज वाहनों में ओवरलोडिंग की सूचना देकर प्रशासन को कार्रवाई में मदद की। इन सूचनादाताओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उनके नाम और पते गुप्त रखे गए हैं।

ट्रांजिट चालान होगा अनिवार्य

बाहरी राज्यों से आने वाले खनिज लदे वाहनों की निगरानी के लिए भी सरकार ने नए नियम लागू किए हैं। मंत्री ने कहा कि अब बाहर के राज्यों से प्रवेश करने वाले वाहनों के लिए ट्रांजिट चालान (टीपी) लेना अनिवार्य होगा, जिसके लिए कैबिनेट की मंजूरी पहले ही मिल चुकी है। इन वाहनों पर 85 रुपये प्रति घन फीट की दर से टीपी चार्ज लिया जाएगा। सीमावर्ती जिलों के प्रवेश मार्गों पर सीसीटीवी कैमरों के जरिए सशक्त मॉनीटरिंग की जाएगी, ताकि अवैध खनन पर पूर्ण रोक लगाई जा सके।

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