Ashok Kharat Case:महाराष्ट्र के नासिक जिले से सामने आए ‘सेल्फ-स्टाइल्ड गॉडमैन’ अशोक खरात के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसके गंभीर पहलू सामने आ रहे हैं। रेप के आरोप में गिरफ्तार खरात की संपत्ति और सरकार से उसके संबंधों का खुलासा हुआ है, जिसने प्रशासन और राजनीति के बीच के रिश्तों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
2018 में मिला था सरकारी फंड
आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, खरात से जुड़े ‘श्री इशान्येश्वर देवस्थान ट्रस्ट’ को साल 2018 में महाराष्ट्र सरकार से 1.05 करोड़ रुपये का फंड मिला था। तत्कालीन भाजपा सरकार में पर्यटन और सांस्कृतिक कार्य मंत्री जयकुमार रावल के नेतृत्व वाले विभाग ने 31 मार्च 2018 को ‘क्षेत्रीय पर्यटन विकास योजना’ के तहत यह मंजूरी दी थी।
इस फंड का उपयोग मंदिर परिसर के विकास के लिए किया जाना था, जिसमें हॉल निर्माण, पेविंग ब्लॉक, शौचालय, पार्किंग और बिजली व्यवस्था शामिल थी। कुल स्वीकृत राशि में से 25 लाख रुपये 2017-18 वित्तीय वर्ष में PWD के जरिए जारी भी किए गए थे। अधिकारियों का कहना है कि उस समय खरात के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था, इसलिए सामान्य प्रक्रिया के तहत फंड दिया गया था।
SIT जांच में हुए बड़े खुलासे
18 मार्च को एक महिला की शिकायत के बाद खरात की गिरफ्तारी के बाद से मामला गंभीर मोड़ पर है। मामले की जांच के लिए गठित SIT, जिसका नेतृत्व आईपीएस अधिकारी तेजस्वी सतपुते कर रही हैं, ने कई चौंकाने वाले तथ्य सामने लाए हैं:
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- अश्लील वीडियो: छापे में पुलिस को खरात से जुड़े करीब 100 आपत्तिजनक वीडियो मिले हैं। साइबर पुलिस इन वीडियो की जांच कर रही है कि क्या इनका उपयोग ब्लैकमेल करने के लिए किया गया था।
- विशाल संपत्ति: खरात के पास करीब 1500 करोड़ रुपये की संपत्ति होने की बात सामने आई है। अब आयकर विभाग भी उसकी संपत्ति और वित्तीय लेनदेन की जांच में जुट गया है।
- राजनीतिक संपर्क: खरात के कई बड़े राजनीतिक नेताओं से संबंध थे, जिससे उसके प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।
मामले का वर्तमान स्थिति
पुलिस ने अब तक खरात के खिलाफ 6 आपराधिक मामले दर्ज किए हैं, जिसमें एक गर्भवती महिला भी पीड़िता है। महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते ने पुष्टि की है कि मामले की गहराई को देखते हुए कड़ी जांच की जा रही है। यह मामला अब सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं रह गया है, बल्कि इसमें सरकारी फंड के दुरुपयोग और आर्थिक अनियमितताओं को लेकर भी जांच तेज हो गई है।

























