रत्न भंडार की चाबी का राज और खजाने का अंदाजा… जानें 12वीं सदी की अनोखी कहानी।

जगन्नाथ मंदिर में खजाने की इन्वेंट्री जारी

The Unique Story of the Lord Jagannath Temple: देश के चार धाम में शुमार श्री जगन्नाथ मंदिर का महत्वपूर्ण और रहस्यमयी खजाना ‘रत्न भंडार’ लगभग 48 साल बाद बुधवार को खोला गया। मंदिर प्रशासन ने शुभ मुहूर्त में इस खजाने के दस्तावेजीकरण (डॉक्यूमेंटेशन) का काम शुरू कर दिया है, जिससे यह उम्मीद जगी है कि जल्द ही यह पता चल जाएगा कि भगवान जगन्नाथ की इस दिव्य संपदा में वास्तव में कितना सोना, चांदी और कीमती रत्न मौजूद हैं।

क्या है खजाने का अनुमान?

रत्न भंडार को लेकर सबसे बड़ी जिज्ञासा यही है कि अंदर कितना खजाना है। पिछली बार जब 1978 में इसे खोला गया था, तो गिनती के अनुसार यहां 454 सोने की वस्तुएं (लगभग 128.38 किलो) और 293 चांदी की वस्तुएं (221.53 किलो) मिली थीं। वहीं, साल 2018 में ओडिशा विधानसभा में पेश जानकारी के मुताबिक, रत्न भंडार में 12,831 भरी (लगभग 150 किलो) से अधिक सोने के आभूषण और 22,153 भरी चांदी के बर्तन व अन्य सामान हैं। इस बार जब खजाना खुल रहा है, तो दुनिया भर की नजरें इस आधिकारिक आंकड़े को लेकर हैं।

रत्न भंडार का इतिहास और मान्यता

माना जाता है कि रत्न भंडार 12वीं सदी में मंदिर के निर्माण के समय का है। किंवदंती है कि यह राजा इंद्रद्युम्न का शाही खजाना था, जिसे उन्होंने जनकल्याण के लिए भगवान जगन्नाथ को समर्पित कर दिया था। तब से माता लक्ष्मी के वरदान के कारण यह भंडार कभी खाली नहीं होता है। रत्न भंडार के दो हिस्से हैं- ‘भीतर भंडार’ और ‘बाहरी भंडार’। बाहरी भंडार में भगवान के सोने के मुकुट और तीन भारी हार (प्रत्येक 120 तोला) जैसे आभूषण हैं, जबकि आंतरिक भंडार में सोने, हीरे, मूंगा और मोतियों से बनी कई प्लेटें और 74 से अधिक सोने के आभूषण सुरक्षित हैं।

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2018 का हड़कंप: जब खो गई थी चाबी

इस बार रत्न भंडार को खोलने की प्रक्रिया पर खासी चर्चा इसलिए भी है, क्योंकि साल 2018 में ओडिशा हाईकोर्ट के आदेश पर इसे खोलने की कोशिश की गई थी, लेकिन तत्कालीन सरकार ने यह कहकर पीछे हटना पड़ा था कि भंडार की चाबी खो गई है। तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने जांच का आदेश दिया था, लेकिन चाबी का राज नहीं खुल पाया था। अब दो साल बाद नए सिरे से इस प्रक्रिया को शुरू किया गया है।

भगवान लोकनाथ करते हैं रक्षा

रत्न भंडार को लेकर धार्मिक मान्यताएं भी बहुत गहरी हैं। माना जाता है कि भगवान शिव ‘लोकनाथ’ के रूप में इस खजाने के रक्षक हैं। जगन्नाथ मंदिर से 2 किलोमीटर दूर स्थित लोकनाथ मंदिर की अनुमति के बिना रत्न भंडार नहीं खोला जा सकता। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, दो दिव्य नाग ‘पद्म’ और ‘महापद्म’ इस खजाने की सुरक्षा करते हैं।
इतिहास में 15 बार इस खजाने को लूटने की कोशिश हो चुकी है, लेकिन हर बार नाकामयाबी ही मिली है। अब जबकि 48 साल बाद आधिकारिक गिनती और दस्तावेजीकरण शुरू हो चुका है, तो यह माना जा रहा है कि इससे न सिर्फ भगवान की दिव्य संपदा का सही आंकलन होगा, बल्कि इतिहास के कई छिपे हुए रहस्य भी सामने आएंगे।

Rishi Tiwari

ऋषी तिवारी (Rishi Tiwari) वर्ष 2011 में मुंबई से पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और मुंबई से प्रकाशित मुंबई मित्र जैसे समाचारपत्रों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद दिल्ली एनसीआर में एपीएनएस न्यूज ऐजेंसी लंबे समय तक सेवाएं देने के पश्चात सेवानिवृत्त हुए। वर्ष 2018 में इन्होंने संध्या समय न्यूज के साथ अपनी नई पत्रकारिता पारी की शुरुआत की। पिछले कई वर्षो से से जुड़े रहकर निष्पक्ष, प्रभावी और जनसरोकारों पर आधारित पत्रकारिता को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं।

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