US-Iran War: रान पर अमेरिकी हमले को लेकर अब तक दुनिया को समझाया जा रहा था कि इसके पीछे तेहरान का परमाणु बम बनाने का खतरा है, लेकिन अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इस युद्ध की ‘असली वजह’ सामने रख दी है। ट्रंप की नजर सीधा ईरान के आर्थिक खजाने पर है। एक तरह से यह युद्ध किसी बिजनेस मॉडल से कम नहीं लग रहा है।
ट्रंप ने ब्रिटिश अखबार ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ को दिए एक चौंकाने वाले इंटरव्यू में खुलकर कबूल किया है कि उन्हें ईरान का तेल और संवर्धित यूरेनियम चाहिए, साथ ही उन्हें होर्मुज जलडमरू का पूरा कंट्रोल हासिल करना है।
“मुझे ईरान का तेल पसंद है”
बता दें कि एक इंटरव्यू में ट्रंप ने बेहद बेफिक्र अंदाज में कहा कि ईरान का तेल मेरी सबसे पसंदीदा चीज है।” उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान ने उन्हें तोहफे में 20 तेल की नावें दी हैं। हालांकि, ईरान ने तुरंत ट्रंप के इस दावे को बेबुनियाद बताकर खारिज कर दिया है।
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ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि अमेरिका ईरान के सबसे अहम तेल निर्यात केंद्र ‘खर्ग द्वीप’ (Kharg Island) पर कब्जा कर सकता है। उन्होंने दावा किया कि इस द्वीप की सुरक्षा ज्यादा खास नहीं है और अमेरिका बहुत आसानी से इसे अपने कब्जे में ले सकता है।
ईरान का करारा जवाब- “एक बूंद भी नहीं देंगे”
ट्रंप की इस ‘दादागिरी’ भरी बातों का ईरान ने सख्त जवाब दिया है। ईरान ने साफ कहा कि वह अपनी जमीन से तेल की एक बूंद भी अमेरिका को नहीं लेने देगा। खर्ग द्वीप पर कब्जे की अमेरिकी धमकी पर ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर कोई भी अमेरिकी सैनिक ईरान की जमीन पर कदम रखने की कोशिश करता है, तो उसे नर्क के दर्शन कराए जाएंगे।
आखिर ‘खर्ग द्वीप’ इतना खास क्यों है?
ट्रंप के सोते-जागते खर्ग द्वीप के ख्वाब देखने की वजह है इसकी रणनीतिक और आर्थिक अहमियत। यह द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था की धड़कन माना जाता है। यहां क्यों खास है, आइए समझते हैं:
- 90% तेल निर्यात: ईरान का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल इसी द्वीप से दुनिया भर में एक्सपोर्ट होता है।
बड़े ऑयल टैंकर्स: दुनिया भर में जाने वाले सुपर-टैंकर्स यहीं से तेल लेकर जाते हैं। - मेगा स्टोरेज हब: खर्ग में बेहद बड़े स्टोरेज टैंक और लोडिंग की सुविधाएं मौजूद हैं। यह तेल को जमा करने और जहाजों में भरने का मुख्य केंद्र है।
- समुद्री रास्ते पर कब्जा: यह द्वीप फारस की खाड़ी में स्थित है, जो दुनिया का सबसे अहम तेल रूट है।
- ईरान को बर्बादी का खतरा: सीधे शब्दों में कहें तो, अगर अमेरिका के हाथ खर्ग चला गया, तो ईरान का तेल निर्यात लगभग ठप हो जाएगा। ईरान की सरकार की कमाई, सैन्य ढांचा और बुनियादी सेवाएं एक झटके में बर्बाद हो जाएंगी।
यूरेनियम का भी है खेल
ट्रंप ने अपने इंटरव्यू में ईरान के संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को लेकर भी ललकार है। उनका दावा है कि ईरान के पास 450 किलोग्राम 60 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम है, जिसे आसानी से 90 प्रतिशत तक पहुंचाकर परमाणु हथियार बनाया जा सकता है।
हालांकि, ट्रंप अब तक इस दावे का कोई ठोस सबूत दुनिया के सामने नहीं रख पाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही अमेरिका ने ईरान के यूरेनियम पर कब्जा करने की कोशिश की जाए, लेकिन उसे अमेरिका तक ले जाना बेहद मुश्किल और जोखिम भरा काम होगा।

























