संध्या समय न्यूज
महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की विमान दुर्घटना में हुई मौत को लेकर राजनीतिक उबाल तेज हो गया है। मुंबई के मरीन ड्राइव पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराने के बाद, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने अब बारामती में मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने इस हादसे को ‘साजिश’ करार देते हुए बारामती पुलिस स्टेशन पहुंचकर भारी हंगामा किया और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) तथा प्राइवेट चार्टर्ड कंपनी VSR Ventures के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज करने की मांग उठाई है।
बारामती थाने में भारी हंगामा
रोहित पवार अपने बड़े समर्थकों के साथ बारामती पुलिस स्टेशन पहुंचे, जहां उनके साथ युगेंद्र पवार और राजेंद्र पवार भी मौजूद थे। थाने के बाहर और भीतर समर्थकों की भारी भीड़ के कारण हंगामे जैसी स्थिति बन गई। पुलिस अधिकारियों द्वारा कानूनी प्रक्रिया का हवाला देने के बावजूद, रोहित पवार ने साफ कर दिया कि वे केवल शिकायत आवेदन से संतुष्ट नहीं होंगे। उन्होंने पुलिस से मांग की कि इस मामले में ‘गैर-इरादतन हत्या’ या साजिश की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाए। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि वह इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच में जानबूझकर ढिलाई बरत रहा है और दोषियों को बचाने की कोशिश हो रही है।
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DGCA की ‘सुपरफास्ट’ रिपोर्ट पर गंभीर सवाल
रोहित पवार ने अपनी शिकायत में DGCA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 28 जनवरी को जब अजित पवार का पार्थिव शरीर पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल में था, उसी दिन दोपहर 1:36 बजे DGCA ने एक प्रारंभिक रिपोर्ट जारी कर दी। रोहित पवार का दावा है कि इस रिपोर्ट में जल्दबाजी में VSR कंपनी को क्लीन चिट दे दी गई, जबकि कंपनी के ऑडिट में कोई ‘लेवल-1 सुरक्षा कमी’ नहीं पाई गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि बिना किसी फॉरेंसिक जांच के इतनी तेजी से रिपोर्ट कैसे तैयार हो सकती है?
प्रधानमंत्री को पत्र, उड्डयन मंत्री से इस्तीफे की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए रोहित पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भी लिखा है। पत्र में उन्होंने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू और VSR कंपनी के बीच कथित संबंधों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। रोहित पवार ने स्पष्ट कहा है कि जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और DGCA पर किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव को खत्म करने के लिए, जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक मंत्री नायडू को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

























