ऋषी तिवारी
दिल्ली आबकारी नीति मामले में सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले के बाद आप पार्टी ने बड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। आप पार्टी ने कोर्ट के फैसले को ‘ऐतिहासिक’ बताते हुए इसे ‘सच्चाई की जीत और तानाशाही की हार’ करार दिया है। आप ने केंद्र की मोदी सरकार और कांग्रेस पर जमकर हमला बोला है और दावा किया है कि यह मामला पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को जेल भेजने की एक गहरी साजिश थी।
मोदी सरकार और कांग्रेस पर ‘तमाचा’
आप पार्टी ने कहा कि तथाकथित दिल्ली आबकारी घोटाला मामले को खारिज करने वाला यह फैसला मोदी सरकार के मुंह पर करारा तमाचा है। आप पार्टी ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी को खत्म करने के इरादे से बीजेपी के साथ साठगांठ करने वाली कांग्रेस पार्टी के लिए भी यह फैसला झूठा साबित होने वाला है। पार्टी के प्रवक्ताओं ने कहा कि अदालत का 598 पन्नों का फैसला इस मामले को मुकदमे के लायक भी नहीं मानता है। यह पार्टी के उस लगातार स्टैंड को सही साबित करता है कि यह मामला आप पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को जेल भेजने की एक गहरी साजिश थी। अरविंद केजरीवाल और उनके साथियों की ईमानदार छवि को खराब करने की जो हताश कोशिश की गई थी, वह आज नाकाम हो गई है।
‘बेनकाब हुई बीजेपी की गंदी राजनीति’
आप पार्टी ने अपनी प्रतिक्रिया में आगे कहा कि इस ऐतिहासिक फैसले ने मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा की झूठ और राजनीतिक दुश्मनी पर आधारित गंदी राजनीति को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। वे अपने उन राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को खत्म करना चाहते थे जिन्हें मोदी और उनके साथी चुनावों या जनता की अदालत में नहीं हरा सकते थे। आप पार्टी ने केंद्रीय एजेंसियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कोर्ट के फैसले ने पहले से ही दागदार केंद्रीय एजेंसियों की साख को और भारी ठेस पहुंचाई है। ये एजेंसियां अपने राजनीतिक आकाओं की सेवा करने के लिए अपनी पेशेवर ईमानदारी से पूरी तरह समझौता कर चुकी हैं। आबकारी मामले में सीबीआई पर की गई टिप्पणियों से साफ है कि देश की इस प्रमुख जांच एजेंसी को इतना बदनाम करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
कांग्रेस और अधिकारियों पर हमला
आप पार्टी ने कांग्रेस पर भी कोई नहीं सोचा। आप ने कहा कि अदालत के फैसले से मोदी जी की बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस भी पूरी तरह बेनकाब हो गई है। यह कांग्रेस ही थी जिसने काल्पनिक आरोपों के साथ इस मनगढ़ंत मामले की शुरुआत की थी और आम आदमी पार्टी को राजनीतिक रूप से खत्म करने की गुप्त सहमति के तहत इसे बीजेपी को सौंप दिया गया था।
स्पोकन फेस्ट में ‘द मेहता बॉयज़’ को मिला जबरदस्त अपलॉज़
आप पार्टी ने दिल्ली के एलजी वीके सक्सेना और पूर्व मुख्य सचिव नरेश कुमार को भी निशाने पर लिया। पार्टी ने कहा कि फैसले को पढ़ने से यह साफ हो जाता है कि बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के गुर्गे बेहद अक्षम साबित हुए। उन्हें बड़े पैमाने पर झूठ गढ़कर अरविंद केजरीवाल सरकार को अस्थिर करने का काम सौंपा गया था। उनके द्वारा सीबीआई को परोसा गया झूठ अदालत में आरोप पत्र के संज्ञान की सीमा भी पार नहीं कर सका।
‘कोई लाभ नहीं पहुंचाया गया’
आप पार्टी ने अदालत के फैसले का हवाला देते हुए दावा किया कि अदालत ने अपने फैसले में जोर देकर स्पष्ट किया है कि कोई भी आपसी लेन-देन नहीं हुआ था। किसी भी संस्था या व्यक्ति को लाभ पहुंचाने का कोई प्रयास नहीं किया गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल या उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ किसी भी गलत काम से जोड़ने का कोई सबूत नहीं था। पार्टी ने पुनः इस बात पर जोर दिया कि आम आदमी पार्टी ‘कट्टर ईमानदार’ है और यह फैसला उनकी ईमानदारी की पुष्टि करता है।





















