आतिशबाजी पर बैन वाले देशों की लिस्ट, नंबर एक चौंकाएगा

Countries with a ban on firecrackers: पटाखों पर बैन वाले देशों की पूरी लिस्ट! कनाडा, आयरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, चीन, ब्रिटेन और नेपाल में आतिशबाजी पर क्या नियम हैं, कितना है जुर्माना और वायु प्रदूषण, आग व जानवरों के नुकसान की वजह से क्यों लगा है प्रतिबंध?

कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड में बिना लाइसेंस पटाखे फोड़ना है गैरकानूनी

HIGHLIGHTS

  • कनाडा से चीन तक, किन देशों में बैन हैं पटाखे?
  • पटाखों की जन्मभूमि चीन ने भी क्यों बैन किए पटाखे?
  • दुनिया के इन देशों में दिवाली पर नहीं फूटते पटाखे
  • ब्रिटेन में रात 11 बजे बाद पटाखे फोड़ना क्यों अपराध?

Countries with a ban on firecrackers:नरक चतुर्दशी के साथ दिवाली का त्योहारी सीजन शुरू होते ही पटाखों की बिक्री तेज हो जाती है। लेकिन शोर, धुएं और हादसों के बढ़ते खतरे को देखते हुए दुनिया के कई बड़े देशों ने आतिशबाजी पर या तो पूर्ण रोक लगा दी है, या फिर उन्हें कड़े नियमों में बांध रखा है। वायु प्रदूषण, चोटों और जानवरों-पक्षियों को होने वाले नुकसान की चिंता इसकी सबसे बड़ी वजह है। आइए जानते हैं कि पटाखों पर बैन वाले देश कौन-कौन से हैं और वहां नियम कितने सख्त हैं।

पटाखों पर पूर्ण बैन वाले देश

  • कनाडा : कनाडा में आम लोगों के लिए आतिशबाजी का इस्तेमाल लगभग पूरी तरह प्रतिबंधित है। देश के विस्फोटक अधिनियम (Explosives Act) के तहत बिना अनुमति के कंज्यूमर फायरवर्क्स का आयात, निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री गैरकानूनी मानी जाती है। यहां सिर्फ लाइसेंसधारी प्रोफेशनल ऑपरेटर ही बड़े शो में आतिशबाजी कर सकते हैं।
  • आयरलैंड : आयरलैंड गणराव्य का रुख भी बेहद सख्त है। वहां आम नागरिकों के हाथ में पटाखे देना या उन्हें फोड़ना प्रतिबंधित है। आतिशबाजी की अनुमति सिर्फ लाइसेंस प्राप्त कंपनियों द्वारा आयोजित व्यावसायिक प्रदर्शनों के लिए मिलती है, ताकि सुरक्षा मानकों की अनिवार्य पालना सुनिश्चित हो सके।
  • ऑस्ट्रेलिया : ऑस्ट्रेलिया के ज्यादातर राज्यों में आम जनता के लिए पटाखे खरीदना और फोड़ना वर्जित है। सिर्फ नॉर्दर्न टेरिटरी में हर साल एक खास दिन (टेरिटरी डे) पर इसकी छूट मिलती है। बाकी जगहों पर प्रदर्शन की इजाजत केवल प्रमाणित प्रोफेशनल दलों को तब मिलती है, जब स्थानीय अधिकारियों से पहले ही मंजूरी ले ली गई हो।
  • नेपाल : भारत के पड़ोसी देश नेपाल ने भी त्योहारी सीजन में पटाखों की खरीद, बिक्री, वितरण और फोड़ने पर रोक लगाई है। वहां के गृह मंत्रालय ने प्रदूषण और सार्वजनिक सुरक्षा के फर्ज को ध्यान में रखते हुए कई जिलों में यह प्रतिबंध लागू किया है, ताकि बच्चों और बुजुर्गों को होने वाले नुकसान से बचा जा सके।

पटाखों की जन्मभूमि चीन में भी बड़े शहरों में बैन

चीन को पटाखों का जन्मदाता माना जाता है, लेकिन अपनी ही खोज पर वहां सबसे सख्त रोक है। बीजिंग, शंघाई समेत सैकड़ों बड़े शहरों के शहरी इलाकों में आतिशबाजी या तो पूरी तरह प्रतिबंधित है या फिर कड़े नियमों के दायरे में है। भारी वायु प्रदूषण, आग के खतरे और चोटों के बढ़ते मामलों की वजह से सरकार को यह सख्ती बरतनी पड़ी है।

ब्रिटेन: रात 11 बजे के बाद आतिशबाजी अपराध

ब्रिटेन में पटाखों पर देशव्यापी बैन नहीं है, लेकिन समय और जगह को लेकर नियम बेहद सख्त हैं। वहां रात 11 बजे से सुबह 7 बजे के बीच आतिशबाजी करना गैरकानूनी है। बॉनफायर नाइट, दिवाली, नए साल और चीनी नववर्ष जैसे खास मौकों पर समय-सीमा थोड़ी बढ़ाई जाती है। सार्वजनिक सड़क या गली में पटाखे फोड़ने पर लगभग 90 पाउंड (करीब ₹10,000) तक का ऑन-द-स्पॉट जुर्माना लग सकता है और नियम तोड़ने पर हजारों पाउंड तक का दंड भी भरना पड़ सकता है। 18 साल से कम उम्र के लिए एडल्ट पटाखे खरीदना भी मना है।

भारत में क्या हैं नियम?

भारत में दिवाली पर पटाखों की इजाजत है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और वायु गुणवत्ता (AQI) के मद्देनजर कई राज्यों ने प्रदूषण बढ़ाने वाले बारातियों वाले पटाखों पर रोक लगाई है। सिर्फ सर्टिफाइड green पटाखों की बिक्री की छूट है, जो कम धुआं और कम शोर वाले केमिकल से बनते हैं। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के चलते अक्सर समय और स्तर पर अलग-अलग पाबंदियां लगाई जाती रही हैं।

पटाखों पर बैन क्यों लगाती हैं सरकारें?

पटाखों का इस्तेमाल पर्यावरण, मानव स्वास्थ्य और जीव-जंतुओं के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है। इनके जलने से सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और भारी धातुओं जैसी जहरीली गैसें व कण निकलते हैं, जिससे हवा में पीएम 2.5 का स्तर अचानक कई गुना बढ़ जाता है। इससे दमा, सांस और फेफड़ों की बीमारियां बढ़ने के साथ-साथ दिल के दौरे और नसों से जुड़ी गंभीर समस्याओं का खतरा भी रहता है।

इसके अलावा, पटाखों के कारण आवासीय और व्यावसायिक इलाकों में आग लगने की घटनाएं होती हैं और हर साल हजारों लोग जलने व चोटिल होने का शिकार बनते हैं। तेज धमाकों का असर बेजुबान जानवरों और पक्षियों पर भी पड़ता है, जिससे वे डर, तनाव और सदमे का शिकार होते हैं। इस प्रकार पटाखे न केवल पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं, बल्कि इंसानों, पशु-पक्षियों और समाज की सुरक्षा के लिए भी एक गंभीर समस्या हैं।

उत्सव और सुरक्षा के बीच संतुलन

हर देश का तरीका अलग है — कहीं पूर्ण बैन है, तो कहीं लाइसेंसधारी प्रोफेशनल शो की इजाजत या समय-सीमा के साथ नियंत्रण। चीन के शहरी प्रतिबंध और ब्रिटेन के समय-आधारित नियम साबित करते हैं कि रेगुलेशन का मतलब हमेशा पूर्ण रोक नहीं होता। दिवाली की चमक बरकरार रखने के लिए green पटाखे, डीपम और सीमित आतिशबाजी ही बेहतर विकल्प साबित हो रहे हैं।

Sandhya Samay News

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