Rajasthan News: राजस्थान की सियासत में एक बार फिर तीखी भाषा देखने को मिल रही है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत जोधपुर पहुंचे, जहां हवाई अड्डे पर पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने “जननायक” के नारों के साथ उनका हार्दिक स्वागत किया। मीडिया से बातचीत में गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के जोधपुर में दिए गए बयान पर करारा पलटवार करते हुए उनसे खुले मंच से माफी मांगने की मांग की। उन्होंने साफ कहा कि मुख्यमंत्री की टिप्पणी से उनकी छवि को स्थायी नुकसान पहुंचा है और इसकी भरपाई केवल सार्वजनिक माफी से संभव है।
पहले क्या कहा था CM भजनलाल शर्मा ने?
इस पूरे विवाद की जड़ में दशहरे के अवसर पर जोधपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री की टिप्पणी है। भजनलाल शर्मा ने अशोक गहलोत पर कहा था कि उनका राजनीतिक करियर जोधपुर की एक खाद-बीज की दुकान से शुरू हुआ और कथित रूप से अवैध गतिविधियों से उनके संपर्क वहीं से बने। मुख्यमंत्री ने विपक्ष से बिना आधार आरोप लगाने से पहले सोच-विचार करने की भी अपील की थी। इसी टिप्पणी से आहत होकर गहलोत ने आवाज उठाई है।
गहलोत बोले- राजनीतिक नहीं, व्यक्तिगत पीड़ा पहुंची
हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत में गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री के बीच सम्मानजनक संबंध बने रहना लोकतंत्र के लिए जरूरी है। उनके मुताबिक राजनीतिक मतभेदों की अपनी जगह है, लेकिन व्यक्तिगत मर्यादा की सीमा का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
गहलोत ने बताया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने भजनलाल शर्मा से भेंट की थी और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के साथ अपने मर्यादापूर्ण संबंधों का उदाहरण भी दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष की भूमिका सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना है, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर ऐसे आरोपों की उम्मीद वे नहीं कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के बयान से उन्हें राजनीतिक रूप से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत रूप से चोट पहुंची है।
खाद-बीज दुकान वाले आरोप पर गहलोत का तीखा सवाल
खाद-बीज दुकान वाली टिप्पणी पर गहलोत ने उल्टा सवाल दागते हुए पूछा कि जब उन्होंने अपने शुरुआती दिनों में जोधपुर में खाद-बीज की दुकान खोली थी, तब मुख्यमंत्री को कैसे पता चला कि वहां नकली खाद-बीज बिकते थे या कोई गड़बड़ी होती थी? उन्होंने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को आरोप पत्थर की लकीर नहीं, बल्कि तथ्यों और दस्तावेजों के साथ बोलना चाहिए। गहलोत ने एक बार फिर दोहराया कि भजनलाल शर्मा को अपने बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए, क्योंकि इससे उनकी व्यक्तिगत छवि को अपूरणीय नुकसान पहुंचा है।
भाजपा की रैलियों पर निशाना- “80 वर्षों में पहली बार”
गहलोत ने इस मौके पर भाजपा की रैलियों पर भी तीखा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 80 वर्षों के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार है कि विपक्ष लोकतंत्र बचाने के लिए रैलियां निकाल रहा है और सत्तापक्ष उसके जवाब में काउंटर रैलियां कर रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की रैलियों में भीड़ नहीं जुट पा रही है, जिससे सरकार और संगठन के नेता बौखलाहट की स्थिति में हैं। गहलोत के अनुसार रैलियों के नाम पर वीआईपी रूट, ट्रैफिक डायवर्जन और अन्य व्यवस्थाओं से आम नागरिकों और व्यापारियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस की रैली के दौरान जब व्यापारियों की दिक्कत का मुद्दा उठा था, तब राहुल गांधी ने तत्काल जवाब दिया था, लेकिन अब भाजपा स्वयं प्रदेशभर में रैलियां कर रही है।
गहलोत ने गिनाया अपना सफर
अपने लंबे राजनीतिक सफर का हवाला देते हुए गहलोत ने कहा कि 1980-81 के दौरान भी उनके खिलाफ ऐसे ही आरोप लगाए गए थे। उनके मुताबिक राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप चलते ही रहते हैं और वे इन परिस्थितियों के अभ्यस्त हैं। इसके बावजूद प्रदेश की जनता, कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पार्टी नेतृत्व के विश्वास से वे तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री और तीन बार केंद्रीय मंत्री बनने का अवसर पा चुके हैं। गहलोत ने दावा किया कि मुख्यमंत्री के बयान से उन्हें राजनीतिक रूप से कोई धक्का नहीं लगा; दर्द इसलिए है क्योंकि संबंध व्यक्तिगत थे।
मर्यादा की अपील और दीपावली की शुभकामनाएं
गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री और राज्यपाल जैसे संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों का सम्मान करना हर प्रदेशवासी की जिम्मेदारी है, चाहे उसका झुकाव किसी भी दल की ओर हो। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों और जोधपुरवासियों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कामना की कि यह पर्व सबके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए।
सियासी तनाव गहराने के आसार
इस बयान-बाजी के बीच राजस्थान की राजनीति में तनाव गहराने के संकेत साफ दिख रहे हैं। भजनलाल शर्मा की टिप्पणी के बाद अशोक गहलोत का सार्वजनिक माफी वाला पलटवार बताता है कि आने वाले दिनों में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और तीखा हो सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावी तैयारियों के बीच दोनों दल बयानों के जरिए अपना पक्ष मजबूत करने में जुटे हैं।



























